Shree Swami Ratna

Shree Swami Ratna कुंडळी, हस्तरेषा, मस्तिष्क रेषा, फेस र?

07/11/2018
23/10/2018

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास में पड़ने वाली यह पूर्णिमा है। ज्‍योतिष शास्त्र के हिसाब से पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में में आस्था रखने वाले इस दिन कोजागर व्रत रखते हैं। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। कहते हैं कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है। इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने का विधान है। अगली सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
ऐसा कहा जाता है की इस रात माता लक्ष्मी यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है। जो जाग रहा होता है उसका महालक्ष्मी कल्याण करती हैं। कहते हैं कि इसी रात के बाद से मौसम बदलता है और सर्दी के मौसम का आगमन होता है। बताते हैं कि इस रात अगर आपको धन का खजाना पाना है तो देवी लक्ष्मी की अवश्य पूजा करनी चाहिए। शरद पूर्णिमा की रात दीवाली से भी ज्यादा अहम मानी गई है, क्योंकि इस रात स्वयं मां लक्ष्मी अपने भक्तों को संपत्ति देने के लिए आती हैं।

गृह कलह से छुटकारा पाना चाहते हैं तो ये उपाय अपनाएगृह कलह से मुक्ति के उपायकहा जाता है कि जिस घर में क्लेश होता है, वहां...
24/01/2018

गृह कलह से छुटकारा पाना चाहते हैं तो ये उपाय अपनाए

गृह कलह से मुक्ति के उपाय

कहा जाता है कि जिस घर में क्लेश होता है, वहां लक्ष्मी का वास नहीं होता। हर किसी की अपने गृहस्थ जीवन में सुख और शांति की कामना होती है। घर और जीवन की खुशहाली ही व्यक्ति को जीवन में प्रगति के मार्ग पर ले जाती है। परिवार में व्याप्त कलह यानी की क्लेश से व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से भर जाता है। गृह क्लेश से बचने या उसे कम करने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। हम आगे आपको ऐसे ही कुछ उपाय बता रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से आपका जीवन सुखमय और खुशहाल बनाया जा सकता है।

सोने की दिशा

आप किस दिशा में सिर और पैर करके सोते हैं यह गृह कलह में काफी अहम भूमिका निभाता है। गृह कलह से मुक्ति के लिए रात को सोते समय पूर्व की और सिर रखकर सोए। इससे आपको तनाव से राहत मिलेगी। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हनुमान उपासना

हनुमान जी की नियमित रूप से की गई उपासना आपको सभी प्रकार के संकट और गृह कलह से दूर रखता है। यदि कोई महिला गृह कलह से परेशान हैं तो भोजपत्र पर लाल कलम से पति का नाम लिखकर तथा ‘हं हनुमंते नम:’ का 21 बार उच्चारण करते हुए उस पत्र को घर के किसी कोने में रख दें। इसके अलावा 11 मंगलवार नियमित रूप से हनुमान मंदिर में चोला चढाएं एवं सिंदूर चढाएं। ऐसा करने से परेशानियों से राहत प्राप्त होगी।

जलाभिषेक

प्रतिदिन सुबह में स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर मंदिर या घर पर शिवलिंग के सामने बैठकर शिव उपासना करें। आप ‘ऊँ नम: सम्भवाय च मयो भवाय च नम:। शंकराय च नम: शिवाय च शिवतराय च:।।’ मंत्र का 108 बार उच्चारण कर सकते हैं। इसके बाद आप शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। ऐसा नियमित करने से प्पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है।

गणेश उपासना

यदि किसी घर में पति-पत्नी या बाप-बेटे के बीच कलह है या किसी भी बात पर विवाद चल रहा है तो इसमें गणेश उपासना फायदेमंद रहेगी। वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए आप नुक्ति के लड्डू का भोग लगाकर प्रतिदिन श्री गणेश जी और शक्ति की उपासना करे।

चीटियों को भोजन

चीटियों के बिल के पास शक्कर या आटा व चीनी मिलाकर डालने से गृहस्थ की समस्याओं का निवारण होता है। ऐसा नियमित 40 दिन तक करें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में कोई नागा न हो।

