Rajesh jha

Rajesh jha हाँ में ब्राह्मण हूँ

16/11/2022
03/10/2022

प्राचीन समय भारत मे कभी छुआछुत रहा ही नहीं, और ना ही कभी जातियाँ भेदभाव का कारण होती थी।
चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।

सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की।

सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?

महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो।

विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।

भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।

श्री कृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,

उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे।

यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्री कृष्ण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया।

राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे।

उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे

तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार।

वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे वो बदले जा सकते थे, जिसको आज इकोनॉमिक्स में डिवीज़न ऑफ़ लेबर कहते हैं वो ही।

प्राचीन भारत की बात करें, तो भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस नन्द वंश का राज रहा वो जाति से नाई थे ।

नन्द वंश की शुरुवात महापद्मनंद ने की थी जो की राजा नाई थे। बाद में वो राजा बन गए फिर उनके बेटे भी, बाद में सभी क्षत्रिय ही कहलाये।

उसके बाद मौर्य वंश का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत चन्द्रगुप्त से हुई,जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे और एक ब्राह्मण चाणक्य ने उन्हें पूरे देश का सम्राट बनाया । 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा।

फिर गुप्त वंश का राज हुआ, जो कि घोड़े का अस्तबल चलाते थे और घोड़ों का व्यापार करते थे।140 साल देश पर गुप्ताओं का राज रहा।

केवल पुष्यमित्र शुंग के 36 साल के राज को छोड़ कर 92% समय प्राचीन काल में देश में शासन उन्ही का रहा, जिन्हें आज दलित पिछड़ा कहते हैं तो शोषण कहां से हो गया? यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।

फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन 1100- 1750 तक है, इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम आक्रमणकारियो का समय रहा और कुछ स्थानों पर उनका शासन भी चला।

अंत में मराठों का उदय हुआ, बाजी राव पेशवा जो कि ब्राह्मण थे, ने गाय चराने वाले गायकवाड़ को गुजरात का राजा बनाया, चरवाहा जाति के होलकर को मालवा का राजा बनाया।

अहिल्या बाई होलकर खुद बहुत बड़ी शिवभक्त थी। ढेरों मंदिर गुरुकुल उन्होंने बनवाये।

मीरा बाई जो कि राजपूत थी, उनके गुरु एक चर्मकार रविदास थे और रविदास के गुरु ब्राह्मण रामानंद थे|।

यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है।

मुग़ल काल से देश में गंदगी शुरू हो गई और यहां से पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह जैसी चीजें शुरू होती हैं।

1800 -1947 तक अंग्रेजो के शासन रहा और यहीं से जातिवाद शुरू हुआ । जो उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत किया।

अंग्रेज अधिकारी निकोलस डार्क की किताब "कास्ट ऑफ़ माइंड" में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ में इसका राजनीतिकरण किया।

इन हजारों सालों के इतिहास में देश में कई विदेशी आये जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखी हैं, जैसे कि मेगास्थनीज ने इंडिका लिखी, फाहियान, ह्यू सांग और अलबरूनी जैसे कई। किसी ने भी नहीं लिखा की यहां किसी का शोषण होता था।

योगी आदित्यनाथ जो ब्राह्मण नहीं हैं, गोरखपुर मंदिर के महंत हैं, पिछड़ी जाति की उमा भारती महा मंडलेश्वर रही हैं। जन्म आधारित जाति को छुआछुत व्यवस्था हिन्दुओ को कमजोर करने के लिए लाई गई थी।

इसलिए भारतीय होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्रों से खुद भी बचें और औरों को भी बचाएं।

28/08/2022
15/08/2022

: ऊँ :

ब्राह्मण निर्धन होगा तो बनेगा
" सुदामा "
फिर एक दिन "श्री कृष्ण" उसकी
सेवा करेंगे !

ब्राह्मण अपमानित होगा तो बनेगा
" चाणक्य "
फिर एक दिन नये राज्य कि
स्थापना कर देगा !

ब्राह्मण सठिया जायेगा तो बनेगा
" परशुराम "
फिर एकदिन पापियों का विनाश
कर देगा !

ब्राह्मण पढ़ेगा तो बन जायेगा
" आर्यभट्ट "
फिर एक दिन पुरे विश्व को
0 ( ZERO ) दे जायेगा !

