Upendra Vastu Resolve

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11/04/2026

वास्तु देवता बलि प्रकरण,घर/मकान खूंटना /बांधना/कीलन प्रयोग। #वास्तु

01/04/2026

पहले दक्षिण बाद में उत्तर,
क्रम से घर बनवा लेना।
कपि कपोत संग्राम का फोटो,
कभी ना घर में लगा देना।। (वास्तु चालीसा)UVR...

 #वास्तुचालीसा
31/03/2026

#वास्तुचालीसा

🌹 वास्तु टिप्स 🌹 मुख्य द्वार पर सजावट के रूप में कंटीले (कैक्टस)जाती के पौधे नहीं लगाना चाहिए उपेंद्र।
24/01/2026

🌹 वास्तु टिप्स 🌹
मुख्य द्वार पर सजावट के रूप में कंटीले (कैक्टस)जाती के पौधे नहीं लगाना चाहिए उपेंद्र।

भवन निर्माण करते समय निम्न वास्तु शास्त्रीय सूत्रों का ध्यान रखना लाभदायक है।क्योंकि इन सूत्रों में अठारह (18) ऋषि- मुनि...
17/01/2026

भवन निर्माण करते समय निम्न वास्तु शास्त्रीय
सूत्रों का ध्यान रखना लाभदायक है।
क्योंकि इन सूत्रों में अठारह (18) ऋषि- मुनियों के दिशा निर्देश स्वरूप आशीर्वाद भी साथ रहता है।
इन्हें भवन निर्माण में यथासंभव,स्थान स्थिति अनुसार प्रयोग करना चाहिए।
आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना (बिहार)

#घर

08/01/2026

🌹 वास्तु टिप्स 🌹
घर में समयानुसार सर्वौषधि जल से पोंछा,पंचगव्य एवं पंचामृत के छिड़काव करने से अधिक से अधिक नकारात्मकता दूर हो जाती है उपेंद्र।

30/12/2025
मुझे और मेरी पत्नी को भी पैरों में दर्द रहता है।एक लड़का है (20 वर्ष का), उसको आर्थराइटिस(कमर के नीचे बेकाम सा हो गया) ह...
20/12/2025

मुझे और मेरी पत्नी को भी पैरों में दर्द रहता है।
एक लड़का है (20 वर्ष का), उसको आर्थराइटिस(कमर के नीचे बेकाम सा हो गया) हो गया है।
इतना ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं ,
लेकिन उन्नति जैसे हम से रूठ गई है।
स्थिरता (सकून)जिन्दगी से समाप्त हो गया है।

हमको तो यह सब जानकारी नहीं था, एक पंडित जी (ज्योतिषी) को बुलाया था। उन्होंने कहा है नैरित्य कोण (SW) में ही शौचालय सेप्टिक टैंक बनाना चाहिए।
हमने बनवा लिया, उसके कुछ दिन बाद से जैसे हमारे हंसते खेलते परिवार को किसी की नजर लग गई है।
(भवन स्वामी के वचन)

वास्तु अनुसार निरीक्षण:--
उत्तर एवं पूर्व दिशा में मुख्यद्वार,
चतुष्कोण भवन
ईशान कोण में चापाकल
उत्तरी वायव्य में रसोई घर
नैरित्य कोण में शौचालय
दक्षिण दिशा में सेप्टिक टैंक।

अब देखते हैं ग्रंथ क्या कहते हैं !!

याम्यां नैरित्ययोर्मध्ये पुरिषत्याग मन्दिरम्।
( #विश्वकर्मप्रकाश)
(दक्षिण एवं नैरित्य कोण के बीच में शौचालय का
स्थान होना चाहिए उपेंद्र)

पुरीषत्यागसदनं मध्ये राक्षसकालयो:।
( #वास्तुसार)
दक्षिण एवं नैऋत्यकोण के बीच में शौचालय निर्माण उत्तम होता है।
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गृहस्य दक्षिणे भागे कूपो दोषप्रदो मत:।
अपत्यहानिर्भूनाशस्त्वथवा रोगमद्भूतम।।
( #विश्वकर्मप्रकाश)