गोमती चक्र फेंके

यदि पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव अधिक बढ़ गया है तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंकने से तनाव दूर होगा। पांच गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में घर के अंदर श्रृंगार वाले स्थान या पूजा में रखने से दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

कुमकुम लगाए

एक गेंदे के फूल पर कुमकुम लगाकर उसे किसी देव स्थान में मूर्ति के सामने रख दें। ऐसा करने से रिश्तों में आया तनाव और मतभेद दूर होते हैं। साथ ही छोटी कन्या को शुक्रवार को मीठी वस्तु खिलाने और भेंट करने से आपके संकटों का निवारण होता है।

तकिये में सिंदूर रखें

घर मे व्याप्त कलह क्लेश को कम करने के लिए पति-पत्नी को रात को सोते समय अपने तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और कपूर रखें। सुबह में सूर्योदय से पहले उठकर सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें और कपूर को निकालकर अपने कमरे में जला दें। ऐसा करने से लाभ मिलेगा।

हल्दी की गांठ

ससुराल में सुखी रहने के लिए कन्या अपने हाथ से हल्दी की पांच साबुत गांठें, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की दिशा की ओर फेंक दें। ऐसा करने से ससुराल में सुख एवं शांति का वास रहता है। पति-पत्नी के बीच प्रेम संबंध बने रहते हैं।

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गणेश जयंतीगणेश जयंती 2018 पूजा मुहूर्त: श्रीगणेश देते हैं ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद, जानें क्या है पूजा करने का सही समय...
21/01/2018

गणेश जयंती

गणेश जयंती 2018 पूजा मुहूर्त: श्रीगणेश देते हैं ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद, जानें क्या है पूजा करने का सही समय

Ganesh Jayanti 2018 Puja Muhurat, Vrat Vidhi: भगवान गणेश को बुद्धि का देवता भी माना जाता है। जो छात्र विधिपूर्वक भगवान गणेश का पूजन करते हैं वो उनके आशीर्वाद से मेधावी बनते हैं।

विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश पर सिंदूर अर्पित और मोदक का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

मूर्ति से बह रही है ‘रक्त’ की तीन धाराएं, जानें क्यों खास माना जाता है छिन्नमस्तिका मंदिरगणेश जयंती 2018 व्रत विधि: भगवान गणेश को पसंद है लड्डू, जानें किस विधि बना सकते हैं चौथ के व्रत को सफलगणेश जयंती 2018 व्रत कथा: माता पार्वती ने भी किया था संतान को पाने के लिए श्रीगणेश का व्रत, जानें क्या है कथा

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का पूजन करने से सभी परेशानियां खत्म हो जाती है, इसी कारण से उन्हें संकटमोचन और विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत फलदायी होता है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह में दो बार चतुर्थी का व्रत आता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के पूजन से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

विनायक चतुर्थी को वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। वरद का अर्थ होता है भगवान से किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए प्रार्थना करना। माना जाता है कि जो इस दिन उपवास का पालन करते हैं उन भक्तों को भगवान गणेश ज्ञान और धैर्य के साथ आशीर्वाद देते हैं। बुद्धि और धैर्य दो ऐसे गुण हैं जिनके महत्व को मानव जाति युगों से पहचान बनाए हुए है। जो इन गुणों को पाने की चाहत रखते हैं वो जीवन में प्रगति करता है। विनायक चतुर्थी का पूजन दिन के मध्य में किया जाता है जिसे हिंदू पंचाग के अनुसार मध्यान्ह कहा जाता है। इस दिन संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं व्रत करती हैं।

भगवान गणेश को बुद्धि का देवता भी माना जाता है। जो छात्र विधिपूर्वक भगवान गणेश का पूजन करते हैं वो उनके आशीर्वाद से मेधावी बनते हैं। इस विनायक चतुर्थी जिसे गणेश जयंती के नाम से भी जाना जा रहा है पर भगवान गणेश का पूजन करके चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश पर सिंदूर अर्पित और मोदक का भोग लगाना शुभ माना जाता है। गणेश जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दिन के 11 बजकर 28 मिनट से लेकर दोपहर के 1 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस बार गणेश जयंती का योग 20 और 21 जनवरी दोनों दिन रहेगा, 20 जनवरी को दोपहर के 2 बजकर 10 मिनट से लेकर रात के 9 बजकर 7 मिनट तक चंद्रमा के दर्शन करना अशुभ माना जा रहा है। इसी के साथ 21 जनवरी को सुबह के 9 बजकर 43 मिनट से लेकर रात के 9 बजकर 55 मिनट तक चंद्रमा के दर्शन करना अशुभ माना जा रहा है।

