19/08/2018
*हम दुकान वाले है....*
ना घूमने जाते हैं, ना फिरने जाते है।
हम दुकान वाले है , दुकान के सिवाए कही ना जाते हैं।
ना गाने सुना करते हैं, ना गज़ले सुना करते हैं।
हम दुकान वाले हैं, लोगों की परेशानी सुना करते हैं।
ग्राहक लोगों के दुःख-दर्द कुछ ऐसे पहचान लेते है।
हम दुकान वाले हैं, चेहरा देखकर सब हाल जान लेते हैं।
ना गीता, ना बाइबिल, ना ही क़ुरान पढ़ते है।
हम दुकान वाले है, Scheme Circular और Tax Notice पढ़ते है।
ना डिस्को में जाते हैं हम, ना डेट पे जाते हैं,
हम दुकान वाले है, अक़सर घर देर से जाते है।
खुद ही कहानी लिखते है और खुद ही डायरेक्टर होते हैं।
हम दुकान वाले हैं, हमारे अपने परदे,
अपने थिएटर होते है।
हसरतें हूबहू है, ख़ुदा नहीं, हम भी बनना इंसान भला चाहते है।
हम दुकान वाले है, चाहे कुछ भी हो अपने ग्राहक का भला चाहते हैं।
ना खाकी पे एतबार है , ना खद्दर पे इतना भरोसा करते है।
हम दुकान वाले है, लोग हम पे बेहिसाब भरोसा करते है।
हिन्दू भी खड़ा रहता है, मुस्लिम भी खड़ा रहता है।
ये बनिये दुकान वालो का दिल है, जहां
इंसानियत भीतर रहती है, मज़हब बाहर खड़ा रहता हैं।
सभी व्यापारी भाइयो को समर्पित