Shahid Abdul Hamid

Shahid Abdul Hamid Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Shahid Abdul Hamid, Book shop, Maharashtar, Murtizapur.

"वीर अब्दुल हमीद — जो न होते, तो पंजाब न होता"ज़रा याद करो क़ुर्बानी...कल उसी शेर-ए-वतन का जन्मदिन था ,परमवीर चक्र विजेत...
02/07/2025

"वीर अब्दुल हमीद — जो न होते, तो पंजाब न होता"

ज़रा याद करो क़ुर्बानी...

कल उसी शेर-ए-वतन का जन्मदिन था ,परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद — जिनकी जान की क़ीमत पर आज पंजाब हमारे पास है, अमृतसर हमारा है, और लुधियाना की गलियों में तिरंगा लहरा रहा है।

लेकिन अफ़सोस — न प्रधानमंत्री ने याद किया,
न विपक्ष के नेता बोले,
न किसी चैनल ने हेडलाइन चलाई।
पुरा दिन सिर्फ नेताओं के जन्मदिन की बधाइयों में गुम हो गया।

1965 का वो मंजर याद करो…

जब पाकिस्तान अमेरिका से मिले पैटन टैंकों पर सवार होकर पंजाब को रौंदता चला आ रहा था। उस वक़्त हमारी सेना के पास न बड़े हथियार थे, न ही संसाधन। बस एक जुनून था — मातृभूमि के लिए मर मिटने का।

तभी अब्दुल हमीद सामने आए।
एक जीप और 106 मिमी की रिकॉइललेस गन के साथ — उस शख्स ने पैटन टैंकों के घमंड को चूर-चूर कर दिया।
दो दिन में 7 टैंक ध्वस्त

असल उत्तर गांव — जहां ये जंग लड़ी गई — पाकिस्तान की टैंकों की कब्रगाह बन गया।

फिर एक गोला गिरा... और अब्दुल हमीद अमर हो गए।

9 सितंबर 1965 को, शहीद हो गए — चिथड़े उड़ गए थे, पहचान मुश्किल थी, वहीं पंजाब की मिट्टी में दफ्न कर दिए गए।
जय हिंद 🇮🇳🇮🇳

01/07/2023
आज जुम्मे की नमाज़ के बाद तुर्की और सीरिया के लिए दुआ जरूर करे.....अल्लाह उन्हें सब्र हिम्मत अता फरमाए.... #आमीन
10/02/2023

आज जुम्मे की नमाज़ के बाद तुर्की और सीरिया के लिए दुआ जरूर करे.....अल्लाह उन्हें सब्र हिम्मत अता फरमाए.... #आमीन

12/08/2018
HOME PAGE POSTजब अकेले ही 50 दबंगों को दौड़ा दिया था परमवीर शहीद अब्दुल हमीद ने… Published 1 month ago on July 1, 2018 By...
11/08/2018

HOME PAGE POSTजब अकेले ही 50 दबंगों को दौड़ा दिया था परमवीर शहीद अब्दुल हमीद ने… Published 1 month ago on July 1, 2018 By Dhiraj Jha



हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर अपनी डी पी बदलना और लम्लाम्बी पोस्ट लिखना भर ही आपको देशभक्त नहीं बनाता। बल्कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा ही आपको सच्चा देशभक्त बनता है। देशभक्ति का यही जज्बा था उस लड़के में जिसका जन्म 1 जुलाई 1933 को गाजीपुर के धमुपुर गांव में हुआ था। पिता फौज में लांस नायक थे और मां बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए घर में सिलाई का काम करती थीं। मां चाहती थीं कि लड़का उनका सिलाई का काम सीखे जिससे चार पैसे घर आएं मगर उस लम्बे कद काठी वाले जूनूनी लड़के को भला कुश्ती के सिवाए कुछ दीखता कहाँ था।

