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हमारे साथ जुडे और पढ़े हर रोज़ नई कहनी और पुस्तकों को आपना मित्र बनाए ।। हम आपको मुफ़्त में ऑफलाइन बुक दे रहे हैं सात दि...
22/12/2021

हमारे साथ जुडे और पढ़े हर रोज़ नई कहनी और पुस्तकों को आपना मित्र बनाए ।। हम आपको मुफ़्त में ऑफलाइन बुक दे रहे हैं सात दिनों के लिऐ ।।🕉️🕉️☺️☺️🙏

मैं अपने ऑफिस में था। मैं उन तस्वीरों को देख रहा था। जिन्हें पुनर्मिलन के दौरान एमपी ने खींचा था। उसने हम लोगों को इमेल किया था और जब मैं उनको याहू के अपने इनबॉक्स में देख रहा था तब मैंने गौर किया कि ऊपर बाएँ कोने में कुछ संकेत आ रहा था।

वह शादी-विवाह की साइट शादी.कॉम का विज्ञापन था जिसमें अपने लिए उपयुक्त वर की तलाश में एक खूबसूरत लड़की मुस्कुरा रही थी। मुझे दोस्तों के साथ हुई बातचीत की याद हो आई। मैंने उस विज्ञापन के लिंक को क्लिक किया जो मुझे उसकी वेबसाइट पर ले गया। मैंने सर्च का विकल्प दबाया और कुछ ही समय में परिणाम मेरे सामने था । चुनाव के लिए बहुत सारी लड़कियाँ थीं वहाँ।उनमें से कुछ तो बहुत ही सुंदर दिखाई दे रही थीं और मैं सबको चेक करना चाहता था। लेकिन इससे पहले कि मैं छठी लड़की का प्रोफाइल देखता, मुझे यह संदेश मिला कि मुझे वेबसाइट के साथ अपने को रजिस्टर्ड करवा लेना चाहिए, क्योंकि उससे बिना मैं और प्रोफाइल नहीं देख सकता। ट्रेलर खत्म हो चुका था और पूरी फिल्म देखने के लिए आपको पहले अपने आपको पंजीकृत करवाना था।

‘उस दिन मेरे पास अधिक काम नहीं था इसलिए मैंने सोचा कि मुझे उस वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बना ही लेना चाहिए।’ हैप्पी, अमरदीप और एमपी से मैं यही कहता हूँ जबकि बात इसकी उल्टी थी उसका उल्टा। वेबसाइट पर उन सुंदर चेहरों ने मुझे मजबूर कर दिया कि मैं अपनी व्यस्तताओं के बीच से उसके लिए समय निकालूँ, जबकि अगले ही दिन मुझे एक व्यक्ति को प्रोजेक्ट देनाकिसी ने सही ही कहा है, तीन चीजें-धन, औरत और…(मैं अक्सर तीसरी चीज़ के बारे में भूल जाता हूँ)…दुनिया में कुछ भी संभव करवा सकते हैं। आखिरकार, मेरी प्रोफाइल वेबसाइट पर आ गयी । मैंने अपना एक अच्छा-सा फोटोग्राफ लगाया और ऐसी सभी बाधाओं को क्लिक करके दूर कर दिया जो मुझे ढूँढ़ने वाली लड़की से मेरा अता-पता छुपाने के लिए कहती हों।

मैं इस बात का उल्लेख करना भी नहीं भूला कि मैं अपने काम के सिलसिले में अमेरिका और यूरोप जा चुका हूँ। करीब घंटे भर बाद मैं उन प्यारे चेहरों को देखने के लिए पूरी तरह लैस हो चुका था। मैंने वेबसाइट पर सभी पंजाबी लड़कियों का विकल्प चुना और ‘सर्च’ के बटन को क्लिक कर दिया

आज हम आपको हिंदी की एक ऐसी किताब के बारें में बताएँगे जिसे पढ़कर आपको सरकारी नौकरी खासकर करके यूपीएससी की तैयारी करने के ...
21/12/2021

