15/05/2019
आज हम बात करेंगे भारतीय इतिहास की जब शरणागत 140 सुमरा मुस्लिम महिलाओं की इज्ज़त बचाने के लिए राजपूतो ने जौहर ओर अपने प्राण दिए
बात है 1309 ईस्वी की जब दिल्ली पर अलाउद्दिन खिलजी का शासन था उस समय गुजरात के कच्छ की वड्सर रियासत पर जाडेजा राजपूतों का शासन था और वहाँ के शासक जाडेजा जाम अबड़ा जी थे वह एक महान धर्मात्मा ओर वीर राजा थे
दूसरे सिंध की अमरकोट रियासत पर हमीर सुमरा का शासन था जो कि मुस्लिम शासक थे इनके दो पुत्र थे धोधा ओर चनशेर। इन दोनों भाइयों में आपसी कलह रहती थी और दोनों का आपस मे संघर्ष चलता रहता था। इसका कारण यह था कि बड़ा भाई धोधा अमरकोट शासक बन गया आखिर में चनशेर को असफलता मिलने पर वह दिल्ली मे अलाउद्दिन खिलजी के दरबार मे चला जाता गया और वहाँ जाकर खिलजी से कहा की आपके जनानखाने (हरम)के लिये अच्छी अच्छी सुंदर सुमरा कन्या रखी थी लेकिन मेरे बड़े भाई ने राज्य छीन लिया और सिंध की गद्दी पर बैठ गया इसीलिए में आपसे सहायता मांगने आया हु आप स्वयं सिंध आकर मेरी गद्दी मुझे दुबारा दिलवाए ओर वहाँ से सुमरा(मुस्लिम गौत्र होता है सुमरा) कन्याओं को अपने हरम में ले आये इस बात को सुनते ही खिलजी ने अपने सेनापति हुसैन खान के हाथो से सन्देश भेजवाया की राज्य उनके छोटे भाई को देकर उन सभी सुमरी मुस्लिम लड़कियों का विवाह खिलजी के साथ करवा दे लेकिन धोधा ने इस बात को नही माना और खिलजी से युद्ध के लिए। तैयार हो गया युद्ध मे जाने से पहले धोधा ने अपने वफादार सुमरा भाग से कहा कि यदि युद्ध में मुझे कुछ हो जाये तो इन सभी सुमरा कन्याओं को कच्छ के राजपूत शासक जाम अबड़ा जी के पास भेज देना एक वो ही वीर है जो इन सभी सुमरी कन्याओं को की लाज बचा सकते है यह बात कहकर धोधा सुमरा अपनी सेना लेकर खिलजी की विशाल सेना से भिड़ गया और अंत में धोधा की सेना सारी मारी गयी उसके बाद खिलजी सिंध की ओर गया वहाँ जाकर उसने सुमरी कन्याओं को देखा पर वहाँ उनका नामो निशान नही था बाद में उसको पता चला कि सुमरी कन्या कच्छ की तरफ़ जा पहुंची है और भाग सुमरा उन्हें कच्छ लेकर चला गया था सभी सुमरा कन्या महल में पहुच गयी उसके बाद जाम अबड़ा जाडेजा ने उन्हें संदेश पहुचाया मेरी बहनों अच्छा किया जो आज आप मेरे पास आ गयी यदि मुझे सिंध की स्तिथि का पहले पता होता तो में वहाँ आकर भी आपकी रक्षा करता लेकिन आप तो मेरे पास
आ गयी तो आपको कैसे जाने दु आप निश्चित रहे और उधर खिलजी की सेना वड्सर गुजरात मे पहुंच गई थी खिलजी ने शांति सुलह से राजपुतो के पास कई बार सुमरा कन्याओं को खिलजी के पास भेजने के लिए बोला मगर अबड़ा जी जाडेजा ने युद्ध की तैयारी कर ली खिलजी के पास हजारों में शाही सेना थी पर अबड़ा जी की छोटी से सेना ने 72 दिनों तक खिलजी को विजयी नही होने दिया अंत मे अबड़ा
जाडेजा जी का सैन्य बल कम हो गया था उन्होंने महल की सभी राजपुतनियो को बुलाया कहा अब हमारी सैन्य बल पूरी तरह से कम हो गया है उसके बाद सभी राजपुतनियो ने जौहर किया और उन सुमरी कन्याओं को महल से 2 कोस दूर गुप्ती रास्ते से सुरक्षित पर्वत पर भेज दिया जौहर के बाद सभी राजपूत सरदारो ने जौहर की राख को माथे पर लगाया ओर अंतिम सांस तक लड़ते लड़ते मर गए लेकिन युद्ध के बाद खिलजी महल में आया तो उसे वहाँ एक भी औरत नही मिली
(मित्रों राजपूतो ने समय समय पर हर जाति धर्म के लोगो के लिए अपने प्राण दिए है ये सच्ची घटना थी इसे अधिक से अधिक शेयर करे
(नार्थ हरियाणा राजपूत लैंड)