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ll तुम जब आओगी ll
20/05/2024

ll तुम जब आओगी ll


29/08/2021

।।हिना की बर्फी।।
आजा तुझे चख लूँ ज़रा🤭
आप सब ने इस कविता का वाचन तो सूना ही होगा!
तो इन मैडम का नाम बर्फ़ी है और यह हमारे साथ इसी तरह इतराती है।
।।हिना की बर्फी।।

15/08/2021

।।आज़ादी ।।

09/08/2021

"हिना का इंस्टाग्राम पर प्यार"

चलो कुछ रोज हम तुम
एक दूसरे के थोड़ा करीब रहेंगे
एक दूसरे को खूब स्टॉक करेंगे

इन इंस्टा की गलियों में सैर पे चलेंगे
तुम्हारी खराब पोस्ट भी शेयर करेंगे
लाइक कमेंट और खूब मेंशन करेंगे

तुम झुमका बिंदी बाली पहन कर लाइव आना
हम दिल भेज कर तुम्हारा दिल गार्डन करेंगे
तुम हाथों में मेहंदी लगाकर तस्वीर डालना
हम प्यार से उस तस्वीर को खूब चूमेंगे

तुम ढेर सारी अच्छी कविताएं भेजना
हम तुमको ढेर सारी कहानियां भेजेंगे
तुम हमसे रात रात भर खूब चटियाना
हम तुम इधर ही दिल का लेन देन करेगें

03/08/2021

कविता का प्रमुख उद्देश्य उपदेश देना तो नहीं है लेकिन जीवनानुभव से उपजे विभिन्न भावों को उदारता तक पहुँचाना जरूर उद्देश्य में ही शामिल है।

गीत चतुर्वेदी को "खुशियों के गुप्तचर" के लिए असीम बधाई है साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना।।
बस इतना ही कहूंगा कि अगर आप हर एक
लब्ज़ खूबसूरत लहज़े में पिरोना चाहतें हो
तो सुनते रहो पढ़ते रहो मेरे पंसदीदा
कवि गीत चतुर्वेदी जी को
"खुशियों के गुप्तचर"
पढ़ना ना भूले।।

31/07/2021

इतना आसान कहा है मन की करना।।

#आसान #मन

30/07/2021

यादों के पीटारे से देखो क्या निकल आया।
'तू ख़ुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है'

तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है

Written by : तनवीर ग़ाज़ी
Voice:-Heena Shau


Amitabh Bachchan

27/07/2021

"गीतांजली सिन्हा" की ख़ुबसूरत रचना को
अपनी रूहानी, दिलकश आवाज़ से महकाती हिना।।

पिताजी की ज़ेब में अक्सर नहीं रहते पैसे •
पिताजी की ज़ेब में
अक्सर नहीं रहते पैसे
बेकार खिलौनों के लिए,
लाली पाऊडर के लिए,
उनके नए चश्में के लिए।

उनकी ज़ेब में नहीं रहते पैसे
उन सारी चीजों के लिए जिन्हें ज़रूरत
मरम्मत की नहीं, बदले जाने की थी
पर अभी एक साल और चलेगा कहकर
जिन्हें अक्सर ही टाला जाता रहा।

पिता की ज़ेब में
अक्सर नहीं रहते पैसे
उन सारी ग़ैर ज़रूरी फरमाइशों के लिए
जिसके लिए हर मध्यमवर्गीय
पिता की ज़ेब कभी तैयार नहीं होती।

पिताजी की ज़ेब में हमेशा रहें पैसे
हमारी कॉमिक्स के लिए
कलम के लिए, दवात के लिए
एग्जाम फॉर्म के लिए,
हमारी किताबों के लिए।


26/07/2021

जब एक विचार मूर्त रूप लेले तो कितना ही अच्छा लगता है न!