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नवग्रहों की मजबूती तथा शांति के उपायज्योतिष शास्त्रज्योतिष शास्त्र पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रणाली है, यह आप तब समझेंगे जब...
20/01/2018

नवग्रहों की मजबूती तथा शांति के उपाय

ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रणाली है, यह आप तब समझेंगे जब अपनी आंखों से इसका प्रभाव होते देखेंगे। ज्योतिष शास्त्र के परिणाम एवं उन परिणामों के आधार पर दिए गए उपाय, सभी कुछ वैज्ञानिक है। ज्योतिष शास्त्र एक ऐसी विधा है जिसमें सौरमंडल के ग्रहों की ग़णना कर उनकी शक्ति का पता लगया जाता है।

वैज्ञानिक विधा

किसी विशेष जातक की कुंडली में कौन सा ग्रह किस भाव में बैठा है, वह सकारात्मक प्रभाव दे रहा है या फिर नकारात्मक असर कर रहा है, यह सब पता लगाया जा सकता है। और इसके बाद ही इस परिणाम पर पहुंचा जाता है कि वह ग्रह विशेष जातक के लिए सही है या नहीं।

विशेष ग्रह की स्थिति

और यदि किसी ग्रह का जातक के ऊपर बुरा असर हो रहा हो तो उसके अतिरिक्त उपाय किए जाते हैं। यह उपाय उस ग्रह की क्रूर दृष्टि को भंग करते हैं एवं एक खुशहाल जीवन प्रदान करते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में नव ग्रह

क्या आप जानते हैं कि बचपन से साइंस की खोज बताए गए नौ ग्रहों की तरह ही, ज्योतिष शास्त्र में भी नव ग्रह बताए गए हैं। ये नौ ग्रह इस प्रकार हैं – सूर्य, शनि, शुक्र, बृहस्पति, चंद्रमा, बुध, मंगल, राहु, केतु।

ग्रहों की शांति हेतु उपाय

ज्योतिष में इन्हें नवग्रह कहा गया है, इन सभी ग्रहों की शांति हेतु उपाय भी मौजूद हैं। ज्योतिषियों के मुताबिक यूं तो लाखों में से कोई एक जन्म पत्रिका ऐसी होती है जिसमें कई सारे ग्रह खराब हों। लेकिन अधिकतम सात ही ग्रह बुरी दशा में होते हैं, ऐसा कभी नहीं होता कि सभी नौ ग्रह जातक पर बुरा असर कर रहे हों।

ग्रहों की शांति के उपाय

लेकिन फिर भी यदि नौ में से सात ग्रह भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हों तो इसके उपाय के लिए सभी ग्रहों की अलग-अलग शांति के बजाय, नवग्रह पूजा की जाती है। इस पूजा का विधान काफी लंबा है, इसके लिए किसी प्रख्यात ज्योतिषी की ही जरूरत पड़ती है।

जानिए शांति मंत्र

लेकिन यहां हम आपको एक-एक करके सभी नौ ग्रहों की शांति हेतु मंत्र प्रदान करने जा रहे हैं। यह सभी ग्रह हमारे जीवन पर खास असर करते हैं, उदाहरण के लिए यदि सूर्य ग्रह की बात करें तो यह हमें समाज में सम्मान एवं यश प्राप्त कराता है।

सूर्य ग्रह

जिस जातक की कुण्डली में सूर्य सही स्थिति में बैठा हो, ऐसा जातक हमेशा रोगमुक्त रहता है। कभी कोई बड़ी बीमारी ऐसे जातक को छू भी नहीं सकती। लेकिन यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य की स्थिति सही ना हो तो उसे सूर्य देव के मंत्र का जाप करना चाहिए।

