30/05/2026
*जलेस रांची का हिंदी पत्रकारिता दिवस**
*उपस्थिति*: कुमार बृजेंद्र,अपराजिता मिश्रा,डॉ किरण डॉ आलम आरा,फैसल अनुराग, श्रीनिवास, सुधीर पाल, वीना श्रीवास्तव, यास्मीन लाल, विक्की मिंज, बसंत हेतमसरिया, निगार सुल्ताना, मोईज उद्दीन मिरदाहा,छोटनी असुर, अली अंसारी,नरेश लाल,विपुल कच्छप,रामधनी खड़िया, कलाम खान और एम जेड ख़ान.
बैठक में कुमार बृजेंद्र ने बशीर बद्र के निधन पर शोक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऐसा समय में उनका जाना पूरे साहित्य जगत को शुकाकुल करता है . उनकी शायरी इंसान दोस्ती, मुहब्बत और भाईचारे को मजबूत करती है. जलेस रांची उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करता है.
उनकी कई मशहूर ग़ज़लों का पाठ किया गया.
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरा होने पर जलेस रांची के द्वारा सफदर हाशमी सभागार,रांची में एक चर्चा *हिंदी पत्रकारिता :* *
*आज और कल* आयोजित की गई .
चर्चा में मुख्य रूप से से सुधीर पाल,श्रीनिवास,फैसल अनुराग जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने 200 वर्ष के हिंदी पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डाला और आज की पत्रकारिता के गिरते स्तर पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया सत्ता संस्थान के अधीन हो चुका है जिसके कारण भारत का लोकतंत्र खतरे में आ चुका है. आज के संक्रमणकाल में आम जनता तक सच्चाई नहीं पहुंचने दी जा रही है . जो गंभीर चिंता का विषय है.
पानी और बिजली को लेकर कई राज्यों में लोग सड़कों पर हैं, पर मीडिया से खबरें गायब हैं.
इस गंभीर चर्चा में बसंत हेतमसरिया,दया मनी बारला,डॉ किरण ,यास्मीन लाल ,नरेश लाल,वीना श्रीवास्तव, कुमार बृजेंद्र, विक्की मिंज ,आलम आरा आदि ने भी भाग लिया और कहा कि आज पत्रकारिता का स्तर बहुत नीचे गिर गया और अब लोगों का विश्वास पत्रकारिता से धीरे - धीरे उठता जा रहा है.
सभा का संचालन अपराजिता मिश्रा और अध्यक्षता कुमार बृजेंद्र ने की.
एम जेड ख़ान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
एम जेड ख़ान