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हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहींहम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं। - जिगर मुरादाबादी
16/11/2024

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं।
- जिगर मुरादाबादी

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाते हुए इसे पूरी तरह से गलत बताया है. कोर्ट का कहना है कि जब तक कोई आरोपी दोष...
13/11/2024

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाते हुए इसे पूरी तरह से गलत बताया है. कोर्ट का कहना है कि जब तक कोई आरोपी दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक वह निर्दोष होता है और अगर इस दौरान उसका घर गिरा दिया जाए तो यह पूरे परिवार के लिए सजा होगी. कोर्ट ने कहा कि दोषी का घर गिराया जाना भी गलत है. दोषी के लिए सजा निर्धारित करने का काम कोर्ट का होता है न कि कार्यपालिका का. कोर्ट ने उन अधिकारियों की भी जवाब देही तय करने के निर्देश दिए हैं, जो बुलडोजर एक्शन जैसी कार्रवाई में शामिल हैं.

#सुप्रीमकोर्ट #बुलडोजरएक्शन #समाचार #हिंदी #हिंदी समाचार


Chief Justice of India (CJI) DY Chandrachud shed tears on his last working day as a judge of the Supreme Court of India....
08/11/2024

Chief Justice of India (CJI) DY Chandrachud shed tears on his last working day as a judge of the Supreme Court of India.

His elevation to the Supreme Court took place on May 13, 2016. He has since authored a number of notable judgments including dissenting opinions against the ruling dispensation.

                 #
05/11/2024

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ट्रिपल तलाक के एक मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। जज ने कहाकि शरीयत काउंसिल एक निजी संस्था है, को...
30/10/2024

ट्रिपल तलाक के एक मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। जज ने कहाकि शरीयत काउंसिल एक निजी संस्था है, कोई कोर्ट नहीं है। यह मामला एक मुस्लिम डॉक्टर कपल का था, जिनकी शादी साल 2010 में हुई थी। पति ने ट्रिपल तलाक देकर दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन पत्नी का कहना था कि उसने तीसरा तलाक सुना नहीं था। हालांकि डॉक्टर ने शरीयत से मिले डिवोर्स सर्टिफिकेट के आधार पर दूसरी शादी कर ली थी। इसके बाद उसकी पहली पत्नी मामले को लेकर कोर्ट पहुंच गई थी। इसके साथ ही जज ने कहाकि अगर पहली शादी वैध रहते दूसरी शादी करना हिंदू धर्म में क्रूरता है तो मुस्लिमों में क्यों नहीं माना जाना चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने शरीयत द्वारा जारी डिवोर्स सर्टिफिकेट को शॉकिंग बताया। उन्होंने कहाकि शरीयत ने पति की ट्रिपल तलाक की अर्जी स्वीकार कर ली और मीडिएटर बनने की कोशिश की, लेकिन पत्नी पर सहयोग न करने का आरोप लगा दिया। जज ने कहाकि केवल कोर्ट को इस तरह का आदेश देने का अधिकार है। शरीयत काउंसिल एक प्राइवेट बॉडी है, कोई कोर्ट नहीं। उन्होंने कहाकि चूंकि किसी कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया है, ऐसे में डॉक्टर की पहली शादी मान्य रहेगी हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने कहाकि डॉक्टर द्वारा दूसरा विवाह कर लेने से पत्नी को काफी ज्यादा भावनात्मक तकलीफ पहुंची है। यह एक तरह की क्रूरता है। जज ने कहाकि अगर कोई हिंदू, ईसाई, पारसी या यहूदी पहली शादी के वैध रहते हुए दूसरी शादी करता है तो इसे क्रूरता माना जाता है। निश्चित तौर पर इसे प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट 2005 के सेक्शन 12 के तहत क्रूरता माना जाता है। जस्टिस स्वामीनाथन ने कहाकि ठीक यही बात मुस्लिमों के ऊपर भी लागू होती है।

मामला साल 2018 का है जब पति द्वारा तीन तलाक देने पर पत्नी कोर्ट चली गई। उसने तिरुनेलवेली ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने कहाकि तीसरा तलाक उसको संबोधित करके नहीं बोला गया था। इसलिए शादी अभी भी मान्य है। उसके पति ने उसी साल दूसरी शादी कर ली थी। साल 2021 में मजिस्ट्रेट ने पहली पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया। साथ ही पति से कहाकि वह अपनी पत्नी को मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपए दे। इसके अलावा नाबालिग बच्चों की देख-रेख के लिए हर महीने 25 हजार रुपए देने का भी फैसला सुनाया। बाद में पति मामले को लेकर सेशन कोर्ट में पहुंचा था, लेकिन वहां उसकी अपील खारिज हो गई।

हमारी आखरी उम्मीद हम खुद हैं,और जब तक हम हैं उम्मीद कायम है......
21/10/2024

हमारी आखरी उम्मीद हम खुद हैं,
और जब तक हम हैं उम्मीद कायम है......

