R k Harvani

R k Harvani I ha recently retired from State bank of India as Chief Mnager. I am M.A.(economics) M.Com and C.A.I

21/03/2026

*देखो कितना बड़ा इंतजाम है*

ये दुनिया को बनाना
बनाकर फिर चलाना,
बस उसीका बड़ा काम है,
देखो कितना बड़ा इंतजम है।
बड़ा जबरदस्त उसका काम हे।।

दिन मे दिन को बनाना,
रात मे रात को बनाना।
सुबह को सुबह बनाना,
शाम को शाम बनाना।
बस उसी का बड़ा काम है
देखो कितना बड़ा इंतजाम है।।

सुबह को सूरज उगाना
रात को चाँद ही उगाना।
आसमा मे तारे चमकाना,
धरती पर खूब वृक्ष उगाना।
बस उसी का बड़ा काम है
देखो उसका बड़ा इंतजाम है।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

04/03/2026

*टेसू के लाल लाल फूलों का रंग आज फाग पे छाया।*
*गुलाब महका पलाश दहका गुलनारी रंग भाया*
*रंग बिरंगा गुलाल हवाओं में घुल के यूँ बिखरा,*
*अजब गजब लाल रंग होली की मस्ती ले आया*.....................................

*तो चारों और ढप धमाल, चंग संग फाग।*
*मौसम के पलटवार का बदला बदला राग।*

*आपको फागुन की रंगों भरी होली की शुभकामनाओं के साथ*।🙏🙏💐💐🌹🌹💃💃🔴🟠🟡🟢🔵🟣⚪
आर के रस्तोगी गुरुग्राम

28/02/2026

*होली मे क्या क्या होना चाहिए*

ज़ब तक होली मे रंग ग़ुलाल ना हो,
मन मे ख़ुशी हो पर कोई मलाल ना हो,
अपने और पराये का कोई सवाल ना हो,
छोटे और बडो का कोई बबाल ना हो,
ज़ब तक होली क्या होली है?
वरना रंगो के साथ ठठोली है।।

ज़ब तक होली मे हलवाई ना हो,
देशी घी की मिठाई ना हो।
भाँग भरे गर्म गर्म पकोडे ना हो,
उसमे चटनी की लाग लगाई ना हो,
ज़ब तक होली क्या होली है?
वरना रंगो के साथ ठठोली है।।

ज़ब तक होली मे पिचकारी ना हो,
बच्चो की हंसी की खिलकारी ना हो,
यार दोस्तों के साथ कोई मक्कारी ना हो,
प्यार के रंगो का कोई भिखारी ना हो,
ज़ब तक होली क्या होली है?
वरना रंगो के साथ ठठोली है।।

ज़ब तक होली मे ठंडी ठंडाई ना हो,
उसमे थोड़ी सी भाँग मिलाई ना हो।
भाँग की बढ़िया सी पिसाई ना हो,
सलज ने अपने हाथो से पिलाई ना हो,
ज़ब तक होली क्या होली है?
वरना रंगो के साथ ठठोली है।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

20/01/2026

*मुझे घरवाली ने पीटा (एक हास्य व्यंग्य)*

मेरा नाम है घसीटा,
मुझको घरवाली ने पीटा
ज़ब आया मै अपने घर
रात को बड़ी ही देर से।

पूछा देर से तू क्यों आया
क्या आज भी पीकर आया
बच्चे भी हो गये अब स्याने,
घऱ पर नही खाने को दाने।
पड़ोसन भी घऱ से बाहर आई
उसने भी मुझे खूब मार लगाई।।

मै गया रिपोर्ट लिखाने,
गलती से पहुँच गया मै महिला थाने,
पुरुष देखकर थानेदार महिला घबराई,
वह भी मोटा सा डंडा लेकर आई,
करने लगी वह भी मेरी पिटाई

मै रोता रोता पुरुष थाने पंहुचा,
थाने मे मुझे वहाँ के मुंशी ने टोका
क्या थाने मे रिपोर्ट लिखाने आया
रिपोर्ट लिखाने के लिए कुछ लाया,
क्यों खाली हाथ थाने तू यहाँ आया,

बड़ी मुश्किल से थानेदार तक मै पहुंचा,
थानेदार ने मेरी करी सुनवाई
पूछा तेरी क्यों हुई थी पिटाई।
साहब मै पी कर घऱ आया था,
इसलिए हुई थी मेरी पिटाई।
पहले पिटने के कुछ सबूत लाओ
फिर आकर थाने मे रिपोर्ट लिखाओ

