03/08/2022
महर्षि दयानंद भारतीय इतिहास के एक ऐसे बिंदु पर हमारे मध्य आयें , जहाँ से पूर्व और परवर्ती युग का स्पष्ट बोध होता है ।
महर्षि दयानंद के आविर्भाव से पूर्व यह देश न केवल राजनितिक रुप से पराधीन था, अपितु धार्मिक ,सामाजिक ,शैक्षणिक आदि सभी दृष्टि यों से निम्नतम सोपान पर खड़ा हुआ था ।
महर्षि दयानंद ने जहाँ हमारे समक्ष सत् शास्त्रों की अनुपम व्याख्या दी वहीं जीवन को सन्मार्ग पर चलने के लिए कतिपय सूत्र प्रदान किये ।
प्रस्तुत कार्य करते समय मैंने महर्षि दयानंद के समग्र साहित्य को आधार बनाया , महर्षि के एक ऐसे कार्य को प्रस्तुत करने की योजना थी , जिसमें किसी भी विषय पर महर्षि के समस्त विचारों को एक साथ प्राप्त किया जा सकें ।चाहे वह आश्रम व्यवस्था , वर्णव्यवस्था या उनके दार्शनिक मंतव्य हो , उसमें भी ईश्वर ,जीव , प्रकति और दर्शन के भेद उपभेद हो या फिर पौराणिक मत -मतान्तर ईसाई, या मुस्लिम संप्रदाय विषयक जिज्ञासा हो , सबका समाधान एक स्थान पर हो जाएं इस उद्देश्य को लेकर
दयानंद सन्दर्भ कोष नाम से कोष के गठन की योजना को मूर्त रूप प्रदान किया
Mrp 3500.00
Postage free
Contect -
Website wwwbuyspiritualbooks.com
ईमेल om.dogra66@gmail.
com
Whats 9711448498