आज हम आपको हिंदी की एक ऐसी किताब के बारें में बताएँगे जिसे पढ़कर आपको सरकारी नौकरी खासकर करके यूपीएससी की तैयारी करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। यह किताब एक नॉवेल की विधा में है।संतोष का ग्रेज्युएशन खत्म हुआ तो उसने आई ए एस की तैयारी करने का फैसला किया। संतोस का बैकग्राउंड ऐसा था कहा जाता था कि डॉक्टर, इंजीनियर बनकर आप अपना करियर बना सकते हैं, लेकिन अगर आपको अपने साथ-साथ अपनी कई और कई पीढ़ियों का करियर बनाना है तो आपको आईएएस बनना होगा। इसी सोच के चलते संतोष भी निकल पड़ा आई एस की तैयारी करने के लिए और उसने इसके लिए आई एस की तैयारी का मक्का कहे जाने वाले मुखर्जी नगर को चुना। दिल्ली का मुखर्जी नगर जहां हर साल कई बच्चे आई ए एस बनने का सपना लेकर आते है और हर साल कई बच्चे इस सपने को अगले साल पूरा करने के लिए रुक जाते हैं। ऐसे में संतोष जब गाँव डुमरी से दिल्ली के लिए चला तो उसकी आँखों मे आई ए एस बनने का सपना तो था लेकिन वो दिल्ली के माहौल से इतना परिचित भी नही था। दिल्ली पहुंचकर कर उसे कैसा लगा? मुखर्जी नगर में उसे किस-किस तरह के लोग मिले? मुखर्जी नगर जहां, हर साल कुछ बच्चों के सपने पूरे होते थे तो कई बच्चे असफल भी होते थे, औए में क्या वो अपना सपना पूरा करने में कामयाब हुआ? नीलोत्पल मृणाल जी का उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो एक छोटे से गाँव से अपने सपने पूरे करने की खातिर एक बड़े शहर में आता है। वो दूसरे लोगों से अलग इसलिए है क्योंकि वो न नौकरी की तलाश में आया है और न ही ग्रेजुएशन करने आया है वो एक कोर्स की तैयारी करने के लिए आया है तो इसके लिए उसे एक विशेष स्थान के आसपास रहना पड़ता है और एक विशेष तरीके की जीवन शैली का अनुसरण करना पड़ता है। इस उपन्यास में चूंकि वो कोर्स आई.ए.एस. है तो इसके लिए मुखर्जी नगर में उपन्यास रचा गया है। संतोष का ग्रेज्युएशन खत्म हुआ तो उसने आई ए एस की तैयारी करने का फैसला किया। संतोस का बैकग्राउंड ऐसा था कहा जाता था कि डॉक्टर, इंजीनियर बनकर आप अपना करियर बना सकते हैं, लेकिन अगर आपको अपने साथ-साथ अपनी कई और कई पीढ़ियों का करियर बनाना है तो आपको आईएएस बनना होगा। इसी सोच के चलते संतोष भी निकल पड़ा आई एस की तैयारी करने के लिए और उसने इसके लिए आई एस की तैयारी का मक्का कहे जाने वाले मुखर्जी नगर को चुना। दिल्ली का मुखर्जी नगर जहां हर साल कई बच्चे आई ए एस बनने का सपना लेकर आते है और हर साल कई बच्चे इस सपने को अगले साल पूरा करने के लिए रुक जाते हैं। ऐसे में संतोष जब गाँव डुमरी से दिल्ली के लिए चला तो उसकी आँखों मे आई ए एस बनने का सपना तो था लेकिन वो दिल्ली के माहौल से इतना परिचित भी नही था। दिल्ली पहुंचकर कर उसे कैसा लगा? मुखर्जी नगर में उसे किस-किस तरह के लोग मिले? मुखर्जी नगर जहां, हर साल कुछ बच्चों के सपने पूरे होते थे तो कई बच्चे असफल भी होते थे, औए में क्या वो अपना सपना पूरा करने में कामयाब हुआ? नीलोत्पल मृणाल जी का उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो एक छोटे से गाँव से अपने सपने पूरे करने की खातिर एक बड़े शहर में आता है। वो दूसरे लोगों से अलग इसलिए है क्योंकि वो न नौकरी की तलाश में आया है और न ही ग्रेजुएशन करने आया है वो एक कोर्स की तैयारी करने के लिए आया है तो इसके लिए उसे एक विशेष स्थान के आसपास रहना पड़ता है और एक विशेष तरीके की जीवन शैली का अनुसरण करना पड़ता है। इस उपन्यास में चूंकि वो कोर्स आई.ए.एस. है तो इसके लिए मुखर्जी नगर में उपन्यास रचा गया है।

