20/12/2025
रूख साटे शीश कटे तो भी सस्तो जाण की कहावत को चरितार्थ करने वाले राजस्थान की जीवन रेखा कही जाने वालीअरावली पर्वतमाला आज चीख -चीख कर पुकार रही होगी की इंसान के आधुनिक विकास की आड में मुझे कटना होगा।मेरी उंचाई कम हो गई है इसलिए मुझे कटना होगा। हे किसान अब में तेरे लिए बंगाल की खाड़ी व अरब सागर के मानसून को रोक कर वर्षा करवाना मुशकिल होगा क्योंकी मेरी ओकात अब केवल मीटरों में आंकी जा रहा है। ये नदियों ,झीलें,वन्य जीव जन्तुओं,वृक्षों ,जड़ी -बूंटियां ,पक्षियों ओर तो ओर यहां तक की मनुष्य का वर्तमान व भविष्य संकट में पड़ने वाला है।अरावली की वादियों में महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल ,महाराणा सांगां,महाराणा अमरसिंह, खेतड़ी के महाराजा अजित सिंह ,मींरा,महारानी पदमिनी,रानी हाडी ,अमृता देवीआदि अनेक वीरों व विरांगनाओं ने अपना बलिदान दिया है। कोरोना जैसे संकट को आज इंसान भूल चुका है।ऑक्सीजन के अभाव में क्या हाल हुआ था।उसे शायद हम भूल रहें है।अतःविकास ऐसा हो जिससे इस परितंत्र को नुकसान न हो। कानून ऐसे बने जिससे अरावली ही नहीं उससे जुड़े सम्पूर्ण परितंत्र पर विपरीत प्रभाव न पड़े।कुछ तस्वीरें है अरावली की वादियों की जिनमें दोस्तों के साथ देख रहे है।लेकिन इनके संरक्षण के बिना आगामी पीढियां इन्हे देख पायें या नहीं अभी यह कहना मुशकिल है। # save Aravli mountain ecosystem # Tranding