04/01/2024
क्षत्रिय मीणा महासभा मीणाओ का इतिहास
#चाँदा_मीणा" क्षत्रिय राजवंश खो गंगघाटी" जयपुर,राज
Meena History*
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*खोह+गंग+घाटी का इतिहास*
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*"आलनसिंह चाँदा /जमुवाय"*
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खो गंग घाटी,यह स्थान आमेर से दक्षिण में 15किमी दुर, जगतपुरा के पास,अरावली की ऊँची पहाडि़यों के बीच में स्थित हैं।
*"खो घाटी" के अंतिम मीणा राजा "आलनसिंह चाँदा"ने 124 से1147तक राज किया था,इनकी माता का नाम "देवलदे" और पत्नी का नाम "जमुवा/जमुवाय" था,ये देवी तुल्य रानी थी, इसी "जमुवाय" को कच्छावा राजपुत,जमुवारामगढ़ में "जमुवा माता" कुलदेवी के रूप में पुजते आ रहे हैं*।
*"चांदा मीणा" राजाओं के राज गुरू "गंग ऋषि" की यह तपोस्थली रही थी,यहाँ आकर कठोर तपस्या की थी,अपनी साधना के बल पहाड़ी की चोटी से गंगा प्रवाहित होने लगी थी,और आज भी हो रही हैं*।
खो गंग,का यह स्थान चारो ओर ऊँचे-ऊँचे पहाडो़ के बीच में स्थित हैं,गंग ऋषि ने यहाँ शिव+शक्ति की साधना की इसलिए "गंग ऋषि" के नाम पर *"खो गंग घाटी"* नाम पड़ा,
*मीणा राजा चंद्रसेन चांदा* के गुरू "गंग ऋषि" थे,ऋषि के आग्रह पर यहाँ आकर राज सत्ता कायम की,मीणा इतिहास में "चांदा मीणा"राजवंश की जडे़ बहुत ही प्राचीन और गहरी हैं।
*चाँदा मीणा राजवंश,पौराणिक काल में महिष्मती नगरी,नर्बदा नदी के तट इंदौर में राज करते थे*।
महिष्मती नगरी में हजारों साल राज करने के बाद ,वहाँ से निष्कासित होकर चांदोड़ में राज किया और वहाँ से मीणा राजा, *राव "चंद्रसेन चाँदा" ने "खो गंग घाटी" जयपुर में आकर सन् 164में राज स्थापित किया*।
*"चांदा मीणा" राजवंश ने संवत् 221से संवत् 1204,सन्164 से1147 तक कुल 983लगभग1000वर्षो तक खो घाटी में धर्मानुसार प्रजा हित में राज किया*।
*चांदा मीणा" वंश की उत्पत्ति अग्निवंश के 'मीणा क्षत्रियों' से मानी गई हैं "चाँदा मीणा" "चँद्रवंशी मीणा क्षत्रिय" रहे हैं*।
*चांदा मीणा राजवंश ने "खो गंग घाटी" जयपुर में 54 पिढि़यों तक राज किया था,एक पिढी़=18साल*।
*चाँदा गोत्र* की "धराडी़-कुलवृक्ष"
कदम/कैर/ *"गांँदल"*,कुलदेवी- आसावरी माता।
*"चांदा मीणा" राजाओं की राजधानी का यह संपुर्ण क्षेत्र खोह घाटी में प्राकृतिक रूप से हरियाली के बीच में ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच में स्थित है*।
खो गंग घाटी,का क्षेत्र प्राचीन काल से ही दिव्य,आध्यात्मिक,राजनैतिक रूप से अलौकिक अद्भुत क्षेत्र रहा है।
*दूसरी शताब्दी में स्थापित "चांदा" मीणा राजाओं की कुलदेवी,बाण माता "आशावरी माता" जी का1800 साल पुराना भव्य मंदिर है,दैवी जो की साक्षात् चाॅंदा मीणा राजाओं से बात करती थी*।