17/10/2024


17/10/2024


Put the power in thoughts not in voice. Because the crop is from the rain not from the flood. Dr. Bhimrao Ambedkar.........
15/10/2024

Put the power in thoughts not in voice. Because the crop is from the rain not from the flood. Dr. Bhimrao Ambedkar.......

laylawyer

हाईकोर्ट की टिप्पणी: नौ साल के वैवाहिक जीवन में बिगड़े रिश्ते की वजह दहेज नहीं, दहेज उत्पीड़न का मुकदमा रद्दयह टिप्पणी न...
26/09/2024

हाईकोर्ट की टिप्पणी: नौ साल के वैवाहिक जीवन में बिगड़े रिश्ते की वजह दहेज नहीं, दहेज उत्पीड़न का मुकदमा रद्द

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की अदालत ने सुल्तानपुर निवासी नवीन कुमार वर्मा और उनके माता-पिता के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को रद्द करते हुए की। ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर सभी को बतौर आरोपी तलब किया था। इसके खिलाफ आरोपी ससुरालीजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सास-ससुर को विदेश यात्रा कराने वाले दामाद के खिलाफ दर्ज दहेज की मांग का मुकदमा सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कल्पना की किसी भी सीमा तक विचार किया जाए तो भी यह मामला दहेज उत्पीड़न की मनगढ़ंत कहानी के अलावा कुछ नहीं है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की अदालत ने सुल्तानपुर निवासी नवीन कुमार वर्मा और उनके माता-पिता के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को रद्द करते हुए की। ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर सभी को बतौर आरोपी तलब किया था। इसके खिलाफ आरोपी ससुरालीजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मामला प्रयागराज जिले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है। नवीन और किरन की शादी 2007 में हुई थी। इसके बाद दोनों अमेरिका चले गए। वहीं उन्हें दो बच्चे भी हुए। 2014 में दोनों भारत आए और नोएडा में संयुक्त नाम से दो फ्लैट खरीद कर वहीं रहने लगे। नवीन के माता-पिता भी वहीं चले गए।

इसी दौरान नवीन की पुरानी महिला मित्र से मोबाइल पर बातचीत शुरू हो गई। आपत्ति करने पर भी नवीन नहीं माना तो पत्नी दो बच्चों संग प्रयागराज स्थित मायके आ गई। 2017 में किरन ने पति नवीन, उनके पिता इंद्रदेव वर्मा, मां अनारकली व पति की महिला मित्र के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया। कहा कि पति दहेज में एसयूवी कार की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा जिला अदालत में भरण पोषण का मुकदमा भी दायर किया था। बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत नवीन अभी लखनऊ में तैनात हैं।

पति के वकील ने दी दलील... सास-ससुर को कराई अमेरिका की सैर

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमेंदिए गए फैसले का समाज और प्रशासनिक व्यवस्थाओं ...
23/09/2024

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें

दिए गए फैसले का समाज और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर व्यापक असर पड़ता है. कई बार ऐसे मामले भी सामने आ जाते हैं, जिनका व्यापक हित से ज्यादा सरोकार नहीं होता है.

सुप्रीम कोर्ट यदि न्याय की अंतिम दहलीज है तो फालतू और बेमतलब की याचिका दाखिल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाती है. शीर्ष अदालत में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ इतनी नाराज हुई कि याचिकाकर्ता के खिलाफ ही बड़ा आदेश दे दिया. कोर्ट ने याची से कहा कि आपने समय की बर्बादी की है, ऐसे में आप पर जुर्माना लगाया जाता है. यह कहते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 120,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने एक अपील को कानूनी दुस्साहस करार देते हुए गुरुवार को अपीलकर्ता पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और कहा कि इस मामले के कारण मद्रास हाईकोर्ट का कीमती न्यायिक समय बर्बाद हुआ. इससे लाखों लोगों की याचिका पर सुनवाई हो सकती थी और उनकी न्याय की मांग पर विचार किया जा सकता था. सुप्रीम कोर्ट लोन और उससे उपजे विवाद को लेकर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बी. गोवर्धन द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाया जुर्माना