शांति मंत्र

सूर्य ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र है - ऊॅं हृीं घृणिः सूर्याय नमः। जप मंत्र - ऊॅं सूं सूर्याय नमः। तांत्रिक मंत्र - ऊॅं हृां हृीं हृौं सः सूर्याय नमः। ध्यान मंत्र - द्विभुजं पहस्तं च वरदं मुकुटान्वितम्। पीड़ाहरण मंत्र - ग्रहणामादिरा दित्यो लोकरक्षण कारकः। सूर्य गायत्री – ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्। सूर्य गायत्री मंत्र की जप संख्या 7000 होनी चाहिए।

चंद्र ग्रह

यदि किसी जातक की कुण्डली में चंद्र ग्रह कमजोर हो, तो यह उसकी मानसिक स्थिति को खराब करता है। चंद्रमा का सीधा संबंध जातक की मानसिक हालत से होता है, जिसके बिगड़ने से वह अपना मानसिक आपा भी खो सकता है। यदि चंद्रमा सही स्थिति में हो तो जातक को यश की प्राप्ति होती है।

शांति मंत्र

चंद्र ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र - ऊॅं श्रीं कीं चं चन्द्राय नमः। जप मंत्र - ऊॅं सों सोमाय नमः। तांत्रिक मंत्र - ऊॅं श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नमः। ध्यान मंत्र - गदायुधधरं देवं श्वेतवर्ण निशाकरम्। ध्यायेत् अमृतसंभूतं सर्वकामफलप्रदम्। चन्द्र गायत्री – ॐ अमृताड्गांय विहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमः प्रचोदयात्। चंद्र गायत्री मंत्र की जप संख्या 11000 है।

मंगल ग्रह

ज्योतिष में मंगल ग्रह को विनाशकारी माना गया है। यह जिस भी जातक की कुण्डली में नीच स्थिति या फिर गलत भाव में बैठ जाए, तो उसकी जिंदगी तबाह कर सकता है। ज्योतिषीयों के अनुसार मंगल ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से पराक्रम प्राप्त होता है एवं मांगलिक दोष शांत होता है।

शांति मंत्र

मंगल ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र - ॐ हृं श्रीं भौमाय नमः। जप मंत्र – ॐ भौं भौमाय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ क्रां क्रीं क्रौं सं: भौमाय नमः। ध्यान मंत्र - रक्तमाल्याम्बरधरं हेमरूपं चतुर्भुजम्। शक्तिशूलगदापन् धरन्तं स्वकारां बुजैः। मंगल ग्रह का गायत्री मंत्र – ॐ अंगारकाय विहे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्। इसकी जप संख्या 10000 है।

बुध ग्रह

बुध ग्रह ज्योतिषीय दृष्टि से कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग, विचार चर्चा एवं अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष अध्ययनों की मानें तो बुध ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से व्यापार में वृद्धि होती है। यदि आप बुध ग्रह के आगे बताए जा रहे मंत्रों का जप कफ्रेंगे, तो आपको सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

शांति मंत्र

बुध ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र – ॐ ऐं स्त्रीं श्रीं बुधाय नमः। जप मंत्र - ॐ बुं बुधाय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः। ध्यान मंत्र - सिंहारूढं चतुबाहुं खड्गंचर्मगदाधरम्। सोमपुत्रं महासौम्यं ध्यायेत सर्वार्थासिद्धिम। बुध गायत्री - ॐ सौम्यरूपाय विहे वाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्। बुध गायत्री मंत्र की जप संख्या 4000 है।

गुरु ग्रह

गुरु ग्रह मनुष्य के ज्ञान को नियंत्रित करता है। जिसकी जन्म पत्रिका में गुरु की स्थिति अच्छी हो, वह जातक यकीनन बुद्धिमान एवं प्रतापी होगा। गुरू ग्रह के दर्शन पूजन दान व जाप से ज्योतिष व ज्ञान प्राप्त होता है।

शांति मंत्र

गुरु ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र - ॐ हृीं क्लीं हृूं बृहस्पतये नमः। जप मंत्र – ॐ बृं बृहस्पतये नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः। ध्यान मंत्र - दण्डाक्षमाला वरद कमण्डलुधरं विभूम्। पुष्परागांकितं पीतं वरदं भावयेद् गुरूम्। गुरू गायत्री – ॐ गुरूरूपाय विहे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो गुरू प्रचोदयात्। इसकी जप संख्या 19000 है।