*"चाँदा मीणाओं"* की कुलदेवी की आकाशवाणी से घबराकर,जयपुर दरबार, कच्छावों ने मीणाओं का यहाँ आना बंद कर दिया,और नागौर से लाकर यहाँ नागौरी मुसलमानों को बसा दिया गया, इसलिए आज इसे *'खो नागौरीयान घाटी'* कहते है,जयपुर दरबार ने एक स्थाई पुलिस चौकी स्थापित कर दी गई,जो भी मीणा इस क्षेत्र में दिखे उसे मार दिया जाता था, जिसे आजादी के बाद,1987 में बडी़ मुश्किल से तत्कालीन मुख्यमंत्री से मिलकर,*तीन लाख,मीणा समाज* के लोगों ने आंदोलन कर सरकार पर दबाव बनाकर,जयपुर राज दरबार की चौकी को बड़ी मुश्किल से हटवाई गई थी।
*पहाड़ी पर आज आशावरी माताजी का भव्य और दिव्य मंदिर सर्व समाजों के लाखों लोगों के जन आस्था का केंद्र बना हुआ है,पहाड़ी की चोटी पर हरी-भरी फूलवारियों के बीच मंदिर में,आशावरी माता,साक्षात् रूप में विराजमान है, नीचे 1800साल पुराने,शिव मंदिर,और महल और विशाल बावड़ी है, यहां संपुर्ण क्षेत्र पर मुसलमानों ने कब्जा कर रखा है*।
यहाँ आकर हर कोई का मन प्रसन्न हो जाता है,और लोगों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
*खो गंग घाटी,पहाड़ी में एक और "चांदा मीणा" राजाओं का1800-2000साल पुराने महल,बावड़ीयाँ और प्राचीन शिव मंदिर,छतरियाँ "चांदा" मीणा राजाओं के इतिहास को बयांँ कर रहे है, लेकिन आज ये अमुल्य ऐतिहासिक बेसकीमति धरोहरें जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, कोई धणी धोरी नहीं है*।
*"चांदा मीणा" राजवंश का खो घाटी में अंत कर दुल्यराय कच्छावा और इसके वंशजों ने मांची-रामगढ़,आमेर सहित जयपुर के आस-पास ढुँढा़ड़-मत्स्य प्रदेश के 52 विभिन्न गोत्रों के मीणा राजाओं की प्रमुख राजधानी "आमेर" के अधीन आने वाले,ठिकानों को धोखें,छल कपट से मारकर समाप्त कर दिया*।
*मत्स्य प्रदेश-ढुंढाड़ क्षेत्र के मीणा क्षत्रिय राजाओं ने महाभारत काल,के "मत्स्य-मीणा" राजा "विराट" से लेकर12वीं सदीं,1207 तक आमेंर में एकक्षत्र राज किया था*।
*"खो गंग घाटी" जयपुर में "चांदा" मीणा* राजवंश के सभी राजा धर्म और न्याय शास्त्रों के आधार पर सत्य ईमानदारी की राह पर राज्य करते थे,इनका राज्य समस्त मत्स्य-ढुंढाड़ प्रदेश, दौसा टोंक,अजमेर सहित,यमुना,दिल्ली तक विस्तृत रहा था।
*दूल्हेराय कच्छावा का आगमन ही भोले-भाले मीणा राजाओं के लिए अभिशाप रहा है*।
दुल्यराय और इसके वंशजों ने मीणाओ के राज को चुन-चुन कर धोखे से खत्म किया,अंत में 1207 में आमेर पर धोखे से कब्जा कर लिया।
*दुल्हेराय के पिता "सोढा़राव" की हत्या के बाद विधवा रानी अपने पुत्र 'दूल्हे राय-तेजकरण' कच्छावा को,ग्वालियर के पास 'नरवर' कस्बे से 5 वर्ष की उम्र में सन्1133में ढुंढाड़ प्रदेश में "चांदा मीणा" आलनसिंह के दरबार में आकर शरण मांगी गई,उसे धर्म की बहन और उसके पुत्र को धर्म का भांजा बनाकर अपने पास रख कर उसे शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा दी गई* ,
*दुल्हराय की माँ के आग्रह पर चौदह वर्ष की उम्र में सन्1142 में एक नौकर मीणा- राव,राणा,ढो़ली,बारहट"भीमा" को भी साथ में दिल्ली भेजा गया वहाँ पाँच साल रहे,अपनी माँ की पुर्व योजना के अनुसार,ग्वालियर से दिल्ली आये अपने स्वजातीय "तोमर" बंधु "अनंगपाल तोमर तृतीय" के पास दिल्ली भेजा गया*