घर के दक्षिण दिशा में कुआँ दोषकारक होता है।इससे सन्तानहानि,धनहानि एवं *अद्भुत रोग* उत्पन्न होता है।
(यहां कुंआ का अर्थ गड्ढ़ा,सेप्टिक टैंक से भी
जोड़कर देखा जा सकता है उपेंद्र)

नश्यन्ति पुरुषास्तत्र देवता च प्रणश्यति।
धनहानि करो नित्यं रोगकृत दक्षिण:पल्वः।।
( #अपराजितपृक्षा)

दक्षिण दिशा में प्लव (ढलान, गढ्डा, सेप्टिक टैंक, कुआं) होने पर पुरुषार्थ (मेहनत,कर्मफल) का नाश हो जाता है। देवताओं का भी सहयोग नहीं मिलता है।
रोग बीमारी में रोज धनहानि होता रहता है।
(विशेष रूप से पुरुष को)

प्रवर्तयेद गृहे पुंसां रोगांश्च मृत्यु दायकान।
धनहानि तथा नित्यं कुरुते नैऋतिप्लवा।।
( #अपराजितपृक्षा)

घर के नैरित्य कोण में प्लव होने पर मृत्युतुल्य कष्टकारी रोग होने की संभावना रहती है और उसके कारण नित्य ही धनहानि होता है।

#विमर्श --- उपरोक्त ग्रंथ सूत्र इनके घर पर पूर्ण रूप से प्रभावी है।
भवन का दक्षिण एवं नैरित्य प्रभाग पूर्ण रूपेण असंतुलित है,
नैरित्य कोण में वास्तु मंडल अनुसार शारीरिक अंग पांव होता है। और घर में तीन (माता,पिता, पुत्र) लोग पांव संबंधित परेशानी से जूझ रहे हैं।
इससे स्पष्ट होता है जो ग्रन्थों में वर्णन मिलता है वह पूर्णतः सत्य है।
लोग (कुछ वास्तुशास्त्री)पढ़ना नहीं चाहते हैं तो क्या किया जा सकता है।
और तर्क देंगे कि ग्रंथ सैंकड़ों वर्ष पहले लिखे गए हैं।
आज की स्थिति बिल्कुल अलग है।
दोस्त वस्तुतः आपकी रुचि नहीं है या पढ़ना(समझना) नहीं आता है तो कोई कुछ नहीं कर सकता है।
सफलता की पहली सीढ़ी है मेहनत ।
ग्रन्थों में गूढ़ार्थ होते हैं शब्दार्थ(सामान्य अर्थ)नहीं।
किताबों में शब्दार्थ होते हैं। आज इतना ही फिर समय मिलने पर अगली चर्चा करते हैं आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना ( बिहार)।
#घर #मकान #वास्तु #वास्तुटिप्स #शौचालय

आमदनी (पैसे) की कोई कमी नहीं है, अध्यात्म में रुचि है।लेकिन फिर भी परेशान हैं,एक्सिडेंट (पैरों में चोट) हुआ, बिना किए कल...
20/12/2025

आमदनी (पैसे) की कोई कमी नहीं है, अध्यात्म में रुचि है।
लेकिन फिर भी परेशान हैं,एक्सिडेंट (पैरों में चोट) हुआ,
बिना किए कलंक मिला,अपनो से धोखा मिला,
संतान (गर्भ) संबंधित परेशानी।(भवन स्वामी के वचन)।

#वास्तु अनुसार निरीक्षण किया :- --

उत्तरामुखी भवन, निर्माण चंद्रवेधी।(शुभ)
उत्तर दिशा में खुला (बाउंड्री) स्थान,(शुभ)
उत्तर दिशा में कुआं, ईशान में बोरवेल,(शुभ)
बाउंड्री में एक गईया, बछड़े के साथ।(शुभ)

भवन का सोम पद का मुख्यद्वार,ईशान में पूजा स्थान।(शुभ)।
वायव्य कोण में अतिथि कक्ष,पूर्व एवं पश्चिम दिशा में बेडरूम, अग्निकोण में रसोई,ब्रह्मस्थान स्वच्छ,(सब ठीक)।
नैरित्य कोण में स्टोर एवं शौचालय।(शुभ/अशुभ)।
घर से बाहर दीवार से लगा हुआ ,
नैरित्य कोण में शौचालय उसके बाद(साथ)सेप्टिक टैंक।
(सबसे अशुभ)।

अब देखते हैं शास्त्र क्या कहते हैं!!!