ब्राह्मण जब वेद धर्म का विनाश
देखेगा तो बन जायेगा
" आदि शँकराचार्य "
फिर एक दिन वैदिक धर्म कि
स्थापना कर देगा !

ब्राह्मण जब लोगों को बीमार
देखेगा तो बन जायेगा
" चरक "
फिर एक दिन पुरे विश्व को
आर्युवेद दे जायेगा !

ब्राह्मण ने हमेशा अपने ज्ञानके
प्रकाश से विश्व को प्रकाशित किया !

सतसत प्रणाम है
ब्राह्मण समाज को ...............

कुछ बात है कि हस्ती
मिटती नही हमारी

Dedicated 2 All Brahmans

ब्राह्मण धर्म
वेद

ब्राह्मण कर्म
गायत्री

ब्राह्मण जीवन
त्याग

ब्राह्मण मित्र
सुदामा

ब्राह्मण क्रोध
परशुराम

ब्राह्मण त्याग
ऋषि दधिची

ब्राह्मण राज
बाजीराव पेशवा

ब्राह्मण प्रतिज्ञा
चाणक्य

ब्राह्मण बलिदान
मंगल पाण्डेय
चन्द्र शेखर आज़ाद

ब्राह्मण भक्ति
रावण

ब्राह्मण ज्ञान
आदि गुरु शंकराचार्य

ब्राह्मण सुधारक
महर्षि दयानंद

ब्राह्मण राजनीतिज्ञ
कोटिल्य

ब्राह्मण विज्ञान
आर्यभट

ब्राह्मण गणितज्ञ
रामानुजम

ब्राह्मण खिलाड़ी
सचिन तेंदुलकर

कर्म से : धर्म से : दान से :
: ज्ञान से : विज्ञान से :
नाम से : जीवन से : मृत्यु से :
: भक्ति से : शक्ति से : मुक्ति से :
:आत्मा से : परमात्मा से :
: मूल्यों से : संस्कारो से : बल से :
: बुद्धि से : कौशल से : सम्मान से

विश्वास से ब्राह्मण बनना
आरम्भ करिए तभी अपने पूर्वजों
के किये गौरवशाली कार्यों पर
आप गर्व कर पाएँगे

ब्राह्मण महिमा
ब्राह्मण : ब्रह्मा के मुख से
उत्पन्न सर्वोच्च वर्ण

१ ब्राह्मण का जन्म : भगवान् विष्णु का अंश अवतार

२ ब्राह्मण की विद्या :ज्ञान का अथाह सागर !

३ ब्राह्मण की बुद्धि : समस्त समस्याओं का समाधान

४ ब्राह्मण की वाणी : वेद का ज्ञान !

५ ब्राह्मण की शिक्षा : जीवन जीने की कला !

६ ब्राह्मण की दृष्टी :समभाव !

७ ब्राह्मण की शिखा : संकल्पों का समूह !

८ ब्राह्मण की दया : संकटों का हरण !

९ ब्राह्मण की कृपा : भवसागर से तरने का साधन

१० ब्राह्मण का कर्म : सर्व जन हिताय !

११ ब्राह्मण का निवास : देवालय !

१२ ब्राह्मण के दर्शन : सर्वमंगल !

१३ ब्राह्मण का आशीर्वाद : समस्त सुखों : वैभवों की प्राप्ति !

१४ ब्राह्मण की सेवा :
परलोक सुधारना !

१५ ब्राह्मण का वरदान : मोक्ष की प्राप्ति !

१६ ब्राह्मण का अस्त्र : श्राप !

१७ ब्राह्मण का शस्त्र :
कलम !

१८ ब्राह्मण को दान : सहस्त्रों पापों से मुक्ति !

१९ ब्राह्मण को दक्षिणा : सात पीढ़ी का उद्धार !

२० ब्राह्मण की संतुष्टी : सभी भयों से मुक्ति !

२१ ब्राह्मण की हुँकार : राजा महाराजाओं का
चरणागत होना !

२२ ब्राह्मण की गर्जना : सर्व भूतों का संहार !

२३ ब्राह्मण का कोप : सर्वनाश !

२४ सर्व ब्राह्मण की एकता :
सर्व शक्तिमान !
जय महाकाल ... जय परशुराम ..

27/02/2022

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854312

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