जिंतना मन उसका कुश्ती में लगता उतना ही लोगों की भलाई में। एक बार उसके पास एक नौजवान भागता हुआ आया और बोला कि जमींदार के भेजे 50 दबंग उसकी फसल काट रहे हैं। लकड़े ने आव देखा ना ताव और पहुँच गया अकेला ही उन पचासों दबंगों से अकेला लोहा लेने। पहले तो दबंगों ने सोचा कि ये अकेला चना भला क्या भाड़ फोड़ेगा मगर जब उन्होंने लड़के के तेवर और ललकार देखि तो वहां से भाग खड़े हुए। इसी तरह एक बार उनके गांव में बाढ़ आई जिसमें दो महिलाएं दूब रही थीं। लड़का जब किनारे के पास से गुजरा तो देखा कि वहां भीड़ लगी है। पास जा कर हालात का मुआयना किया और उन दोनों महिलाओं को बचाने के लिए नदी में कूद पड़ा। अल्लाह की मदद से उसने दोनों महिलाओं को सही सलामत बचा लिया।

लड़के के इसी जज्बे और तेवर ने उसे आगे चल कर भारतीय सेना का गौरव बना दिया। आज दुनिया उस लड़के को परमवीर शहीद अब्दुल हमीद के नाम से जानती है।

साल 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान हमीद ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। खेमकरण सेक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।

यह पुरस्कार इस युद्ध, जिसमें वे शहीद हुए, के समाप्त होने के एक सप्ताह से भी पहले घोषित किया गया। ये इतिहास फिर से दोहराया नहीं गया और दूसरा अब्दुल हमीद पैदा नहीं हुआ। मरने से पहले परमवीर अब्दुल हमीद ने मात्र अपनी गन माउन्टेड जीप से उस समय अजेय समझे जाने वाले पाकिस्तान के पैटन टैंकों को नष्ट किया था। एक नहीं, ऐसे 8 टैंकों को हमीद ने नष्ट कर दिया था जो बहुत ही घातक थे।

8 सितंबर 1965 की रात पाकिस्तान द्वारा भारत पर हमला करने पर, उस हमले का जवाव देने के लिए भारतीय सेना के जवान उनका मुकाबला करने को खड़े हो गए। वीर अब्दुल हमीद पंजाब के तरन तारन जिले के खेमकरण सेक्टर में सेना की अग्रिम पंक्ति में तैनात थे। पाकिस्तान ने उस समय के अपराजेय माने जाने वाले अमेरिकन पैटन टैंकों के साथ, खेम करन सेक्टर के असल उताड़ गांव पर हमला कर दिया था।

भारतीय सैनिकों के पास न तो टैंक थे और नहीं बड़े हथियार लेकिन उनके पास था भारत माता की रक्षा के लिए लड़ते हुए मर जाने का हौसला। वीर अब्दुल हमीद ने अपनी जीप में बैठ कर अपनी गन से पैटन टैंकों के कमजोर अंगों पर एकदम सटीक निशाना लगाकर एक -एक कर धवस्त करना प्रारम्भ कर दिया। उनको ऐसा करते देख अन्य सैनकों का भी हौसला बढ़ गया और देखते ही देखते पाकिस्तान फ़ौज में भगदड़ मच गई। वीर अब्दुल हमीद ने अपनी गन माउनटेड जीप से आठ पाकिस्तानी पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया था।

देखते ही देखते भारत का असल उताड़ गांव पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह बन गया। लेकिन भागते हुए पाकिस्तानियों का पीछा करते वीर अब्दुल हमीद की जीप पर एक गोला गिर जाने से वे बुरी तरह से घायल हो गए और अगले दिन 9 सितम्बर को उनका स्वर्गवास हो गया लेकिन उनके स्वर्ग सिधारने की आधिकारिक घोषणा 10 सितम्बर को की गई थी।

जब अब्दुल हमीद की आखरी जंग के लिए बुलावा आया तो वो तुरंत ही अपना बिस्तरबंद बांधने लगे। ऐसे में उसके बिस्तरबंद की रस्सी टूट गयी जिसे देख उनकी पत्नी घबरा गयीं क्योंकि इसे एक तरह का अपशगुन माना जाता है। वो रो रो कर हमीद को रोकने लगीं मगर हमीद ने उनकी एक ना सुनी और मुस्कुरा कर कहा मेरे लिए देश सबसे पहले है। उनके साथियों ने भी उन्हें रोका मगर वो मुस्कुरा कर सबसे गले मिलते हुए जंग के मैदान की ओर बढ़ चले। असल मायनों में ऐसे वीर जवान ही असली हीरो हैं। आज उनके जन्मदिवस पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि व शत शत

Shahid abdul Hamid ko salam
09/09/2016

Shahid abdul Hamid ko salam

Address

Maharashtar
Murtizapur
444107

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shahid Abdul Hamid posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category