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह सौंदर्य, रोमांस, प्रेम, एवं अन्य स्वाभाविक तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। कुण्डली में शुक्र ग्रह को मजबूत करने से सुंदरता प्राप्त होती है। ऐसा जातक अपने साथी के प्रति प्यार में बेहद रोमांटिक होता है। ज्योतिष अध्ययनों के अनुसार शुक्र ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से सौंन्दर्य में वृद्धि होती है।

शांति मंत्र

यदि किसी जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह बुरी दशा में हो, तो उसकी शांति हेतु उन मंत्रों का जप करें। बीज मंत्र – ॐ हृीं श्रीं शुक्राये नमः। जप मंत्र – ॐ शुं शुक्राये नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राये नमः। ध्यान मंत्र - जटिल चाक्षसूत्रं च वरदण्डकमण्डलुम। श्वेतवस्त्रावृतं शुक्रं ध्यायेत् दानवपूजितम्। शुक्र गायत्री - ॐ भार्गवाय विहे शुक्लांबराय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्। इस मंत्र की जप संख्या 10000 है।

शनि ग्रह

शनि ग्रह एक ऐसा ग्रह है जिसकी क्रूर दृष्टि यदि किसी जातक पर हो, तो उसकी दुनिया तहस-नहस हो जाती है। क्या आप जानते हैं कि शनि का प्रभाव यदि किसी जातक के पहले भाव पर पड़ रहा हो, तो यह उसकी मौत का कारण भी बन सकता है।

शांति मंत्र

शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या में लोग शनि ग्रह की शांति एवं पूजन का सहारा लेते हैं। ताकि इसका प्रभाव कम हो सके। बीज मंत्र – ॐ ऐं हृीं श्रीं शनैश्चराय नमः। जप मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः। ध्यान मंत्र - नीलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रास करो धनुष्मान्। चतुर्भुजस्सूर्यसुतः प्रशान्त सदाऽस्तु मह्यं वरदः प्रसन्नः। शनि गायत्री – ॐ सूर्यपुत्राय विहे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्। शनि गायत्री मंत्र की जप संख्या 23000 है।

राहू ग्रह

राहू ग्रह ज्योतिष की दृष्टि से पापी ग्रह माना जाता है। यह शनि ग्रह से भी बुरा असर करता है। यह सबसे पहले जातक की मानसिक हालत को खराब करता है। इसलिए यदि किसी जातक की कुण्डली में राहू की महादशा चल रही हो, तो उसे जल्द से जल्द राहू ग्रह की शांति के उपाय कर लेने चाहिए।

शांति मंत्र

राहू ग्रह की शांति हेतु मंत्र इस प्रकार हैं। बीज मंत्र – ॐ ऐं हृीं राहवे नमः। जप मंत्र – ॐ रां राहवे नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। ध्यान मंत्र - करालवदनं खड्गचर्म शूलवरान्वितम्। नीलसिंहासनस्थं च ध्यायेत राहुं प्रशान्तये। राहू गायत्री – ॐ शिरोरूपाय विहे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहू प्रचोदयात्। जप संख्या 18000

केतू ग्रह

केतू ग्रह के दर्शन पूजन दान व जाप से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि किसी जातक की कुण्डली में केतू की स्थिति खराब हो तो उसके लिए इन मंत्रों का जप करें... बीज मंत्र – ॐ हृीं केतवे नमः। जप मंत्र – ॐ कें केतवे नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः। ध्यान मंत्र - धम्रवर्ण द्विबाहुं च केतुं च विक्रताननाः। गृध्रासनगतं नित्यं ध्यायेत् सर्व फलाप्तये। केतु गायत्री – ॐ पपुत्राय विहे धुम्रवर्णाय धीमहि तन्नो केतु प्रचोदयात्। जप संख्या 17000

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राहु क्या है?राहु नैसर्गिक पाप ग्रह है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु शुभ कार्यो में विघ्न और बाधा डालने वाला ग्रह है अत...
18/01/2018

राहु क्या है?