अपने पिछले उपन्यास डार्क हॉर्स में लेखक नीलोत्पल मृणाल ने दिल्ली में रहकर सिविल सर्विसेस की तैयारी करनेवाले हिंदी पट्टी ...
20/12/2021

अपने पिछले उपन्यास डार्क हॉर्स में लेखक नीलोत्पल मृणाल ने दिल्ली में रहकर सिविल सर्विसेस की तैयारी करनेवाले हिंदी पट्टी के ‌लड़कों के संघर्ष की रटी-रटाई कहानी बयां करने के बावजूद अपने ट्रीटमेंट से बता दिया था कि वे किस कैलिबर के लेखक हैं. अपने नए उपन्यास औघड़ में उन्होंने उसी कैलिबर का भरपूर प्रदर्शन किया है. यहां वे चीज़ों को केवल देखते ही नहीं, बल्कि उनकी बड़ी बारीक़ी से समीक्षा भी करते चलते हैं. अपनी राय ज़ाहिर करते हैं, पर साथ ही साथ तटस्थ बने रहने में भी क़ामयाब होते हैं. भारतीय समाज, राजनीति और जीवनदर्शन के एक-दूसरे में गुत्थम-गुत्था पक्षों को उन्होंने बड़ी ही नफ़ासत से परिचित कराया है, उपन्यास औघड़ में.
लेखक हमें हिंदी पट्टी के गांवों में ले चलते हैं. वह दौर है तब का, जब हर किसी के हाथों में मोबाइल आना शुरू ही हुआ था. संचार क्रांति लोगों को पास लाने का दावा कर रही थी. गांव के हरिजन टोले में एक मंदिर बन रहा है. उससे गांव के सम्मानित रहिवासियों में अजीब बेचैनी है. इस बेचैनी को बयां करते हुए ‌लेखक ने भारतीय समाज के उस चेहरे को बेनक़ाब किया है, जो ख़ुद को आधुनिक मानता है, पर भयंकर पूर्वाग्रहों से ग्रस्त‌ है. उपन्यास में हर जाति के किरदार हैं, उनकी कहानियां हैं. इन सभी किरदारों के बीच है जाति विहीन बिरंची, जो सामंतवाद की दीवार को अपनी पेशाब के नमक से गिराना चाहता है. उसकी हर बात को सीरियसली लेता लखन लोहार और गांव में बड़ा नाम बनता जा रहा पबित्तर दास उसके साथी हैं. उसी गांव में रहते हैं पुराने घाघ पुरुषोत्तम सिंह, जो बेटे फूंकन सिंह को बदलती दुनिया की समझ देते नज़र आते हैं.
उपन्यास में मुख्य कहानी के साथ-साथ कई और कहानियां चलती हैं. गणेशी महतो और उनके बेटे रोहित की कहानी गांव की उस दशा को बयां करती है, जहां किसान नहीं चाहता कि उसका बेटा खेती-बाड़ी के चक्कर में फंसे. उसकी छाती इस बात से ही फूल जाती है कि उसका बेटा ऊंची जाति के बड़े लोगों के बीच उठने-बैठने लगा है. मुरारी साव, जगदीश यादव, बैजनाथ मंडल, बैरागी पांडेय, लड्डमन मियां, बदरी मिसिर, दरोगा पारसनाथ पासवान, गांव का झोला छाप डॉक्टर बालेंदु घोष, लटकू भंडारी, आंगनवाड़ी सेविका मधु, काशी साह, शिक्षक कामता प्रसाद और दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में पढ़नेवाला उनका नया-नया वामपंथी बेटा शेखर जैसे तमाम किरदारों की मुख्य कहानी में भागीदारी के अलावा अपनी-अपनी विसंगतियों से भरी कहानियां भी हैं. हर किसी का चेहरा बेनक़ाब है, पर सामनेवाला उसपर ज़बर्दस्ती संस्कारों के नक़ाब ओढ़ाने की असफल कोशिश करता है.

