Alhaj shahnawaz

Alhaj shahnawaz MILAN CLOTH STORE BAREILLY

30/11/2016

नई दिल्‍ली। नोटबंदी के चलते धार्मिक यात्राएं भी प्रभावित हो रही हैं। छोटे नोट और बड़े नए नोट न होने की वजह से जायरीन उमराह करने के लिए मक्‍का नहीं जा पा रहे। आठ नवम्‍बर के बाद से मक्‍का जाने वाले सभी ग्रुप या तो रोक दिए गए हैं या फिर कैंसिल कर दिए गए हैं। इसके चलते जायरीन मायूस हैं। वहीं टूर एंड ट्रैवल एजेंसियों का मानना है कि अभी कुछ नहीं पता कि हालात कब तक ठीक होंगे। हमारा तो यह सीजन ही खराब हो गया।

मौसम और अपने जरूरी इंतजाम को देखते हुए भारत से बहुत सारे लोग इस दौरान उमराह करने के लिए मक्‍का जाते हैं। उमराह करने के लिए जाने का कोई भी वक्‍त निश्‍चित नहीं है। लखनऊ स्‍थित मिर्जा टूर एण्‍ड ट्रैवल्‍स के मालिक मिर्जा मोहम्‍मद हलीम बताते हैं कि पिछले वर्ष दिसंबर में सीजन शुरू हुआ था, जो जनवरी और फरवरी तक चला था। इस बार नवंबर में ही सीजन शुरू हो गया था। लेकिन अफसोस कि सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ने लगे। 9 नवम्‍बर से नोटबंदी के चलते सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। एयरलाइंस के साथ हर साल जो तैयारी रहती है उसमें भी हमें घाटा उठाना पड़ा।

दिसंबर से तो हमारे 100-100 लोगों के ग्रुप जाने वाले थे, लेकिन नोटबंदी के चलते लोगों ने कैंसिल करा लिया है। कुछ हैं जिन्‍हें उम्‍मीद है कि जल्‍द ही हालात ठीक होंगे तो उन्‍होंने दिसंबर-जनवरी की तारीख ले ली है। आगरा के टूर ऑपरेटर मौलाना कलीमउद्दीन बताते हैं कि उमराह के दौरान कम से कम 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है। रहने-खाने का इंतजाम तो टूर ऑपरेटर ही करा देते हैं। इसके अलावा भी हर किसी का आठ से दस हजार रुपये खर्च हो जाता है।

इसमें चाय-पानी से लेकर लोकल आने-जाने का किराया और अपने देश में लाने के लिए खजूर और आब-ए-जमजम सहित दूसरी धार्मिक चीजें भी खरीदनी होती हैं। अलीगढ़ में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले आसिफ अली की मानें तो देशभर से हर महीने 80 हजार से लेकर एक लाख तक जायरीन उमराह के लिए जाते हैं।

आठ नवम्‍बर को पहुंचे थे मक्‍का और नोटबंदी में फंस गए

आठ नवम्‍बर की सुबह आगरा से 26 लोगों का एक ग्रुप मक्‍का के लिए रवाना हुआ था। ग्रुप अपने सही वक्‍त पर रात में मक्‍का पहुंच गया। रात को जाते ही जायरीन अपने होटल में रुक गए। सुबह होटल से बाहर निकले तो पता चला कि चाय पीने के लिए उन्‍हें वहां की करेंसी रियाल चाहिए। जब उन्‍होंने भारतीय नोट बदलने की कोशिश की तो पता चला की रात को भारतीय करेंसी बंद कर दी गई हैं। मनी एक्‍सचेंजर वाले ने भी जायरीनों के भारतीय एक हजार और 500 के नोट बदलने से मना कर दिया। यह सुनते ही जायरीनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

प्रिंटिंग मशीन का कारोबार करने वाले जायरीन इशराक ने बताया कि जायरीन भारतीय दूतावास पहुंचे तो दो दिन लगातार दूतावास बंद मिला। तीसरे दिन खुला तो मिला, लेकिन दूतावास अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। उन्‍होंने कहा कि हम कोई आरबीआई नहीं हैं जो नोट बदलें। इशराक बताते हैं कि इस दौरान इंदौर के एक युवक ने वहां हम लोगों की छोटे नोट से बड़ी मदद की। तब कहीं जाकर हमने उमराह किया और अपने देश वापस लौटकर आए।

21/04/2016

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