*इन्हीं तोमर राजपुतों ने*
(दिल्ली के संस्थापक दिल्लू राव बैफलावत, छठी शताब्दी में,खाटु श्याम,सीकर राजस्थान से,जाकर हस्तिनापुर-दिल्ली गये, छोटे भाई,*खाटा राव बैफलावत ने खाटु श्याम नगरी की स्थापना की*,
*बड़े भाई दिल्लू राव बैफलावत ने, हस्तिनापुर की जगह दिल्ली की स्थापना की*,
जो आज भी दिल्ली नाम प्रचलित है,इसी बैफलावत (खाटा) वंशज *"अनंगपाल प्रथम" बैफलावत,ने 911में दिल्ली का लाल किला बनाया था*
*दिल्ली के संस्थापक बैफलावत मीणा* वंशजों से, ग्वालियर से आकर तोमर राजपुतों ने षडयंत्र रचकर धोखे से 11वीं शताब्दी में दिल्ली का लाल किला छिना और बैफलावत मीणा शासकों की वंशावली अपने नाम कर ली गई, दिल्ली के मीणा शासक,और उनके वंशजों को दिल्ली के लाल किला में कैद कर लिया, इनके बाद, मुस्लिम शासकों,गुलाम वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश,सैयद वंश, लोदी वंश,मुगल वंश के शासकों ने भी, दिल्ली के, संस्थापक शाही मीणा राजपरिवार को 500 साल तक कैद कर मुस्लिम बादशाहों की कब्रे खुदवाते रहे थे, मुस्लिम शासकों का कहना था, की दिल्ली के पुर्व राजपरिवार के लोग ही उनकी कब्रे खोद सकते है, इसलिए बैफलावत वंश के मीणा शासकों को जंजीरों से बांध कर कब्रे खुदवाने लाया जाता रहा।
*इसलिए बैफलावत गौत्र के मीणाओं को,खाटा, बैफलावत और कब्र खोदा भी कहा जाता है।*
मुगल बादशाह जहांगीर के समय इनको लाल किला से मुक्त किया गया,वापस राजस्थान में दौसा जिले में आकर आकर बस गये)
आज भी दिल्ली के आसपास,यूपी के गांवो में बैफलावत गौत्र के मीणा समाज,बंधु अधिसंख्या में रहते हैं, बैफलावत मीणाओं की कुल दैवी,लाल किला में मौजूद हैं,आज दिल्ली के पालम हवाई अड्डे के पास,पाली माता मंदिर में मौजूद हैं
*इससे प्रमाणित होता है की दिल्ली के संस्थापक बैफलावत गौत्र मीणा ही रहे थे*,
दिल्ली के तोमर राजपुतों से मिलकर ऐसा ही कच्छावा ढुँढा़ड़ में भी दोहराना चाहते थे, जिसमें वे सफल हुए *'भीमा राणा' को लालच देकर मीणाओं द्वारा दिवाली पर निःशस्त्र होकर बड़े बुजुर्गो की पित्र पुजा की जानकारी प्राप्त कर ली गई और दिवाली पर पित्र पूजा करते हुए,दिल्ली के 'तोमरो' के सहयोग से धोखें से मीणा राजा आलनसिंह चाँदा के राजपरिवार के1445सदस्यों की हत्या कर खो घाटी पर कब्जा कर लिया* राजपुतों के माथें पर यह बहुत बड़ा कलंक हैं।
*आलनसिंह की रानी "जमुवा" अपने पति की देह को मीणा समाज की पहली सती,सन् 959में हुई,"नारायणी माता" अलवर ले जाकर1147 में सती हो गई और सती होते समय "जमुवा रानी" ने 'दूल्हेराय' कच्छावा राजपुत को हत्यारा, दुष्ट,धोखेबाज़ कहकर बुरी तरह फटकारा,तुने धर्म के मामा भांजे के रिश्ते को कलंकित किया है उसे धोखेबाज कहकर उसे श्राप दिया कि तेरा वंश कभी नहीं चलेगा,कुछ समय बाद तेरी भी मृत्यु हो जायेगी*।
