26/01/2024
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*गुरुपुष्य योग 25 जनवरी विशेष*
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महात्म्य एवं सौभाग्य वृद्धि के विशिष्ट उपाय
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सभी नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह शुभ मुहूर्त खरीददारी के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार गुरुपुष्य नक्षत्र 25 जनवरी को है। साथ ही इस दिन पौष पूर्णिमा भी है। पुष्य नक्षत्र के दिन किए गए हर कार्य का उत्तम फल प्राप्त होता है।
क्या है गुरु पुष्य योग
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु पुष्य योग के देवता बृहस्पति, एवं स्वामी ग्रह शनि है, इसकी राशि कर्क 03।20 से 16 । 40 अंश तक मान्य है। भारतीय खगोल मे यह 8 वां लघु संज्ञक नक्षत्र है। इसके तीन तारे है। ये तारे एक सीध मे तीर का आकार प्रदिर्शित करते है। इसे तिष्य या देव नक्षत्र भी कहते है। पुष्य का अर्थ पौषक है। 27 नक्षत्रो मे सबसे प्यारा नक्षत्र माना जाता है। यह शुभ सात्विक पुरुष नक्षत्र है। इसकी जाति क्षत्रिय, योनि छाग, योनि वैर वानर, गण देव, आदि नाड़ी है। यह पूर्व दिशा का स्वामी है।
बृहस्पति / गुरु इसके देवता माने जाते है। ये सुरो (देवो) के आचार्य है। शिव-शंकर की कृपा से इन्हे ग्रहो मे गुरु का स्थान मिला है। ये इन्द्र के उपदेशक अर्थात सलाहकार है। शिव पुराण अनुसार महर्षि अंगिरस और सरूपा के पुत्र है। इनकी तीन पत्निया तारा, ममता, शुभ है। इनका रंग पीला तथा वस्त्र पीले है। ये दीर्घायु, वंशज, न्याय प्रदाता है। ये ईश्वर दिशा यानि उत्तर-पूर्व कोण ईशान के स्वामी है।
पुष्य नक्षत्र विवाह मे सर्वदा वर्जित है। क्योकि ब्रह्मा जी ने अपनी पुत्री शारदा का विवाह गुरु पुष्य मे करने का निश्चय किया । किन्तु उसके रूप, सौन्दर्य पर स्वंयम मोहित हो गये, इस पशुता के कारण ब्रम्हा जी ने इस योग को शाप देकर विवाह से वर्जित कर दिया। इसलिये गुरु पुष्य मे विवाह नही होते।
गुरु पुष्य योग की विशेषताएं
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इसमे दोनो ग्रह गुरु और शनि का प्रभाव है। इसमे सभी प्रकार की पूजा, प्रार्थना, साधना सफल होती है। यह आध्यात्मिक परिपक्वता, माता का दूध, नकारात्मकता से सकारात्मकता का कारक है। इसमे उत्पन्न जातक कभी-कभी हठी, स्वार्थी, दुराग्राही होता है। इस नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ माना जाता है। यदि रविवार या गुरव