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के फैसले को खारिज करते हुए अपीलकर्ता गोवर्धन द्वारा मुकदमे को आगे बढ़ाने और न्यायिक समय बर्बाद करने की आलोचना की. पीठ के लिए निर्णय लिखने वाले जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, 'काश चीजें उतनी ही सरल होतीं जितनी कि वे दिखती हैं. हालांकि, इस तरह के कानूनी दुस्साहस के कारण हाईकोर्ट का कीमती न्यायिक समय बर्बाद हुआ, जिसे लाखों लोगों द्वारा उठाए गए न्याय की गुहार के निर्धारण में बेहतर तरीके से खर्च किया जा सकता था. इसलिए हम अपीलकर्ता पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हैं.' निर्णय में कहा गया है कि जुर्माना छह सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा किया जाना चाहिए.

जस्टिस हिमा की विदाई पर भावुक हुए CJI, महिलाओं केअधिकारों को लेकर जमकर की तारीफ Justice Hima Kohli Retirement वरिष्ठ महि...
20/09/2024

जस्टिस हिमा की विदाई पर भावुक हुए CJI, महिलाओं के
अधिकारों को लेकर जमकर की तारीफ Justice Hima Kohli Retirement वरिष्ठ महिला जज हिमा कोहली आज यानी शुक्रवार को

रिटायर हो गईं। कार्यकाल के आखिरी कार्य दिवस पर वह चीफ जस्टिस डीवाइ चंद्रचूड़ के साथ बेंच पर बैठीं। उनकी विदाई के दौरान सीजेआई भावुक हुए और उनके साथ बेंच शेयर करने को अत्यंत खुशी का पल बताया। चीफ जस्टिस ने इस दौरान जस्टिस हिमा कोहली की जमकर तारीफ भी की।

आखिरी कार्य दिवस पर सीजेआई चंद्रचूड़ के साथ एक बेंच पर बैंठी वरिष्ठ महिला जज।

सर्वोच्च अदालत में अब केवल दो महिला जज जस्टिस बीवी नागरत्ना व बेला एम. त्रिवेदी।

पीटीआई, नई दिल्ली। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सेवानिवृत्त हो रही वरिष्ठ महिला जज की प्रशंसा करते हुए कहा कि जस्टिस हिमा कोहली महिलाओं के अधिकार की हिमायती रही हैं और हमेशा इसके लिए वह सजग रही हैं। जस्टिस हिमा कोहली एक सितंबर को रिटायर हो रही हैं और उनके कार्यकाल का शुक्रवार को आखिरी कार्य दिवस था और इस मौके पर वह चीफ जस्टिस के साथ बेंच में बैठीं।

जस्टिस हिमा कोहली शुक्रवार को चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ के साथ बेंच में बैठी थी। अपने कार्यकाल के आखिरी कार्य दिवस पर जस्टिस परंपरात तौर पर चीफ जस्टिस के साथ बेंच में बैठते हैं। जस्टिस कोहली वरिष्ठता के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में नौवें क्रम में थीं। दिल्ली में 2 सितंबर, 1959 को जन्मी जस्टिस कोहली ने नई दिल्ली के सेंट थामस से स्कूली शिक्षा और सेंट स्टीफन कालेज से इतिहास में स्नातक किया था।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से की लॉ की पढ़ाई उन्होंने परास्नातक इतिहास से किया और 1984 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया। जस्टिस हिमा कोहली की सेवानिवृत्ति के बाद सर्वोच्च अदालत में केवल दो महिला जज जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी बचेंगी। वह दिल्ली हाईकोर्ट से एनडीएमसी की लीगल एडवाइजर वर्ष 1999 से 2004 तक रही थीं।

चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने बेंच में साथ में बैठी जस्टिस हिमा कोहली के बारे में कहा कि यह उनके लिए अत्यंत खुशी का पल है कि वह बेंच शेयर कर रही हैं। जस्टिस कोहली के साथ तमाम गंभीर विषयों पर विचारों के आदान प्रदान का भी चीफ जस्टिस ने जिक्र किया और कहा कि कई मौके पर उनके सपोर्ट को भी उन्होंने याद किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि हिमा कोहली न सिर्फ महिला जस्टिस हैं, बल्कि वह महिलाओं के अधिकारों की प्रखर रक्षक हैं।

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