29/05/2025
दिल्ली पुलिस के ASI निर्देश पंवार (38) और ASI राजदीप (35) के लिए ये काम सिर्फ एक ड्यूटी नहीं, बल्कि एक मिशन है — ऐसा मिशन जिसमें हर आंसू सूखता है और हर मां की ममता फिर से मुस्कुराती है।
इन दोनों पुलिसकर्मियों ने पिछले 11 महीनों में 223 लापता बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया। ये बच्चे कहीं से भी हो सकते थे — दिल्ली की गलियों से लेकर जम्मू, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा तक।
कभी सिर्फ एक पुरानी धुंधली फोटो, कभी एक नाम… और कई बार कोई सुराग भी नहीं। लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी। हर सुबह 6 बजे से CCTNS और ZIPNET जैसे नेशनल डाटाबेस स्कैन करना शुरू करते, FIR पढ़ते, केस चुनते, परिवारों से संपर्क करते और उन शहरों तक पहुंच जाते जहां उम्मीद की एक हल्की किरण भी दिखती।
सोशल मीडिया की तस्वीरों में कोई बैकग्राउंड, CCTV में किसी का चेहरा, या फोन का एक लोकेशन पिंग – इन मामूली सुरागों को जोड़ते हुए दोनों ने वो कर दिखाया जो असंभव लगता था।
एक 14 साल की लड़की का केस उन्हें जम्मू तक ले गया — सिर्फ एक ट्रेन बोर्डिंग की जानकारी थी। लेकिन सुबह 7 बजे जब स्टेशन पहुंचे, तो वो लड़की एक बेंच पर अकेली बैठी मिली। उसी दिन माता-पिता से मिलवा दिया।
एक और मामला – 2017 में लापता हुई 15 वर्षीय लड़की को 7 साल बाद सहारनपुर, यूपी से ढूंढ़ निकाला। अब वो 22 साल की है, और परिवार को उम्मीद नहीं थी कि वो कभी लौटेगी।
इन दोनों की मेहनत और संकल्प को देखते हुए इन्हें आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया गया — पहले हेड कांस्टेबल थे, अब ASI बन चुके हैं।
राजदीप ने 112 और पंवार ने 111 बच्चों को बचाया है।
इनकी टीम दिल्ली के 70 से अधिक थानों में काम करती है, और हर केस में एक ही लक्ष्य रहता है — बच्चे को सही-सलामत उसके परिवार तक पहुंचाना।
ASI पंवार कहते हैं:
"बहुत बार ऐसा होता है कि FIR में फोन नंबर बंद मिलते हैं, या परिवार कहीं और शिफ्ट हो चुका होता है। भाषा भी एक चुनौती बनती है। लेकिन जब वो बच्चा फिर मां की गोद में होता है… तो हर थकान मिट जाती है।"
यह सिर्फ बच्चों की वापसी नहीं है, ये भरोसे की वापसी है।
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साभार thebetterindia.com