*पूज्या लाभकरी नित्यं पुत्रपौत्रविवर्धिनी ।
कामदा भोगदा चैव धनदाचोत्तरप्लवा।।
( #अपराजितपृक्षा)

#अर्थात-
जो भूमि उत्तर दिशा में प्लव(खुला / ढ़लान) वाली होती है,
वह पूज्या होती है।जो नित्य लाभकारी(उन्नतिशील)होती है।वहां रहने वालों के परिवार में पुत्र-पौत्रों की वृद्धि होती है, यह भूमि सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली होती है और इसमें सभी प्रकार के भोग साधन उपलब्ध होते रहते हैं।

उदगादिप्लवमिष्टं विप्रादीनां प्रदक्षिणेनैव।

#महर्षि भृगु ने ढलान के अनुसार वर्णानुसार उत्तर दिशा में प्लव(ढलान/खुला) वाली भूमि ब्राह्मणों के लिए उत्तम बताया गया है।

उत्तरे वंश वृद्धि।
( #विश्वकर्मप्रकाश)

अर्थात उत्तर दिशा में प्लव/ढलान उन्नति (वंश वृद्धि) देता है।
#प्लव का अर्थ (ढलान,खुला स्थान, कुआं, बोरिंग, गढ्डा आदि)।

#सोमे चैव कृते द्वारे यज्ञशीलो भविष्यति।
( #वास्तुविद्या)
(सोम पद में मुख्यद्वार आध्यात्मिक स्वभाव देता है)

सोमे तु धर्मशीलत्वं।
( #विश्वकर्मप्रकाश)
(सोम पद पर मुख्यद्वार होने से धार्मिक आचरण होता है)

सवृषाश्च सवत्साश्च ततो गास्तत्र वासयेत।
यतो गोभिः परिक्रान्तमुपघ्राणैश्च पुजितम्।।
( #मयमतम)

भूमि शुद्धि के संदर्भ में बताया गया है उपेंद्र -- की वहां पर वृषभ (बैल) एवं बछड़ों के साथ गायों को बसा देना चाहिए, क्योंकि गायों, बछड़ों को चलने ,सूंघने से भूमि पवित्र हो जाती है।

आमदनी/धन - धान्य की कोई कमी नहीं , धार्मिक स्वभाव है।
(☝️उपरोक्त स्थितियों अनुसार शास्त्र वचन सिद्ध हो रहा है )
Upendra Vastu Resolve
*प्रवर्तयेद गृहे पुंसां रोगांश्च मृत्यु दायकान।
धनहानि तथा नित्यं कुरुते नैऋतिप्लवा।।
( #अपराजितपृक्षा)

अर्थात नैरित्य कोण में प्लव (ढलान, गड्ढ़ा, सेप्टिक टैंक) वाली भूमि वाले भवन में रहने वाले को धनहानि,रोग(शारीरिक, मानसिक,आर्थिक) या मृत्युतुल्य कष्ट की संभावना रहती है

*नैऋत्ये च यदा लग्ना शालाश्च वास्तु बाह्यतः।
नैऋतयं नाम तदवास्तु व्याध्याधिक्यम तु मृत्युकृत।।
( #अपराजितपृक्षा )

अर्थात यदि किसी गृह की नैरित्य कोण से लगी हुई कोई शाला (कमरा) बाहर की ओर बनी हुई हो तो उसे नैरित्य वास्तु कहते हैं। उसमें इतनी व्याधियां आती है कि मृत्यु का संकट उत्पन्न हो सकता है।

#नैरित्यकोण में असंतुलन से #पूतना(विक्षेप देवता) बलवती हो जाती है जो संतान (गर्भ) संबंधित परेशानी की संभावना को बढ़ाता है।
(पूत+ना)।

स्त्रीदोषाः सुतमरणं प्रेष्यत्वं चापि चरणवैकल्ये।
( #वास्तुसौख्यम)

अर्थात अगर वास्तु पुरुष के चरणों(नैरित्य कोण )में असंतुलन हो तो स्त्रीदोष, संतान हानि, दासता होती है उपेंद्र।

