D B D N

D B D N BOOK STORE:- Since 1953

यह फर्म 1953 से लगातार नगर के विधार्थियों की शिक्षा, नगर की संस्थाओ तथा जनता की शेक्षिक आवश्कताओं को पूरा करने में अपना योगदान देती आ रही है, फर्म का आरम्भ श्री बाँके बिहारीलाल मेहरोत्रा (पूर्ब अध्यापक जे0पी0एन0 इन्टर कॉलेज नवाबगंज बरेली) ने किया था सन1953 से 1956 तक फर्म का संचालन श्री मुरली लाल सब्बरवाल जी ने किया तथा सन 1956 से श्री राधेलाल गुप्ता जी(शिष्य श्री बाँके बिहारी लाल मेहरोत्रा जी)ने

किया, इस अबधि मे फर्म का नाम राधेलाल दिनेश कुमार बुकसेलर था, 08 फरबरी 1973 को श्री बाँकेलाल जी की मृत्यु के बाद फर्म का संचालन उनके पुत्र श्री दिनेश मेहरोत्रा व तरुण मेहरोत्रा ने किया इस अबधि मे फर्म का नाम दिनेश कुमार तरुण कुमार बुकसेलर हुआ, सन 1990 को श्री तरुण मेहरोत्रा जी ने नई फर्म मेहरोत्रा ब्यूटी पैलेस का आरम्भ किया इस कारण पुरानी फर्म का कार्य श्री दिनेश मेहरोत्रा अकेले ही सम्हालने लगे तब से फर्म का नाम दिनेश बुक डिपो हुआ जो आज भी आपकी सेवा में कार्यरत है।
आपका
मयंक मेहरोत्रा
पुत्र श्री दिनेश मेहरोत्रा
दिनेश बुक डिपो
नवाबगंज बरेली

22/06/2023
(पचासवीं पुण्यतिथि) आज है उन महान पुण्यात्मा स्वर्गीय श्री बाँके बिहारीलाल मेहरोत्रा जी (पूर्व अध्यापक जे० पी० एन० इंटर ...
08/02/2023

(पचासवीं पुण्यतिथि)
आज है उन महान पुण्यात्मा
स्वर्गीय श्री बाँके बिहारीलाल मेहरोत्रा जी
(पूर्व अध्यापक जे० पी० एन० इंटर कॉलेज एवं संस्थापक दिनेश बुक डिपो नवाबगंज बरेली) की
पचासवीं पुण्यतिथि
जो कभी भी हार नहीं मानते थे
चाहे कोई भी रही हो परिस्थिति
ऐसे निर्भीक व्यक्तित्व के धनी की पुण्यतिथि पर शत शत नमन

ईश्वर, माता-पिता व आप सभी के आशीर्वाद से आज एक नई शुरुआत
09/10/2021

ईश्वर, माता-पिता व आप सभी के आशीर्वाद से आज एक नई शुरुआत

दीवाली पूजन के लिए शुद्ध मिट्टी की सुंदर मुर्तियां उपलब्ध हैं दिनेश बुक डिपो तहसील चौराहा नवाबगंज, बरेली
07/11/2020

दीवाली पूजन के लिए शुद्ध मिट्टी की सुंदर मुर्तियां उपलब्ध हैं
दिनेश बुक डिपो
तहसील चौराहा नवाबगंज, बरेली

आपको एवं आपके परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाएं
09/03/2020

आपको एवं आपके परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाएं

आपको एवं आपके परिवार को नए साल की बहुत बहुत शुभकामनाएं
01/01/2020

आपको एवं आपके परिवार को नए साल की बहुत बहुत शुभकामनाएं

विद्या प्रकाशन की सम्पर्क यात्रा
18/08/2019

विद्या प्रकाशन की सम्पर्क यात्रा

आगे सफर था और पीछे हमसफर था..रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी....
05/01/2017

आगे सफर था और पीछे हमसफर था..

रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...

मुद्दत का सफर भी था और बरसो
का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!

"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ......

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।

बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली...
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!

हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...

कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...
पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।

Address

Dinesh Book Depot Nawabganj
Bareilly
262406

Opening Hours

Monday 8am - 8pm
Tuesday 8am - 8pm
Wednesday 8am - 8pm
Thursday 8am - 8pm
Friday 8am - 8pm
Saturday 8am - 8pm
Sunday 8am - 8pm

Telephone

+919410666688

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when D B D N posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to D B D N:

Share