02/09/2025
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सक्रिय बाइबल अध्ययन की तैयारी
आप बाइबल अध्ययन में बस यूँ ही नहीं कूद सकते। अच्छे बाइबल अध्ययन के लिए तैयारी आवश्यक है। यहाँ चार बातें दी गई हैं जो आपके अध्ययन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
1. अपने बाइबल अध्ययन का समय निर्धारित करें।हर सप्ताह बाइबल अध्ययन करने के लिए एक निश्चित समय अलग रखें। तय करें कि आप बाइबल अध्ययन में कितना समय लगाना चाहते हैं। न तो ज़रूरत से ज़्यादा करें और न ही खुद को कम समय दें। अगर आप अपने साप्ताहिक कार्यक्रम में अध्ययन को शामिल नहीं करते, तो आप कभी उसके लिए समय नहीं निकाल पाएँगे, या फिर यह बिखरा हुआ और ऊपरी - ऊपरी बाइबल अध्ययन बना रहेगा। आपको बाइबल अध्ययन के लिए समय निकलना ही होगा।
📖 आपको बाइबल का अध्ययन कितनी बार करना चाहिए? यह तय करना व्यक्ति दर व्यक्ति अलग - अलग हो सकता है, लेकिन एक महत्वपूर्ण बात याद रखनी चाहिए। आपके शांत समय (Quiet Time) और बाइबल अध्ययन समय में फर्क है।आपको हर दिन शांत समय रखना चाहिए। यह आमतौर पर एक छोटा भक्ति-काल होता है (10–30 मिनट) जिसमें आप बाइबल पढ़ते हैं, कुछ देर उस पर मनन करते हैं, और प्रार्थना करते हैं। आपके शांत समय का उद्देश्य प्रभु यीशु मसीह के साथ संगति करना है। आपको शांत समय में गहराई से बाइबल अध्ययन करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वास्तव में, उस भक्ति-काल में गंभीर अध्ययन करना आपके शांत समय को जल्दी ही समाप्त कर देगा। वहाँ बस परमेश्वर की उपस्थिति का आनंद लें और उसके साथ संगति करें। जहाँ हर दिन का 10 मिनट का शांत समय सप्ताह में एक बार के एक घंटे से बेहतर है, वहीं बाइबल अध्ययन में स्थिति बिल्कुल उलटी है। आप छोटे-छोटे हिस्सों में बाइबल को प्रभावी ढंग से नहीं पढ़ सकते। बेहतर है कि आप लम्बा समय (दो से चार घंटे) अलग रखें, बजाय इसके कि रोज़ थोड़ा-थोड़ा करें। और फिर जैसे-जैसे आप बाइबल अध्ययन में कुशल होते जाएँगे, आप इसमें और अधिक समय दे पाएँगे।
हमें स्वयं को अनुशासित करना होगा और बाइबल अध्ययन के लिए निश्चित समय निकालना होगा, और किसी भी चीज़ को उसके बीच में नहीं आने देना चाहिए।
आपको बाइबल का अध्ययन तब करना चाहिए जब आप शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हों। इसलिए आपको वह समय चुनना चाहिए जब आप सबसे अधिक सतर्क हों। आपको कभी भी उस समय बाइबल का अध्ययन नहीं करना चाहिए जब आप थके हुए हों। कोशिश कीजिए कि आप तब पढ़ें जब आप पूरी तरह आराम पाए हुए हों।
2. एक कॉपी/डायरी रखें। जैसा कि पहले ही कहा गया है, आप बिना लिखे बाइबल का अध्ययन नहीं कर सकते। जो बातें आप ध्यान से देखते हैं, उन्हें लिखना ज़रूरी है।
3. सही साधन प्राप्त करें। प्रत्येक अध्ययन पद्धति के साथ कुछ संदर्भ साधनों (reference tools) की सूची जिनकी आपको अध्ययन के लिए आवश्यकता होगी।आपको इन संदर्भ साधनों में निवेश करने और एक छोटा-सा व्यक्तिगत संदर्भ पुस्तकालय तैयार करने पर विचार करना चाहिए। यह एक ऐसा निवेश होगा जिसका उपयोग आप अपने पूरे जीवन में कर पाएँगे।
4. प्रत्येक अध्ययन से पहले प्रार्थना में थोड़ा समय बिताएँ। सबसे पहले, प्रभु से प्रार्थना करें कि वह आपके जीवन को सभी ज्ञात पापों से शुद्ध करे और आपको पवित्र आत्मा से भर दे, ताकि आप अध्ययन के दौरान उसके साथ संगति में रहें। पाठ्यपुस्तक की तुलना में बाइबल का अध्ययन करने का यही लाभ है की आपका स्वयं लेखक के साथ सीधा संवाद होता है। आपको न केवल प्रकाशन का, बल्कि प्रकटकर्ता का भी अध्ययन करने का विशेषअधिकार प्राप्त है। इसलिए, उसके वचन का अध्ययन करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप मसीह के साथ संगति में हैं।
प्रभु के वचन को समझने और उस पर अमल करने के लिए आपको उनके साथ संगति में रहना होगा किसी ने कहा है, "हमें शास्त्रों की खोज करने से पहले हमें अपने हृदय की जाँच करनी चाहिए।" हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा जीवन परमेश्वर के साथ सही है?, इससे पहले कि हम उनके वचन में गहराई से उतरें।
✝️🙏 प्रार्थना करें कि पवित्र आत्मा आपके अध्ययन में आपका मार्गदर्शन करे। बाइबल को समझने का सबसे अच्छा तरीका है इसके लेखक से बात करना। भजन संहिता 119:18 को याद करें और हर अध्ययन से पहले इसका प्रयोग करें: "मेरी आँखें खोल दे कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूँ। परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वह तुम्हारी आँखें अपने वचन के लिए खोले।अंतत, जब तक पवित्र आत्मा परमेश्वर, बाइबल की सच्चाइयों को देखने के लिए आपकी आँखें नहीं खोल देता, तब तक आपका सारा अध्ययन व्यर्थ प्रयास होगा। (1कुरिं. 2:10)।
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