*दूल्यराय "जमुवाय" की भविष्यवाणी से घबराकर आत्मग्लानि में रोता हुआ,दूल्यराय बचपन में 'जमुवा रानी' को "माँ" कहता था। हे!"जमुवा माता" मुझे माफ कर दे,माफी मांगने लगा "जमुवा रानी" ने द्रवित होकर पाँच शर्ते बताई,दुल्यराय ने सारी शर्तें निभाने का वादा किया*।
(1) *कभी भी मीणा क्षत्रियों को परेशान नहीं करेगा*।
(2) *"चाँदा गौत्र" के मीणाओं के बाँए पैर के अंगुठे के खुन से नये राजा का राजतिलक करायेगा तभी वंश चलेगा,जिस दिन यह परंपरा छोड़ दोगे तुम्हारा वंश नहीं चलेगा*।
(3) *मुझ जमुवाय को कुलदेवी मानकर पूजा करेगा*।
(4) *घोर संकट में मुझ जमुवा को"माँ"के नाम से पुकारने पर तेरी एक बार सहायता करूँगी,मृत को भी जीवित कर दुँगी*।
(5) *पुकारने पर जब में आऊँगी जहाँ साक्षात दर्शन होंगे वहाँ "जमुवा "मेरे नाम से मंदिर बना देना* तेरे सारे काम पूरे हो जायेंगे।
कुटिल दूल्यराय ने उस समय तो सारी शर्ते मान ली,लेकिन अपनी शर्तो पर ज्यादा दिन नहीं टिक सका कुछ समय बाद ही "दौसा" और *"मांच नगरी" पर आक्रमण कर,यहाँ "सीहरा" गौत्र के मीणा राजा,भी दुसरी शताब्दी सन्164 से राज करते आ रहे थे,"उज्जैन" से आये राजा "मांचदेव" ने मांच नगरी की स्थापना की थी,राजा मांचदेव "विक्रमादित्य" की 9वीं पीढ़ी में पैदा हुए थे, सन्1149में मांच के सीहरा गौत्र के मीणा राजा नाथू सिंहरा* पर आक्रमण कर दिया भयंकर युद्ध हुआ,नाथू सिंहरा ने शाम तक हुए युद्ध में दुल्यराय को अपनी सेना सहित बुरी तरह पराजित कर दिया,वह मृत सैनिकों के साथ घायल अवस्था में पड़ा रहा,अद्धरात्री को होश आने पर *'जमुवा माँ-जमुवाय माँ" पुकारने पर "जमुवा"* ने उसे साक्षात् दर्शन दिया, कपटी *दुल्यराय ने माता से विनती कर अपने घावों और मृत प्रायः सैनिकों को भी ठीक करवा लिया,और अद्धरात्री के बाद धोखें से दोबारा हमला कर "नाथू सीहरा" और उनके घायल सैनिकों की सोते हुए उनकी हत्या कर दी गई,और "मांच नगरी" पर अधिकार कर "जमुवा माता" का मंदिर बनाकर, "जमुवारामगढ़" नाम रख दिया*,कुछ समय बाद नाथू सींहरा के बेटे *"मैदा सीहरा"* ने 'दुल्यराय' को मारकर अपने पिता की हत्या का बदला ले लिया और पुनः "मांची" पर अधिकार कर लिया,और दुल्यराय की गर्भवती पत्नी को अपने मायके अजमेर सकुशल पहुँचाकर राजधर्म का पालन किया ,उधर अजमेर में दुल्यराय के एक पुत्र हुआ जिसका नाम था, कांकिल /कांकिलदेव बड़ा होने पर अजमेर के अपने मामा और ग्वालियर-दिल्ली के अपने स्वजातीय राजपुतों के सहयोग से धोखे से मांच नगरी पर आक्रमण कर दिया महाबलशाली *"मैदा सिहरा"* सिर कटने के बाद भी बहादुरी से लड़ता रहा,अकेले ने ही आधी से ज्यादा राजपुतों की सैना को मार दिया(आज भी जमुवारामगढ़-जारूंडा में भौमियांँ जी के रूप में साक्षात परिचय दे रहे हैं)अंत में हार का सामना करना पड़ा पुनः मांच-जमुवारामगढ़ पर कच्छावों का अधिकार हो गया,कुछ समय बाद कांकिल की भी मौत हो जाती हैं।