Vyakti Dukhee K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Khush Kyon Hota Hai? Ek Vyakti Sukhee Aur Samrddh Kyon Hota Hai, Jabaki Doo...
19/12/2021

Vyakti Dukhee K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Khush Kyon Hota Hai? Ek Vyakti Sukhee Aur Samrddh Kyon Hota Hai, Jabaki Doosara Gareeb Aur Dukhee K‍yon Hota Hai? Ek Vyakti Bhayabheet Aur Tanaavagrast K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Aasthaavaan Tatha Aatmavishvaasee K‍yon Hota Hai? Ek Vyakti Ke Paas Sundar, Aaleeshaan Bangala K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Jhompadapattee Mein K‍yon Rahata Hai? Ek Vyakti Bahut Saphal K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Buree Tarah Asaphal Kyon Hota Hai? Ek Vakta Utkrsht Or Asaadhaaran Roop Se Lokapriy K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Ausat Aur Alokapriy K‍yon Hota Hai? Ek Vyakti Apane Kaam Ya Peshe Mein Jeeniyas K‍yon Hota Hai, Jabaki Doosara Zindagee Bhar Medanat Karane Ke Baavajood Kuchh Haasil K‍yon Nahin Kar Paata?

ज्ञान योग ज्ञान और स्वं का जानकारी प्राप्त करने को कहते है। ये अपनी और अपने परिवेश को अनुभव करने के माध्यम से समझना है। ...
18/12/2021

ज्ञान योग ज्ञान और स्वं का जानकारी प्राप्त करने को कहते है। ये अपनी और अपने परिवेश को अनुभव करने के माध्यम से समझना है। स्वामी विवेकानन्द के ज्ञानयोग सम्बन्धित व्याख्यान, उपदेशों तथा लेखों को लिपिबद्ध कर 'ज्ञानयोग' पुस्तक में संकलित किया है। ज्ञान के माध्यम से ईश्वरीय स्वरूप का ज्ञान, वास्तविक सत्य का ज्ञान ही ज्ञानयोग का लक्ष्य है। स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित ज्ञानयोग वेदांत के अंतर्गत सत्यों को बताकर वेदांत के सार रूप में प्रस्तुत है।

एक रूप में ज्ञानयोगी व्यक्ति ज्ञान द्वारा ईश्वरप्राप्ति मार्ग में प्रेरित होता है। स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित ज्ञानयोग में मायावाद,मनुष्य का यथार्थ व प्रकृत स्वरूप,माया और मुक्ति,ब्रह्म और जगत,अंतर्जगत,बहिर्जगत,बहुतत्व में एकत्व,ब्रह्म दर्शन,आत्मा का मुक्त स्वभाव आदि नामों से उनके द्वारा दिये भाषणों का संकलन है।

अब यदि विश्लेषण किया जाये तो वास्तव में ज्ञान योगी मायावाद के असल तत्व को जानकर,अपनी वास्तविकता और वेदांत के अद्वैत मत के अनुरूप आत्मा के वास्तविक स्वरूप को जानकर मुक्ति प्राप्त करता है।

18/12/2021

We want to take your attention in our offline library where you can read any book novel peotry in rent .
In occasion of our start up we'll provide all of you any book absolutely free for a week .
#बाबाजागेश्वर

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18/12/2021

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