नैरित्य कोण में वास्तु मंडल अनुसार
#वास्तुपुरुष का पैर आता है।

पांव, संतान संबंधित, कलंक (मृत्युतुल्य कष्ट),
अपनो से विश्वास का धोखा आदि संबंधित परेशानी ।
(☝️ उपरोक्त स्थितियों अनुसार शास्त्र वचन सिद्ध हो रहा है।)

#विमर्श --- कुछ लोग (स्मार्ट वास्तुशास्त्री)कहते मिल जाते हैं,
कि आज के समय में ग्रंथों का कोई सूत्र कारगर नहीं है।
ग्रंथ जिस समय लिखे गए थे उस समय और आज का परिवेश (रहन सहन) स्थितियों में बहुत अंतर है।

हां, यह सत्य है।

लेकिन दोस्त,
मैं तो कहता हूं कि जिस मानसिक स्तर से ग्रंथ लिखे गए हैं,
क्या हमारा मानसिक स्तर उसके नजदीक भी पहुंच पाया है!!!
क्या शास्त्रानुसार (ढोंग, दिखावा, झूठ से हटकर)खुद भी कुछ जीवन जीने का प्रयास करते हैं?
और अपना नहीं ग्रन्थों का दोष देते हैं और स्मार्टनेश दिखाते हैं।
महत्वपूर्ण है कि आज के परिवेश अनुसार
ग्रंथ सूत्रों को देखने का आपका नजरिया क्या है?
पोस्ट लम्बा हो रहा है, समय मिलने पर फिर अगली चर्चा करते हैं, आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना (बिहार)
#निर्माण #मकान #घर #वास्तु #निरीक्षण

  in hands 👌💐चौपाई कहें या छंद कहें,दोहा कहें या तुकबंदी।वास्तुशास्त्र के सूत्रों का,केवल की है लयबंदी।।अनेक पारंपरिक वा...
19/12/2025

in hands 👌💐
चौपाई कहें या छंद कहें,
दोहा कहें या तुकबंदी।
वास्तुशास्त्र के सूत्रों का,
केवल की है लयबंदी।।
अनेक पारंपरिक वास्तुशास्त्रीय ग्रन्थों, पुराणों, शास्त्रों के
अमूल्य सूत्रों (श्लोकों) के प्रमाण के साथ,
परन्तु अपनी शैली में, चालीस सूत्रों में वास्तुशास्त्र के नियम, दोष,उपाय,विधान आदि बताने का प्रयास किया है।
इस लिए नाम दिया है #वास्तुचालीसा।
एक झलक वास्तु संबंधित मुहूर्त विचार देखें --
Upendra Vastu Resolve
चैते रोग वैशाखे भोग,
ज्येष्ठ आषाढ़ रूलाता है।
सावन सुख में भादो खाली,
क्वांर क्लेश कराता है।।
कार्तिक झगड़े अगहन मौज में,
पौष में क्यों घर बनाता है।
माघ महीना आग लगावे,
फाल्गुन लक्ष्मी लाता है।।
उत्तरायण दक्षिणायन समझो,
कृष्ण से शुक्ल सयाना है।
वर्ग कांकिणी आयादी संग,
नाम नक्षत्र मिलाना है।।
नन्दा भद्रा जया व रिक्ता,
पूर्णा तिथि कहाता है।
रिक्ता रिक्त रखे घर वाड़ी,
दर्शे गर्भ गिराता है।।
सोम बुध व गुरु शुक्र,
सुंदर घर बनवाता है।
रवि मंगल को घर न बनाओ,
यह घर में आग लगाता है।।
ध्रुव स्थिर नक्षत्र पहचानो,
राशि लग्न मिला लेना।
मुहूर्त शास्त्र बहुत गूढ़ उपेंद्र,
यथासंभव मिलवा लेना।।
(वास्तु चालीसा का अंश)
#ध्यान रखें:- बहुत से लोग इसकी कॉपी करके
अलग अलग प्रकार से पोस्ट कर रहे हैं।
आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना (बिहार)।
#वास्तु #वास्तुटिप्स #वास्तुचालीसा

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