Praghyan sat sahitya vikray kendra

Praghyan sat sahitya vikray kendra spreading business through out country.

18/11/2022

“सावरकर जी को बदनाम करने की मुहीम चली है, स्वतंत्रता के बाद बहुत तेजी से चली. लेकिन असली लक्ष्य क्या है...?”

21/06/2021
20/05/2020

🔆 कैसे मज़बूत बनें 🔆
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ऐसा क्यों होता है कि कठिन परिस्थितियों में कुछ लोग बिलकुल टूट जाते हैं, बिखर जाते हैं, जबकि इन्ही परिस्थितियों का कुछ लोग न सिर्फ दृढ़ता से सामना करते हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में वो और भी ज्यादा निखर जाते हैं। दुनिया में ऐसा कोई भी नहीं जिसके जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियां नहीं आतीं, परंतु कुछ लोग बुरी से बुरी परिस्थिति से सफलतापूर्वक लड़कर कठिन से कठिन परिस्थिति से बाहर आ जाने की क्षमता रखते हैं। यदि आप भी अपनी मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक क्षमताओं को कुछ इसी तरह से विकसित करना चाहते हैं तो आगे दिए जा रहे सुझावों पर अमल कर सकते हैं।

1. मानसिक शक्ति को बनाए रखें:
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हमेशा याद रखें, आपकी कर्म-प्रधान जिंदगी में होने वाली घटनाओं को आप स्वयं नियंत्रित करते हैं: जीवन में घट रही घटनाओं पर नियंत्रण की ताकत ही शक्ति है, जबकि ऐसी शक्ति के आभाव और लाचारी की स्थिति को कमजोरी कहते हैं। आप चाहे किसी भी परिस्थिति में हों, कुछ बातें ऐसी होती है जिन्हें आप नियंत्रित कर सकते हैं। हाँ, कुछ बातें अवश्य होती हैं जो आपके नियंत्रण के बाहर होती हैं। वो बातें, जिन्हें आप नियंत्रित कर सकते हैं, उनपर ध्यान देना मानसिक शक्ति के विकास की दिशा में उठा पहला कदम है। जो बातें आपको परेशान कर रही हैं, उनकी एक सूची बना लीजिये। फिर इन परेशानियों को हल करने के लिए जिन बातों की आवश्यकता है, उन्हें भी सूचीबद्ध कर लीजिये। पहले वाली सूची की सारी बातों को ह्रदय से स्वीकार करिये, क्योंकि यही सच्चाई है। फिर, अपनी सारी ऊर्जा को अपने द्वारा बनाई गयी दूसरी सूची पर केंद्रित करें।

मुश्किल परिस्थितियों से लड़ लेने की क्षमता रखने वाले लोगों पर किये गए अध्यन से स्पष्ट हुआ है कि धैर्यवान और जुझारू लोग हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहते हैं। हर स्थिति में उन बातों पर ध्यान देते हैं, जिन्हें वो नियंत्रित कर सकते हैं। चाहे उनकी परेशानी किसी और की दी हुई क्यों ना हो, वो उस परेशानी से बाहर आने को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। वहीँ, वैसे लोग जो थोड़ी सी परेशानी में ही बिखर जाते है, उनके लिए पाया गया है कि वो जिम्मेदारी से भागते हैं, समस्या से निकालने वाले क़दमों को नजरअंदाज करते हैं। ऐसे लोगों को यह लगता है कि उनकी बुरी स्थिति के लिए वो खुद तो जिम्मेदार हैं नहीं, फिर वो कैसे इस पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं।

2. अपने रवैये पर गौर करें:
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कभी कभी हम ऐसी परिस्थितियों में होते हैं, जिनको हम बदल नहीं सकते। हालाँकि ऐसी स्थितियां बहुत कष्टप्रद होती हैं, परंतु फिर भी जिंदगी के प्रति सकारात्मक रवैया रख कर आप इस स्थिति में भी अपने आप को संभाल सकते हैं। जैसा कि विक्टर फ्रैंक ने कहा है- "हम सब, जो बंदी शिविरों में रहे हैं, हमारी झोपड़ियों के बीच घूम-घूमकर सभी को सांत्वना और अपनी रोटी के आखिरी टुकड़े को दे देने वाले उन इंसानों को भूल नहीं सकते। भले ही वो संख्या में कम रहे हों, पर वो इस सच्चाई का पर्याप्त प्रमाण देते थे कि इंसान से उसका सब कुछ छीना जा सकता है, परंतु इंसान से उसके किसी भी परिस्थिति में अपने नियत को अपने तरह से निर्धारित करने की स्वतंत्रता कोई नहीं छीन सकता। ऐसा करने से उसको कोई नहीं रोक सकता।" आपके साथ चाहे जो कुछ भी हो रहा हो, सकारात्मक बने रहने में ही बुद्धिमानी है।

