Bharatiya Jnanpith

Bharatiya Jnanpith Bharatiya Jnanpith's twin objectives are research and publication of rare and world class Indian literature and award the best writers of the land.

Since its inception, the Bharatiya Jnanpith has been working devotedly for the fulfilment of its twin objectives. Its research and publication programme started with the resurrection of a monumental classic. A temple at Moodbidri in Karnataka, had stored for centuries an unidentified manuscript of palm-leaves. The Jnanpith's painstaking research revealed that it was a ninth century commentary in P

rakrit and Sanskrit, of a second century A.D. work, Sat-khandagama, in Prakrit on the doctrine of karman. The sixth & last part of this great work, Mahabandha, has been published in seven volumes, comprising three thousand pages, by Bharatiya Jnanpith. MOORTIDEVI GRANTHMALA

The completion of this epic-work inaugurated the establishment of 'Moortidevi Granthamala' named after the revered mother of late Sahu Shanti Prasad Jain. This was the beginning of the Moortidevi Granthamala, which has, since then been brought out, in scientifically edited form, rare works on Indian thought, culture and religion. These works are in Sanskrit, Prakrit, Pali, Apabhramsa, Tamil, Kannada, Hindi and English, covering subjects like religion, philosophy, logic, ethics, grammar, astrology, poetics etc. More...

LOKODAYA GRANTHMALA

The objective of encouraging creation of original modern literature is sought to be achieved through several programmes, the most important being the Lokodaya Granthamala. It has been the endeavour of the Jnanpith to highlight the emerging talent whose writings are generally ignored by commercial publishers. Bharatiya Jnanpith can justifiably feel proud of the fact that it has helped a number of writers, who have acquired eminence today, in their formative years.

टाइम्स ग्रुप और भारतीय ज्ञानपीठ की अध्यक्ष इंदु जैन को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि!!
14/05/2021

टाइम्स ग्रुप और भारतीय ज्ञानपीठ की अध्यक्ष इंदु जैन को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि!!

आप सादर आमंत्रित हैं...
14/12/2019

आप सादर आमंत्रित हैं...

कृष्णा सोबती को भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि!------------------------------------------------------------...
25/01/2019

कृष्णा सोबती को भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि!
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भारतीय ज्ञानपीठ परिवार हिन्दी की मूर्धन्य उपन्यासकार-कथाकार कृष्णा सोबती के निधन पर हार्दिक शोक प्रगट करता है। कृष्णा सोबती हिन्दी की एक स्वाभिमानी, स्वतन्त्र और जुझारू लेखिका थीं जिन्होंने अपने जीवन में कभी समझौता नहीं किया और अनेक सामाजिक मुद्दों पर जमकर प्रतिरोध करके नयी पीढ़ी को रचनात्मक रास्ता दिखाया। आज के कठिन बल्कि भयावह समय में उन्होंने अपनी लेखनी से हमेशा लेखकीय स्वतन्त्रता, मानवीय मूल्यों और धर्म निरपेक्षता की मशाल जलाए रखी। उनकी दुर्धर्ष रचनात्मकता ने हिन्दी साहित्य को एक से बढ़कर एक असाधारण रचनाएँ देकर समृद्ध किया और खासकर 'जि़न्दगीनामा’, 'मित्रो मरजानी’ और 'ऐ-लड़की’ जैसी कालजयी रचनाएँ दीं। अपने करीब 70 साल के लेखकीय जीवन में उन्होंने साहित्य के नये-नये शिखरों को छुआ। और करीब 94 वर्ष की आयु तक वे अपनी बीमारियों से निरपेक्ष रहकर अपने समय के प्रश्नों से जूझती रहीं। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार के साथ-साथ अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनके अवसान से हिन्दी ने सचमुच अपना एक अनोखा साहित्यिक नक्षत्र खो दिया है। हमारी कामना है कि उनकी आत्मा को शान्ति मिले और देश-दुनिया में फैले उनके लाखों पाठकों-प्रशंसकों को इस दुखद आघात को वहन करने की समर्थन प्राप्त हो।

नयी दिल्ली 25 जनवरी, 2019

साहू अखिलेश जैन, प्रबन्ध न्यासी, भारतीय ज्ञानपीठ
मधुसूदन आनन्द, निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ

आज विश्व पुस्तक मेला में युवा कथाकार भूमिका द्विवेदी के नए उपन्यास 'किराये का मकान' का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार व अनुव...
13/01/2019

आज विश्व पुस्तक मेला में युवा कथाकार भूमिका द्विवेदी के नए उपन्यास 'किराये का मकान' का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार व अनुवादक श्री शैलेंद्र शैल, साहित्यकार, गीता पंडित, और श्री बाबुराम पाठक ने किया। Bhumika Dwivedi को भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से बहुत बहुत बधाई।

54वां ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2018 के लिए अमिताव घोष को प्रदान किया जायेगा.
14/12/2018

54वां ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2018 के लिए अमिताव घोष को प्रदान किया जायेगा.

वर्ष 2017 का मूर्तिदेवी पुरस्कार बंगला के प्रतिष्ठित कवि जय गोस्वामी को उनकी काव्यकृति 'दु दोंदो फुव्वारा मात्रो' को दिय...
15/12/2017

वर्ष 2017 का मूर्तिदेवी पुरस्कार बंगला के प्रतिष्ठित कवि जय गोस्वामी को उनकी काव्यकृति 'दु दोंदो फुव्वारा मात्रो' को दिया जाएगा. जय गोस्वामी जी को भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से बहुत बहुत बधाई!

वर्ष 2005 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण का आज तड़के निधन हो गया. वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर र...
15/11/2017

वर्ष 2005 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण का आज तड़के निधन हो गया. वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे थे. भारतीय ज्ञानपीठ से उनका गहरा अंतर्संबंध था. बाजश्रवा के बहाने, आत्मजयी, कुमारजीव आदि ज्ञानपीठ से प्रकाशित उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं.

भारतीय ज्ञानपीठ उनके निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उनके परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे!

53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिंदी की वरिष्ठ कथाकार कृष्णा सोबती को. भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई!
03/11/2017

53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिंदी की वरिष्ठ कथाकार कृष्णा सोबती को. भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई!

जबलपुर में आज वरिष्ठ कथाकार और साहित्यिक पत्रिका 'पहल' के यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन जी को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा 'ज्ञान गर...
11/02/2017

जबलपुर में आज वरिष्ठ कथाकार और साहित्यिक पत्रिका 'पहल' के यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन जी को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा 'ज्ञान गरिमा मानद् अलंकरण' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान ज्ञानपीठ के प्रतिष्ठित मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने प्रदान किया।

नया ज्ञानोदय के अक्टूबर अंक का आवरण
06/10/2016

नया ज्ञानोदय के अक्टूबर अंक का आवरण

नवलेखन पुरस्कार समारोह 2016 में आपसादर आमंत्रित हैं.
19/07/2016

नवलेखन पुरस्कार समारोह 2016 में आपसादर आमंत्रित हैं.

51वां ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोहदिनांक : 11 जुलाई, 2016समय: 6:00 बजे सायंस्थान :  संसद भवन पुस्तकालय
06/07/2016

51वां ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह
दिनांक : 11 जुलाई, 2016
समय: 6:00 बजे सायं
स्थान : संसद भवन पुस्तकालय

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Delhi
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