राहु नैसर्गिक पाप ग्रह है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु शुभ कार्यो में विघ्न और बाधा डालने वाला ग्रह है अत: राहु काल में किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करनी चाहिए। ग्रहों के गोचर के क्रम में सभी ग्रहों का अपना नियत समय होता है इसी प्रकार प्रत्येक दिवस एक निश्चित समय तक राहु काल होता है।

राहु काल के सम्बन्ध में ज्योतिष मत

वैदिक ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक दिन का एक भाग राहु काल होता है। सूर्योंदय और सूर्यास्त के आधार पर अलग अलग स्थानों पर राहुकाल की अवधि में अंतर होता है। राहु काल प्रातकाल में किसी भी दिन नहीं होता है। हफ्ते के सातों दिन इसका अलग अलग समय होता है। सोमवार को यह दिन के द्वितीय भाग में, शनिवार को तीसरे भाग में, शुक्रवार को चतुर्थ भाग में, बुधवार को पांचवें भाग में, गुरूवार को छठे भाग में, मंगलवार को सातवें भाग में और रविवार के दिन आठवें भाग पर राहु का प्रभाव होता है।

राहु काल ज्ञात करने की विधि

राहु काल ज्ञात करने के लिए वैदिक ज्योतिष में विशेष नियम बताया गया है। इस नियम के अनुसार सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूरे दिन को आठ बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। इस गणना में सूर्योदय का सामन्य समय 6 बजे सुबह माना जाता है और सूर्यास्त का 6 बजे शाम.इस प्रकार एक दिन 12 घंटे का होता है। 12 घंटे को 8 से विभाजित किया जता है। इस गणना के आधार पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन का प्रत्येक भाग 1.5 घंटे का होता है। इस प्रकार प्रत्येक दिन राहु काल होता है।

दिन का विभाजन और राहु काल

वैदिक ज्योतिष में वर्णित है कि प्रत्येक दिन का कुछ समय अलग अलग ग्रहों के प्रभाव में रहता है। ग्रहों के प्रभाव से प्रत्येक काल का अपना महत्व होता है। मुख्य रूप से समय के तीन भागों का इनमें विशेष महत्व होता है। समय के ये तीन मुख्य भाग हैं यम गण्ड, राहु काल और कुलिक काल.इनमें कुलिक काल में शुभ कार्य शुरू किया जा सकता है जबकि राहु काल और यम गण्ड को किसी भी शुभ काम को शुरू करने के लिए शुभ नहीं माना गया है।

राहु काल में कार्य

राहु को नैसर्गिक अशुभ कारक ग्रह माना गया है। गोचर में राहु के प्रभाव में जो समय होता है उस समय राहु से सम्बन्धित कार्य किये जाये तो उनमें सकारात्मक परिणाम प्राप्त होता है। इस समय राहु की शांति के लिए यज्ञ किये जा सकते हैं। इस अवधि में शुभ ग्रहों के लिए यज्ञ और उनसे सम्बन्धित कार्य को करने में राहु बाधक होता है। शुभ ग्रहों की पूजा व यज्ञ इस अवधि में करने पर परिणाम अपूर्ण प्राप्त होता है। अत: किसी कार्य को शुरू करने से पहले राहु काल का विचार कर लिया जाए तो परिणाम में अनुकूलता की संभावना अधिक रहती है।
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माघ अमावस्या की कथा।माघ अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओ के अनुसार यह योग पर आधारित व्रत है और...
16/01/2018

माघ अमावस्या की कथा।

माघ अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओ के अनुसार यह योग पर आधारित व्रत है और इस दिन पवित्र नदियों और संगमो में देवताओ का निवास होता है। अतः इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती स्नान का अति विशेष महत्व है। माघ स्नान का महत्व कार्तिक गंगा स्नान के समान है। मौनी अमावस्या के दिन भक्त गण पवित्र नदियों और सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते है।इस वर्ष मंगलवार 16 जनवरी 2018 को माघ अमावस्या है।

माघ अमावस्या की कथा

एक बार देवत्व काल के समय में सागर मंथन से भगवान विष्णु अमृत कलश लेकर प्रकट हुए तथा इस अमृत कलश के लिए देव और असुर गण में खींचा तानी शुरू हो गयी। देवता लोग अमृत को प्राप्त करना चाहते थे तो वही दूसरी ओर असुर गण इसे प्राप्त करने में लग गया।

