23/07/2025
रूठे से है अल्फ़ाज़ मेरे आज कल
कलम चलती नहीं मोहब्बत में शिकायत की कोई अर्जी नहीं
खुदगर्ज है इश्क मेरा अपनी सहूलियत से चलता है जब जी चाहे बुला ले जब जी चाहे चुप करा लेता है
यहां न तो वक्त है न ही कोई अर्जी है
वो इश्क है मेरा और उसी की मर्जी है।
रूठे हुए अल्फाजों से न दर्द बयां होगा अब तो बस अश्क बहेंगे और दिल तबाह होगा।।।