*जमुवा रामगढ़ के बाद इनका अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य "आमेर" को जीतना था, आमेर उस समय 52मीणा राजाओं की प्रमुख राजधानी का केंद्र रही थी।*
इसके लिए दुल्यराय का पौत्र, कांकिल का पुत्र "मैहुल /मैकुलदेव" ने भी अपने पुर्वजो की धोखे की नीति का अनुसरण किया।
*दिवाली के त्यौहार पर आमेर में अपनी रानियों द्वारा "अंबा माता"अंम्बकेश्वर शिव मंदिर के दर्शन की अनुमति मांगी गई,"आमेर" के मीणा राजा भानोराव ने स्वीकृति दे दी*
*कुटिल कच्छावो ने दर्शनों के बहाने पालकीयों में आमेर में प्रवेश कर, दिवाली के दिन पित्र पूजा करते हुए,भोले-भाले मीणा राजा "भानोराव"(भानोसिंह मीणा)की गर्दन काटकर ,मारकाट कर सातवीं शताब्दी में निर्मित "पन्ना मीणा" की बावड़ी को लाशों से पाटकर "आमेर"पर कब्जा कर लिया,यह घटना भी कच्छावों राजपुतों के माथे पर बहुत बड़ा कलंक है*।
*दुल्यराय के खो गंग घाटी जीतने के 60 साल बाद इनके पौत्र "मैहुल /मेकुलदेव" ने तीसरी पीढ़ी में जाकर सन्1207में धोखें से "आमेर" जीता*।
*"आमेर" के वर्तमान महल,मंदिर, किले,बावडी़याँ,सुरंगो सहित सारे निर्माण "मीणा" राजा महाभारत काल से लेकर12वीं शताब्दी तक पिछले 5000 वर्षो से करवाते आ रहे थे ,कच्छा़वा राजपुतों ने सिर्फ सौ-दो सौ साल में जीर्णोद्धार कर राजपुती,मुगल शैली का लुक देने का काम किया है*।
इनका अधिकतर समय राजपाट बचाने,मुगलों की चाकरी और युद्धों में ही बीता है,इसलिए आमेर में नया निर्माण बहुत कम करा सके।
*"आमेर" के महलो में कच्छावा राजा-रानियाँ कभी भी चैन की की नींद नहीं सो सके,हत्याकांड में मारे गये "मीणा" राजपरिवार के सदस्यों की चीखें रात में सुनाई देती थी,और मीणा भी प्रतिशोध लेने के लिए संगठित हो रहे थे,इससे घबराकर आमेर की पहाड़ी के दक्षिण में जयसिंह द्वारा 18नवंबर सन् 1727को "जयपुर" की स्थापना करनी पडी़*
और मीणों को खुश करने के लिए *किलेदार, पहरेदार,चौकीदार,खजांची बनाकर प्रतिशोध को शांँत करने की कोशिश की और बहुत सारी रियायतें भी मीणो के हित में देनी पडी़*,
तब जाकर ये जयपुर में निष्कंटक राज कर सके।
*जमुवा रानी के श्राप वश कच्छावा राजपुत नयें राजा का राजतिलक 'चांदा' मीणाओ के बाएं पैर के अंगूठे के खून से किया जाता रहा,बाद में सारे राजस्थान के राजपूत राजाओं ने इसे 'नीचा' दिखाने वाली प्रथा,और अंधविश्वास कहकर बंद करा दिया गया,जिसके कारण इनका वंश खत्म हो गया इसके बाद 7 सित.सन् 1921में ईसरदा (शिवाड़)के ठाकुर के पुत्र #मानसिंह द्वितीय # को जयपुर दरबार द्वारा गौद लेना पड़ा*।
*"चांदा मीणा" राजवंश की खो घाटी में आज करीब "2000 साल" पुरानी बेशकीमती ऐतिहसिक धरोहरे नष्ट होने की कगार पर है,दुर्दशा और मुसलमानों के अतिक्रमण का शिकार हो रही हैं, यह राजस्थान ही नहीं भारत की अमुल्य धरोहरों में से एक है, आज इसे बचाने की सख्त ज़रूरत है*।
समस्त भारत के मीणा समाज को आगे आकर "खो गंग घाटी",आमेर, मांच नगरी (जमुवा रामगढ़) सहित पुरे भारत में सैकड़ों स्थानों पर मीणा क्षत्रिय शासकों ने राज किया था।
