02/07/2025
"वीर अब्दुल हमीद — जो न होते, तो पंजाब न होता"
ज़रा याद करो क़ुर्बानी...
कल उसी शेर-ए-वतन का जन्मदिन था ,परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद — जिनकी जान की क़ीमत पर आज पंजाब हमारे पास है, अमृतसर हमारा है, और लुधियाना की गलियों में तिरंगा लहरा रहा है।
लेकिन अफ़सोस — न प्रधानमंत्री ने याद किया,
न विपक्ष के नेता बोले,
न किसी चैनल ने हेडलाइन चलाई।
पुरा दिन सिर्फ नेताओं के जन्मदिन की बधाइयों में गुम हो गया।
1965 का वो मंजर याद करो…
जब पाकिस्तान अमेरिका से मिले पैटन टैंकों पर सवार होकर पंजाब को रौंदता चला आ रहा था। उस वक़्त हमारी सेना के पास न बड़े हथियार थे, न ही संसाधन। बस एक जुनून था — मातृभूमि के लिए मर मिटने का।
तभी अब्दुल हमीद सामने आए।
एक जीप और 106 मिमी की रिकॉइललेस गन के साथ — उस शख्स ने पैटन टैंकों के घमंड को चूर-चूर कर दिया।
दो दिन में 7 टैंक ध्वस्त
असल उत्तर गांव — जहां ये जंग लड़ी गई — पाकिस्तान की टैंकों की कब्रगाह बन गया।
फिर एक गोला गिरा... और अब्दुल हमीद अमर हो गए।
9 सितंबर 1965 को, शहीद हो गए — चिथड़े उड़ गए थे, पहचान मुश्किल थी, वहीं पंजाब की मिट्टी में दफ्न कर दिए गए।
जय हिंद 🇮🇳🇮🇳