जो इंसान आपकी जिंदगी को दुखी बना रहा है, उसे भी आप अपने उत्साह को तोड़ने की इजाजत मत दीजिये। आश्वस्त रहिये, आशावान रहिये और हमेशा इस बात को याद रखिये कि कोई भी आपकी नियत और सोच को आपसे नहीं छीन सकता है। एलिनोर रूज़वेल्ट ने कहा है- "आप दोयम दर्जे के हैं, ऐसा आपके इजाजत के बगैर आपको कोई महसूस नहीं करा सकता।"

जीवन में चल रहे किसी एक कष्ट या परेशानी का असर अपने जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर मत पड़ने दीजिये। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने काम से भीषण परेशान है, तो उद्वेलित होकर अपने इर्द-गिर्द रहने वाले उन महत्वपूर्ण लोगों से ख़राब बर्ताव मत करिये जो और कुछ नहीं करते, सिर्फ आपकी मदद करने की कोशिश करते हैं। अपने सोचने-समझने के ढंग को नियंत्रित रख कर आप अपने कष्टों से उत्पन्न हो रहे दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं। दृढ़ निश्चयी लोग अपनी हर मुसीबत को तबाही में नहीं बदलने देते, न ही वो नकारात्मक घटनाओं के प्रभाव को जीवन पर्यन्त दिल में बिठाये रखते हैं।

अगर इससे आपको मदद मिलती हो, तो इस शांति-पाठ को याद करें और पढ़ें - मुझे ऐसी सोच और ऐसा शांतचित्त मिले जिससे मै उन बातों को स्वीकार कर पाऊँ जिन्हें मैं बदल नहीं सकता, वह शक्ति मिले जिससे मैं उन परिस्थितियों को बदल पाऊँ जिन्हें बदल सकता हूँ, और ऐसा विवेक मिले जिससे मैं अलग-अलग परिस्थितियों के बीच का फर्क समझ पाऊँ।

3. जीवन के प्रति अपने उत्साह को पुनर्जीवित करें:
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भावनात्मक रूप से मजबूत व्यक्ति हर और हरेक दिन को एक तोहफा, एक सौगात समझते हैं। वो अपने समय का उपयोग इतने सकारात्मक ढ़ंग से करते हैं कि उनके इस तोहफे का समुचित और भरपूर उपयोग होता है। याद करें की बचपन में आप कितनी छोटी-छोटी बातों से रोमांचित हो जाते थे- पतझड़ के मौसम में पत्तों से खेलना, किसी जानवर की काल्पनिक तस्वीर बनाना, किसी चीज को ज्यादा खा लेना- इन छोटी-छोटी बातों में कितना आनंद आता था! अपने अंदर के उस बच्चे को ढूँढिये। अपने अंदर के उस बच्चे को जीवित रखिये। आपकी मानसिक और भावनात्मक मजबूती इस पर निर्भर करती है।

4. अपने ऊपर भरोसा रखिये:
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आपने इतना कुछ किया है जीवन में: आप एक बार फिर ऐसा कर सकते हैं। आज की आज सोचेंगे, कल की कल- इस सोच के साथ आप मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति से पार पा सकते हैं। ऐसी सोच को विकसित करना आसान काम नहीं है; ऐसा कहना बहुत आसान है, करना उतना ही मुश्किल। मगर, जब आप अभ्यास करेंगे तो यह संभव हो जायेगा। जब कभी आपको ऐसा लगे कि बस अब सब कुछ खत्म होने वाला है, तो आँखें बंद करिये और एक गहरी सांस लीजिये। आप अपने प्रयास में अवश्य ही सफल होंगे, बस नीचे लिखी इन बातों का ध्यान रखिये:

नकारात्मक सोच वालों की बातों को अनसुनी करिये। कुछ लोग आदतन आप पर, आपकी क्षमताओं पर संदेह करते रहेंगे। आपको बस उनकी अनदेखी करनी है, उनको अनसुना करना है और उनको गलत सिद्ध करना है। नाउम्मीद लोग आपको भी नाउम्मीद और निराश न बना दें- इसका ख्याल रखना है। वास्तविकता तो यह है कि दुनिया आपसे कह रही है कि आओ, मुझे बदलो! फिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं आप?