मीणा समाज की बिखरी हुई पुरातात्त्विक,ऐतिहासिक,गौरवशाली,बेशकीमति,अमुल्य धरोहरों को सरकार और मीणा समाज द्वारा 'सूचनापट्ट' लगाकर बचाने का भरसक प्रयास करना चाहिए।
*मीणा समाज, के पुर्वजों के,अधिकतर गौत्र के शासकों ने इस धरा पर हजारों वर्षों तक राज किया था*
चांदा,सुसावत,बैनाडा़,बड़गोती, मांड्या,सिंघल,घुसिंगा, सीरा,मोटिस ब्याडवाल,झरवाल, बागड़ी, बैफलावत गोमलाडू,टाटू, लिस्ट लंबी है गौत्रो सहित अनेक सैकड़ों गौत्र के "मीणा" राजवंशों ने इस धरा पर हजारों वर्षो तक राज किया था।
*समस्त भारत के मीणा समाज, को अपने अतीत के गौरवशाली ऐतिहासिक इतिहास का पता होना चाहिए, हमें गर्व करना चाहिए हमारे मीणा क्षत्रिय समाज के पुर्वजों ने, "मत्स्य प्रदेश" राजस्थान की धरा पर हजारों वर्षों तक एकछत्र राज किया था, हमें मीणा होने पर गर्व है*।
सोचने वाली बात है
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महाभारत काल के मत्स्य नरेश, *राजा विराट* भी मीणा ही थे,भुला दिया गया इतिहास को ,,,,?
महाभारत काल के *राजा मोरध्वज* भी,मोरागढ़, गढ़मोरा के मीणा राजा थे,भुला दिया गया इतिहास को,,,,?
*चंद्रगुप्त मौर्य* भी मीणा ही था,इनका जन्म भी दौसा लालसोट क्षेत्र में हुआ,*अशोक* ने पुर्वजों के भुमि में बौद्ध विहार बनाये,आज भी मौजूद हैं,भुला दिया गया इतिहास को,,,,?
क्षत्रिय मीणा महासभा मीणाओ का इतिहास
*राजा विक्रमादित्य* भी मीणा ही थे, जिन्होंने विक्रम संवत चलाया, इन्हें भी भुला दिया गया,,,,?
*राजा भर्तृहरि* भी मीणा ही थे राजा और योगी रहे इन्हें भी भुला दिया,,,,?
*मांगट देव जी* भी मीणा ही थे,देवनारायण जी के समकालीन रहे, इन्हें भी भुला दिया गया,,,,?
*मीणाओं का विष्णु के प्रथम् अवतार से संबंध* रहा है, इन्हें भी भुला दिया गया,,
*राजस्थान में बड़ी-बड़ी रियासतों के प्रारंभिक शासक मीणा ही रहे थे*, इन्हें भी भुला दिया गया जैसे *आमेर*,आम्रनरी,अंबावती (अंबा मीणा) *अजमेर*,(अजय+ मेर मीणा) *चित्तौड़गढ़*,चिंत्रागद मोरी मीणा, अंतिम मीणा राजा मानमोर मीणा) *बाड़मेर*,बाढ़देव ब्याडवाल ने) *रणथंभौर*,(टाटु गौत्र के मीणा) *बुंदी*,(बुंदा मीणा ऊषारा गौत्र के मीणा राजा)
*एक जाति जो अपना इतिहास भुल जाती है वह बिना जड़ वाले पेड़ की तरह होती है*।
A Cast that Forgets it's past history is like a tree with out a roots..
बिना पैंदे के लोटे की तरह इधर-उधर लुढ़कते रहते हैं,,
Rolling arround like a bottomless Pot..
*हमें, एकजुट रहकर, वर्गभेद भुलकर,हमारे मीणा पुर्वजों का इतिहास देश और समाज के सामने लाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हमारे पुरखों के अतीत का गौरवशाली इतिहास पढ़कर हम,और हमारी आने वाली पीढ़ियां गौरव का भान कर सके,,,,✍🏻*
*जय मिनेष*
*राम-रामजी*
✍🏻RPMeena
॥ॐ॥
हर हर महादेव 🚩 जय मीनेश 🚩
क्षत्रिय मीणा महासभा
अजय झरवाल एंड टीम