01/09/2022
....कुछ लोग कहते तुम पीड़ा क्यों लिखती हो ,, हास्य लिखो, प्रेम लिखो, विरह केवल ह्रदय को दुख देगा। तुम चिंताओं से घिर जाओगी। ......मैं अब कैसे बताऊँ कि ह्रदय की वेदना से बुने हुए शब्द ही मुझे बेहतर समझते है। जो मेरे भीतर कही दबा हुआ है, शब्दों से पूरी तरह अभी बाहर नही आया। भावनाएं सागर की लहरों के वेग सी उफान भरती है, इन्हें शब्दों में उतारना,कल्पनाओं में खो जाने से कही अधिक जरूरी है,,,।
इस दुनिया में अब तक की उम्र में जो भी मिला है उनमें सबसे ज्यादा हिस्सा झूठ, फरेब, छल और स्वार्थ का ही रहा है,,,औऱ एकमात्र दर्द ही अपना रहा है जो जोंक की तरह चिपका हुआ है। .... पीड़ा कोई नही ले जाता, जो आपसे ले जाते वो आपका प्यार, आपका अपनापन, आपका मन, आपकी मुस्कुराहट,,,,
और अक्सर आखिर में ह्रदय भर जाता है इन्हीं छोड़ी गई पीड़ाओं से, दुख से, संवेदनाओं से......!!!