नभ में खींचा-तानी होने लगी तथा खींचा-तानी के क्रम में अमृत की कुछ बुँदे छलक कर गंगा-यमुना के संगम में आ गिरा। जिससे यह संगम अति पवित्र हो गया। आदिकाल में गंगा-यमुना के संगम स्थान पर स्नान करने से अमृत स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।

माघ अमावस्या का महत्व

सनातन धर्म के अनुसार यदि माघ अमावस्या सोमवार को पड़े तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है जबकि यदि माघ अमावस्या सोमवार को पड़े तथा इस दिन महाकुम्भ स्नान का भी योग बने तो इसका महत्व अनंत गुना फलदायी होता है।

शास्त्रो में कहा गया है की सत युग में तप से पुण्य का फल मिलता है, त्रेता में ज्ञान से पुण्य मिलता है, जबकि द्वापर में हरि भक्ति तथा कलियुग में दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। अतः कलियुग में माघ, वैसाख और कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है।

मौनी अमवस्या पूजा विधि और फल

मौनी अमवस्या या माघ अमावस्या योग पर आधारित पर्व है चूकि इस दिन व्रती को बोलने की व्यवधान नही है। अतः व्रती को मौन व्रत का पालन करना चाहिए। वेदो, पुराणो और शास्त्रानुसार होठो से भगवान का उच्चारण करने से जो यश की प्राप्ति होती है उससे लाख गुना यश और पुण्य की प्राप्ति भगवान को मन के मनके से जपने से मिलता है।

शनि त्रयोदशी की कथा एवं इतिहास

इस तिथि को व्रती को संत की तरह मौन व्रत का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव तथा विष्णु जी की पूजा की जाती है। अतः व्रती को पवित्र नदियों और सरोवरो में स्नान कर सूर्य देव तथा पीपल वृक्ष में जलाभिषेक और पूजन करें। पूजन समाप्ति के पश्चात ब्राह्मणो, और गरीबो को दान दे। जिन व्रती के लिए दिन भर उपवास करना संभव ना हो उन्हें दिन में मीठा भोजन ग्रहण करना चाहिए।

भगवान श्री हरि विष्णु और महादेव की कृपा से व्रती के जीवन में सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। इस तरह मौनी अमावस्या की महत्व तथा कथा सम्पन्न हुई । व्रती जन प्रेम से बोलिए भगवान शिव और विष्णु जी की जय।

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धन की समस्या?अक्सर लोग घर में धन की कमी से परेशान रहते हैं। रात-दिन उन्हें केवल इस बात की चिंता सताए जा रही है कि किसी भ...
15/01/2018

धन की समस्या?

अक्सर लोग घर में धन की कमी से परेशान रहते हैं। रात-दिन उन्हें केवल इस बात की चिंता सताए जा रही है कि किसी भी तरह से कोई भी उपाय करके धन में बढ़ोतरी की जाए।

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इसके लिए आपको अधिक चिंता की जरुरत नहीं है। क्योंकि ज्योतिष में हर समस्या का हल सुझाया गया है।

यदि आप धन की समस्या से इतने परेशान हैं तो इसके लिए एक आसान उपाय है जो आप धन के देवता को मनाने के लिए कर सकते हैं।

गुरुवार के दिन शिवलिंग पर जल में हल्दी मिलाकर चढ़ाएं।धन के देवता को मनाने के लिए घर के मुख्य द्वारा पर श्री यंत्र रखकर उसकी पूजा करें।शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को लक्ष्मीस्वरूप घर की बहन, बेटी या बहू से घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ गंगाजल डलवाएं।

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फिर दाहिने हाथ से उसपर स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद उसपर गुड़ का टुकड़ा औऱ शहद की बूंद चिपका दें। इससे धन में वृद्धि होती है।सुबह के समय छोटे-छोटे बच्चों को खाने-पीने की चीजें बांटे। रसोईघर में कभी भी आटे को बर्बाद न करें। घर की तिजोरी का मुंह उत्तर दिशा में रखें।

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