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Hindi Books हिन्दी की कुछ अच्छी पुस्तकों की जानका?

https://youtu.be/iFluSoCmcs8
23/01/2025

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#भगतसिंह । Bhagat singh। क्रांतिकारी साहित्य।भगतसिंह पर यह दुर्लभ महाकाव्य है...इस वीडियो में सरदार भगतसिंह पर श्रीकृष्ण ....

25/04/2024

रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता जो सोई सत्ता को झकझोर कर जगाने की कूबत रखती है...

"सिंहासन खाली करो कि जनता आती है".................

सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

जनता?हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वही,
जाड़े -पाले की कसक सदा सहनेवाली,
जब अंग-अंग में लगे साँप हो चूस रहे
तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहनेवाली।

जनता? हाँ लंबी - बडी जीभ की वही कसम,
"जनता, सचमुच ही, बडी वेदना सहती है।"
"सो ठीक, मगर, आखिर,इस पर जनमत क्या है?"
'है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है?"

मानो, जनता ही फूल जिसे अहसास नहीं,
जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में;
अथवा कोई दुधमुँहीं जिसे बहलाने के
जन्तर-मन्तर सीमित हों चार खिलौनों में।

लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,
जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
साँसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
जनता की रोके राह,समय में ताव कहाँ?
वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।

अब्दों, शताब्दियों, सहस्त्राब्द का अंधकार
बीता गवाक्ष अंबर के दहके जाते हैं
यह और नहीं कोई, जनता के स्वप्न अजय
चीरते तिमिर का वक्ष उमड़ते जाते हैं।

सब से विराट जनतंत्र जगत का आ पहुँचा,
तैंतीस कोटि-हित सिंहासन तैयार करो
अभिषेक आज राजा का नहीं, प्रजा का है,
तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।

आरती लिये तू किसे ढूँढता है मूरख,
मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में?
देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे,
देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में।

फावड़े और हल राजदण्ड बनने को हैं,
धूसरता सोने से श्रृंगार सजाती है;
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

-रामधारी सिंह दिनकर

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03/01/2023

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16/11/2022

“बाल दिवस पर बाल कविताओं पर बातचीत स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका से- https://t.co/qMwRCCBSbj”

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12/10/2018

हिन्दी बुक के प्रशंसकों की संख्या चार हजार में चार कम, आभार सभी का और स्वागत भी

हिन्दी की कुछ अच्छी पुस्तकों की जानका?

16/06/2018

माँ / जगदीश व्योम - कविता कोश भारतीय काव्य का विशालतम और अव्यवसायिक संकलन है जिसमें हिन्दी उर्दू, भोजपुरी, अवधी, राज.....

" नन्हा बलिदानी " लेखक : डा० जगदीश व्योम       पुस्तक यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं-निशात प्रकाशन67-बी, डी.डी.ए. फ्लैट्सचि...
06/05/2018

" नन्हा बलिदानी "

लेखक : डा० जगदीश व्योम


पुस्तक यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं-

निशात प्रकाशन
67-बी, डी.डी.ए. फ्लैट्स
चिल्ला, मयूर विहार, दिल्ली-110091
मोबा. 8527988477

ISBN : 978-81-88461-46-2

संस्करण : मई 2018
मूल्य : 80 रुपये मात्र

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Noida
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