वह रोता रोता सरकारी अस्तप्ताल पंहुचा,
उसने अपनी कमर पर पड़ी मार दिखाई।।
बड़ी मुश्किल से चोट पर पट्टी बंधवाई,
और मार के सर्टिफिकेट की गुहार लगाई
पर उसे सर्टिफिकेट नही मिल पाया,
वहां भी इसके लिए पैसो का सवाल आया।

वह अब भागते भागते थक चुका था
देश के भ्र्ष्टाचार से वह ऊब चुका था।
अब उसने कभी न पीने की कसम खाई,
और हर जगह पिटने से अपनी जान बचाई।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

20/01/2026
20/01/2026

मुझे घऱवाली ने पीटा (हास्य व्यंग्य) - Read on Sahityapedia

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आर के रस्तोगी

20/01/2026

*सब धरा पर ही धरा रह जायेगा*

इस धरा से कुछ नही ले जायेगा,
सब धरा पर ही धरा रह जायेगा।
कर ले कुछ नेक काम इस धरा पे
नेक काम ही इस धरा से जायेगा।

धरा ही आज हमारी धरोहर है,
इसके बराबर कोई न धरोहर है।
धरा न होती तो जीवन न होता,
प्राणियों के यही बड़ी धरोहर है।।

धरा के लिए सब आज लड़ रहे है,
एक दूजे पर आक्रमण कर रहे है।
ये धरा न होती लड़ाई झगड़े न होते,
धरा कौ ही सब धरोहर मान रहे है।।

धरा मे सब खनिज पदार्थ गड़े है,
इसलिय सभी इसके पीछे पडे है।
धरा के बराबर कोई भी लोक नही
इसमें ही केवल सोना चांदी जड़े है।।

धरा पर ही उद्योग धंधे धमक रहे है,
जो लोगों का आज पेट पाल रहे है।
अगर धरा पर ये उद्योग धंधे न होते,
हम कभी के धरा पर मरे हुए होते।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

03/01/2026

*ससुर कुंवारा ही रह गया*

बहू घर आ गयी,ससुर कुंवारा ही रह गया।
यह सुनकर,सारी संसद मे सन्नाटा छा गया।।

यह कैसे हों सकता है,बहू घर मे आ जाये।
और बेचारा ससुर ऐसे ही कुंवारा रह जाये।।

यह बात हमें कभी हजम नही हों सकती।
उल्टी गंगा कभी मैदान बह नही सकती।।

इस बात की जरा गहरी जाँच पड़ताल की जाये।
अगर जरूरत पडे एक समिति गठित की जाये।।

यह कभी नही हों सकता ससुर कुंवारा ही रह जाये।
बिन शादी के वह अपनी औलाद पैदा करके जाये।।

औलाद की शादी करने पर ही वह ससुर बन पायेगा।
वरना वह कभी भी भविष्य मे ससुर नही बन पायेगा।

एक एक करके संसद के समक्ष आये प्रश्न बहुत से।
पर एक प्रश्न पर भी एक मत न हों सके बहुत से।।

एक प्रश्न उठा पहले कुंवारा ससुर ढूंढा जाये।
तब फिर संसद मे इस बात पे बहस की जाये।

इस बात को सुनकर श्री राहुल संसद से उठ भागे।
पता चला सबको श्री राहुल है कुंवारे ससुर अभागे।।

आर के रस्तोगी

18/12/2025

*अंतिम संस्कार*

मरने के बाद भी आज अपने भी नही मिलते,
मरने के सन्देश भी आज व्हाट्सप्प पर मिलते।
फुरसत किसी को नही अंतिम संस्कार मे पहुंचे,
व्हाट्सप्प पर आज तो ॐ शांति के संदेश मिलते।।

कैसा समय हैं इस काम के लिए दुकाने खुल गई हैं।
बेटों को इस काम से भी आज फुर्सत मिल गई हैं।
मरने वाला भी एडवांस देकर बेफिक्र हों गया हैं,
इस बहाने से कुछ लोगों को नौकरियां मिल गई हैं।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

05/12/2025

*आजकल की शादी पैसे की बर्बादी*

आजकल शादी मे करोड़ो रूपये हों जाते है बर्बाद।
अगर शादी जल्द टूट जाये दो घर हों जाते है बर्बाद।
दो घर हों जाते है बर्बाद,किसी का बस न चल पावे,
कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाकर कोई हल न पावे।
कह रस्तोगी कविराय,क्यों करते हों तुम ऐसी बर्बादी,
बिना शान शौकत के तुम करो आजकल सब शादी।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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