ठीक यही हुआ, Virtual वाणी के साथ "कविता और हम" टाइटल पर हमने कल गूगल मीट रखा था।

दिल्ली से लेकर अलग अलग शहर के युवासाथी जुड़े और कवि - अशोक कुमार सर जी के साथ सभी ने कविता सुनते हुए, अपने सवाल पूछे और सटीक जवाब से ये आयोजन लाजवाब बन गया।

इस विषम परिस्थिति में हमारा प्रयास है कि सबके विचारों में सकारात्मक ऊर्जा हो, यथा संभव स्वस्थ और दुरुस्त रहने का प्रयास भी तो औषधि है न! सो ये पहला सफल आयोजन रहा।

आगे जुड़ते रहिए -जोड़ते रहिए

Virtual वाणी के साथ

यानी प्रतिभाओं के साथ।
आगे भी हम कुछ बेहतर लेकर आने वाले हैं।

ाणी

ाणी

19/07/2021

यह ज़िंदगी क़िताबी चाय है जनाब..
इसे तसल्ली के कप में छानकर
घूंट घूंट कर मज़ा लीजिये...!!

।।लेखक परिचय।।नाम:- दिव्यप्रकाश दुबेजन्म:- 8 मई 1982 स्थान:- लखनऊ,उत्तर प्रदेश, भारतव्यवसाय:- लेखक,कवि, रचनाए:- इब्नेबतू...
30/06/2021

।।लेखक परिचय।।

नाम:- दिव्यप्रकाश दुबे

जन्म:- 8 मई 1982

स्थान:- लखनऊ,उत्तर प्रदेश, भारत

व्यवसाय:- लेखक,कवि,

रचनाए:- इब्नेबतूती,अक्टूबर जंक्शन,
मुसाफिर कैफ़े, मसाला चाय, शर्तें लागू

भाषा शैली:- हिंदी, अग्रेज़ी, क्षेत्रीय भाषा


रुड़की के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पढ़ाई करने वाले इंजीनियर साहब को शब्दों का चस्का ऐसा लगा कि ‘मसाला चाय’ और ‘शर्तें लागू’ जैसी पुस्तकें लिख डालीं।

अपनी इन पुस्तकों से युवाओं में अच्छाखासा पैठ बना लेने के बावजूद बहुत समय तक यही माना जाता था कि दिव्य प्रकाश दुबे ठीक-ठाक कहानियाँ लिख लेते हैं. लेकिन बाद में जब वे 'स्टोरीबाज़ी’ में कहानियाँ सुनाने लगे तो लगा, कि नहीं उनकी कहानियां तो कुछ ज्यादा ही अच्छी हैं

TEDx में बोलने गए तो टशन-टशन में हिंदी में बोलकर चले आए। इनकी संडे वाली चिट्ठी बहुत पॉपुलर है।

तमाम लिटेरचर फेस्टिवल्स, इंजीनियरिंग एवं MBA कॉलेज जाते हैं तो अपनी कहानी सुनाते-सुनाते एक-दो लोगों को लेखक बनने की बीमारी दे आते हैं।

पढ़ाई-लिखाई से B.Tech-MBA हैं। साल 2017 में MBA टाइप नौकरी को अलविदा कह चुके हैं।

साल 2016 में छपे अपने उपन्यास 'मुसाफिर Café’ की बंपर सफलता के बाद दिव्य प्रकाश 'नई वाली हिंदी’ के पोस्टर-बॉय की तरह देखे जाने लगे हैं।

इनका नवीनतम उपन्यास 'अक्टूबर जंक्शन’ अपने प्रकाशन के समय से ही बेस्टसेलर बना हुआ है। हाल ही में इन्होंने ऑडिबल के लिए 'पिया मिलन चौक’ नाम से ऑडिबल ओरिजनल किया है जो खूब लोकप्रिय हो रहा है।

साल 2019 में दिव्य प्रकाश दुबे हिंद युग्म के लखप्रति लेखक क्लब में शामिल किए गए हैं।.

अब जिस लेखक की कलम सीधे लोगो के दिलो दिमाग पर अपना घर बना चुकी हो वहां फिर लेखक का परिचय सूरज को चाँद दिखाने जैसा हैं।।

जुड़ते रहिए, जोड़ते रहिए ।।
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