अपनी सफलताओं को याद करिये। यह आपके आत्मविश्वास को जगायेगा, आपके सफ़र में उत्साह लाएगा। चाहे वह आपके पढाई-लिखाई की सफलता हो, चाहे किसी मशहूर व्यक्ति से की गयी आपकी बातचीत या फिर आपके बच्चे के जन्म लेने की खुशी- इन सभी अच्छे पलों को अपने आप को मजबूत बनाने के अपने प्रयासों में मददगार बनाइये। सफल होने के लिए सकारात्मक होना जरूरी है और जैसी हमारी सोच होती है, दरअसल, हमारी जिंदगी वैसी ही होती है।

किसी भी हाल में प्रयास करना न छोड़ें। ऐसा कई बार होगा कि आपको अपने क्षमताओं पर संदेह होगा, क्योंकि कई बार ऐसा होगा कि आप प्रयास करेंगे परंतु आपको सफलता नहीं मिलेगी। इस बात का ध्यान रखिये की यह इस प्रक्रिया में होने वाली सामान्य सी बात है। सिर्फ इस वजह से कि आपको अपने प्रयासों में एकाध बार असफलता मिली, निराश मत होइए और प्रयास करना मत छोड़िये। दीर्घकालिक नजरिया रखिये और सोच को विशाल बनाये रखिये। फिर से प्रयास करिये। याद रखें, असफलता की सीढियाँ ही इंसान को सफलता के शिखर पर ले जाती हैं।

5. परेशानियों को पहचानें:
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यह समझने की कोशिश करें कि जो बात आपको परेशान कर रही है, क्या वह सचमुच परेशान होने वाली बात है? किसी साथी ने कोई सवाल किया, या सड़क पर किसी ड्राईवर ने अपनी गाड़ी को गलत तरीके से चला कर आपको परेशानी दी, तो देखें कि क्या यह सचमुच इतना परेशान होने की बात है? यह देखें कि ऐसी बातें आपके लिए क्या मायने रखती हैं। अपना ध्यान सिर्फ उन बातों पर केंद्रित रखें जो आपके जीवन के लिए सही मायने में महत्वपूर्ण हैं और इसके अलावा किसी और बात की व्यर्थ चिंता न करें। जैसा कि सिल्विया रॉबिंसन ने कहा है- "कुछ लोग सोचते हैं कि बात को दिल में बिठाए रखने से इंसान मजबूत बनता है, पर इसके उलट बहुत बार ऐसा, बातों को भुला देने से होता है।"

6. जो लोग आपके जीवन में अहम् हैं, उनसे संपर्क बनायें:
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परिवार और दोस्तों के साथ-साथ, उन लोगों के साथ भी समय व्यतीत करें जो सकारात्मक और सहयोगी स्वभाव के हैं। अगर इस तरह के लोग आपके इर्द-गिर्द न हों, तो नए दोस्त बनाएं। अगर इस तरह के दोस्त न मिलें, तो उनको मदद करिये जिनको आपसे ज्यादा मदद की जरूरत हो। कभी-कभी, जब हम अपनी स्थिति को सुधार पाने की स्थिति में नहीं होते, तो ऐसे में बहुत बार दूसरों के लिए कुछ करने से इंसान न सिर्फ अच्छा महसूस करता है, बल्कि इससे उसको अपने अंदर की ताकत का भी अहसास होता है। ऐसा करने से इंसान को अपने आप को, अपनी ताकतों को पहचानने में मदद मिलती है।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है- इसमें शक की गुंजाईश नहीं। विभिन्न अध्यन और विज्ञानं, सभी बताते हैं कि इंसान का सामाजिक स्वास्थ्य उसके भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आपको समाज के साथ घुल-मिल कर रहने में दिक्कत होती है, तो यह एक समस्या है। आपको इसका इलाज ढूंढना चाहिए। कैसे, यह हम आपको नीचे बताते हैं:

◾ किसी के साथ बहुत ही अच्छी, सकारात्मक और विचारोत्तेजक बातचीत करें।
◾ आपसे जो गलतियां हुईं, उनको भूलिए- उनको दिलो-दिमाग में घर मत बनाने दीजिये।
◾ जब कोई रिश्ता टूटे, तो अपने आप को संभालिये और इस ग़म से बाहर आएं।
◾ शर्मीलापन, हिचक, झिझक से पीछा छुड़ाईए।
◾ बहिर्मुखी व्यक्ति बनिए।

7. काम और मनोरंजन, आराम और काम में समन्वय बिठाएँ:
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यह काम तो कर सकते हैं न आप? लोग इसकी ओर ध्यान नहीं देते क्योंकि उनको यह भ्रम रहता है कि यह बहुत मुश्किल काम है। या तो हम इतना काम करते हैं कि उसके बोझ तले ही दब जाते हैं, या फिर आराम से, हिप्पो के अंदाज में, बेकार बैठे रह कर अवसर का इंतजार करते रहते हैं। काम और मनोरंजन, आराम और काम में अच्छा समन्वय बैठाने से आपको इन सबका महत्त्व समझ में आएगा। आपको नदी के दूसरे तरफ की घास ज्यादा हरी है, ऐसा दिखना बंद हो जायेगा।

8. आपके पास जो है उसके लिए शुक्रगुजार बनें, कृतज्ञ रहें:
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जिंदगी कठिन है, परंतु यदि आप जिंदगी को नजदीक से देखेंगे तो पाएंगे कि आपके पास ऐसी अनगिनत चीजें हैं जिनके लिए आपको शुक्रगुजार होना चाहिए। वह बातें जो बीते समय में आपको खुश रखती थीं, उनको याद करने से आपको वर्तमान समय में भी अच्छी अनुभूति होगी। अपने इर्द-गिर्द की दुनिया से आनंद आप प्राप्त करते हैं, वही आपको वो शक्ति प्रदान करती है जिससे कि मुश्किल हालातों का सामना कर लेते हैं। इसलिए, आपके पास जो है, उसपर ध्यान दीजिये और उसका भरपूर आनंद उठाईये। हो सकता है आपके पास आपकी पसंद का वह नया शर्ट नहीं हो, या ऐसा और भी कुछ हो सकता जिसकी आप इच्छा रखते हैं, परंतु वह आपके पास नहीं है, तो कम से कम यह कंप्यूटर तो है जो इंटरनेट से जुड़ा है और जिसका उपयोग करना आप जानते हैं। कुछ लोगों के पास घर नहीं, कंप्यूटर नहीं, शिक्षा-दीक्षा नहीं। उनके विषय में सोचिये।

9. बातों को दिल से न लगायें:
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चार्ली चैपलिन को कॉमेडी के बारे बहुत कुछ पता था। उनका यह कथन मशहूर हैं- "नजदीक से देखने पर जिंदगी त्रासदी है, परंतु यदि इसको समझने की कोशिश करें तो यह कॉमेडी है।" अपनी छोटी-छोटी परेशानियों से बुरी तरह प्रभावित हो जाना आसान है। यह परिस्थिति हमारी हर क्रिया-प्रतिक्रिया को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करती है। इसलिए जरा सोचिये और जीवन को थोड़ा शांतचित्त होकर, आनंदभाव और थोड़ा ज्यादा प्यार से देखिये। जीवन की अनूठी विविधताओं, अपार संभावनाओं, के साथ-साथ इसकी इसकी विसंगतियां भी आपके चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए और आपको यह अहसास कराने के लिए कि आप कितने भाग्यशाली हैं, काफी हैं।

इस बात को स्वीकार करें की जीवन को अगर जरूरत से ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाए तो इसमें आनंद ज्यादा है। हाँ, सिर्फ हँसते रहना और आनंद उठाते रहने का नाम जीवन नहीं है, पर जीवन में इनका स्थान निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

10. हमेशा याद रखें-
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कुछ भी स्थायी नहीं है: अगर आप किसी ऐसे संकट या दुख से घिरे है जिससे आप उबर नहीं पा रहे हैं, तो बस शांतचित्त हो जाइये और जो हो रहा है, उसको होने दीजिये। अगर आपकी तकलीफ कुछ ज्यादा ही लंबी खिच रही है, तभी भी याद रखिये जैसे सब कुछ गुजर जाता है, वैसे यह भी गुजर जायेगा।
....समाप्त
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✍ साभार: awgpskj[dot]blogspot[dot]com (अखण्ड ज्योति)

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