SHREE BALAJI AROMATICS

SHREE BALAJI AROMATICS Prabhu nikunj Dhoop, Aggarbatti and Havaan samagri

25/05/2022
15/02/2019

सिर्फ कुछ सैनिक शहीद नही हुए।

कई बहने विधवा हो गईं
कई मासूम अनाथ हो गए
कई माओं की गौद सुनी हो गई
कई बजुर्गों के बुढ़ापे की लाठी टूट गई
कई बहनों के भाई छिन गए।

सिर्फ कुछ सैनिक शहीद नही हुए।
कई घरों में मातम पसर गया है आज शहादत प्राप्त करने वाले हरेक योद्धा सहित उनके माता पिता, पत्नी बच्चे सबको झुक झुक कर नमन करता है।
😭😭😭😭
आपकीं शहादत को हमेशां याद रखा जाएगा।
भारत सरकार से विनम्र निवेदन है पाकिस्तान के साथ साथ देश में बैठे हुए गद्दारो पर भी कार्यवाही की जाए ताकि देश में पल रहे सपोलो के फन कुचले जा सके

19/11/2017

*आज का प्रेरक प्रसंग*

एक चाट वाला था । जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर उसको बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती ।

एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।

तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया ।

मेरा सवाल उस चाट वाले से था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से ?

और उसने जो जवाब दिया उसका जबाब को सुन कर मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए।

वो चाट वाला मेरे से कहने लगा आपका किसी बैंक में लॉकर तो होगा.?

मैन कहा हाँ तो उस चाट वाले ने मेरे से कहा की उस लाकर की चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लॉकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास।

आप के पास जो चाबी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य।

जब तक दोनों चाबीयाँ नहीं लगतीं लॉकर का ताला नहीं खुल सकता।

आप कर्मयोगी पुरुष हैं और मैनेजर भगवान।

*अाप को अपनी चाबी भी लगाते रहना चाहिये । पता नहीं ऊपर वाला कब अपनी चाभी लगा दे । कहीं ऐसा न हो कि भगवान अपनी भाग्यवाली चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाबी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये ।*

07/09/2017

"बेटा अपने बूढ़े बाप को यतीमख़ाने छोड़कर वापस जा रहा था तो कि उसकी बीवी ने फ़ोन किया और कहा "अपने बाप को ये भी कह दो कि त्यौहार पर भी घर आने की ज़रूरत नहीं, अब वहीं रहें और हमें सुकून से जीने दें",
बेटा वापस मुड़ा और यतीमख़ाने गया तो देखा कि उसका बाप यतीमख़ाने के मैनेजर के साथ ख़ुश गप्पों में व्यस्त है और वो यूं बैठे थे जैसे बरसों से एक दूसरे को जानते हों।
बेटे ने पूछा "सर, आप मेरे पिता को किस त़रह़ और कब से जानते हैं?
उसने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "जब ये यतीमख़ाने से एक बच्चे को गोद लेने आए थे"👌👌👌

17/08/2017

*हरिवंशराय बच्चनजी की सुन्दर कविता*

अगर बिकी तेरी *दोस्ती*
तो पहले *ख़रीददार* हम होंगे ...

तुझे ख़बर न होगी तेरी *क़ीमत*
पर तुझे पाकर सबसे *अमीर* हम होंगे

दोस्त साथ हो तो रोने में भी *शान* है
दोस्त ना हो तो *महफिल भी श्मशान* है

सारा खेल दोस्ती का है ऐ मेरे *दोस्त*
वरना *जनाजा और बारात* एक ही समान है

🌹🙏 *सारे दोस्तो को समर्पित* 🙏🌹 मुनीश गोयल.

02/08/2017

*परिवार के साथ धैर्य*
*प्यार कहलाता है,*
*औरों के साथ धैर्य*
*सम्मान कहलाता है,*
*स्वयं के साथ धैर्य*
*आत्मविश्वास कहलाता है,*
*और*
*भगवान के साथ धैर्य*
*आस्था कहलाती है!*

*प्यार,सम्मान,आत्मविश्वास और आस्था के साथ दिन शुभ और मंगलमय हो*

29/07/2017

*एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।*

*जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।*

*पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।*

*उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।*

*बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।*

*कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।*

*आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।*

*एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,*

*"तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"*

*बच्चे ने आम के पेड से कहा,*
*"अब मेरी खेलने की उम्र नही है*

*मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"*

*पेड ने कहा,*
*"तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,*
*इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"*

*उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।*
*उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।*

*आम का पेड उसकी राह देखता रहता।*

*एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,*
*"अब मुझे नौकरी मिल गई है,*
*मेरी शादी हो चुकी है,*
*मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"*
*आम के पेड ने कहा,*

*"तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।"*
*उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।*

*आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।*

*कोई उसे देखता भी नहीं था।*
*पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।*

*फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,*
*"शायद आपने मुझे नही पहचाना,*
*मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"*

*आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,*
*"पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"*

*वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,*
*"आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,*
*आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"*

*इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।*

*वो आम का पेड़ हमारे माता-पिता हैं।*
*जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।*
*जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।*
*पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,*
*कोई समस्या खडी हुई।*

*आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।*

*जाकर उनसे लिपटे,*
*उनके गले लग जाये*
*फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।*

कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया शेयर जरूर करें ।

06/07/2017

*चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा रोक दी है*
चीन का कहना है कि जब तक सीमा विवाद नहीं सुलझता तब तक यह यात्रा या फिर हमेशा के लिए यह यात्रा रोकने का उसके पास अधिकार है|
हर हिंदुस्तानी के पास भी चीन के सामान का बहिष्कार करने का अधिकार तो है !
आप सहमत हैं तो आगे भेजें

04/07/2017

बिना युद्ध जीएसटी के द्वारा चीन को पस्त करेगा जीएसटी-
जीएसटी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे चीन के माल के दबाव से तबाह हो रहे छोटे भारतीय व्यापारी तथा बाजार फिर से सशक्त हो जाएंगे. चीन को सीमा पर लड़े बिना हराने का पूर्ण इंतजाम भी जीएसटी से हो रहा है. यह कैसे तथा किस प्रकार होगा इसे ध्यानपूर्वक समझें-
चीन का सस्ता माल देश की अर्थव्यवस्था को जर्जर कर रहा है. पिछले वर्ष दीपावली से देश में चीनी माल के बहिष्कार का आंदोलन भी चलता रहता है, क्योंकि चीनी माल का आयात होने के बावजूद वह घरेलू निर्माण से सस्ता होता है. सरकार ने इस चीनी लूट से बचने के लिए आयातित एवं घरेलू वस्तुओं पर समान कर लगाने की व्यवस्था कर ली है. जीएसटी लागू होने के बाद चीनी माल अब भारतीय माल से सस्ता नहीं होगा अर्थात् चीन का समान अब भारतीय कारोबारियों की कमर नहीं तोड़ सकेगा.
GST लागू ह भारतीय मा
राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया के अनुसार जीएसटी 'मेक इन इंडिया'के लिए भी महत्वपूर्ण है. अब तक एक्साइज ड्यूटी के तहत सीवीडी लगाया जा रहा था. उसके अलावा आयातित वस्तुओं पर सिर्फ 4 प्रतिशत स्पेशल एडिशन ड्यूटी (SAD) लगा रहे थे. इस 4 प्रतिशत एसएडी का मतलब यह था कि घरेलू उद्योग को जो वैट देनी पड़ती थी, उसी तरह आयातित को 4% स्पेशल एडिशन ड्यूटी लगाते थे. एक तरह से राज्यों को 14% वैट के बदले में आयातित वस्तु पर 4% एसएडी लगाया जा रहा था. इस तरह स्पष्ट रुप में देख सकते हैं कि घरेलू उद्योगों पर तो कर बोझ 14% था, जबकि आयातित वस्तुओं पर केवल 4%. परंतु जीएसटी आने के बाद घरेलू उद्योगों पर टैक्स का जितना बोझ है, उतना ही आयातित पर भी लगेगा. इससे घरेलू उद्योगों को न केवल बल मिलेगा अपितु भारतीय घरेलू उद्योग भी चीनी माल को आसानी से बाजार में चुनौती दे सकेंगे. इसी कारण पहले आयातित माल सस्ता पढ़ रहा था, जबकि घरेलू महंगा. इससे घरेलू उद्योग चीनी आयातित माल का सामना कर सकेंगे.
इसी तरह पहले 'सी' फॉर्म भरकर व्यापारी सीएसटी में इंटरस्टेट ले जाने की जानकारी देते थे, लेकिन वह माल दूसरे राज्य जाता ही नहीं था, बल्कि उसी राज्य में बेच दिया जाता था. इस तरह व्यापारी केवल 2 प्रतिशत टैक्स देकर काम चला लेता था तथा राज्य के 14% वैट से बचा रह जाता था. अब जीएसटी में यह संभव नहीं है. अब अगर दूसरे राज्य ले भी जाना है, तो उसे पूरा का पूरा टैक्स भरना होगा. राजस्व सचिव के अनुसार 2% के दर से भी राज्यों के राजस्व में कम से कम 50-60 हजार करोड़ बचेंगे, जिसका प्रयोग पुन: राष्ट्र निर्माण हेतु अवश्य हो सकेगा.
इसके अतिरिक्त जीएसटी से देश में निवेश में वृद्धि होगी तथा निवेश की गई राशि का भी 'मेक इन इंडिया' के लिए अधिकतम प्रयोग हो सकेगा. विदेशी निवेश के क्षेत्र में भी अब भारत चीन को कड़ी चुनौती दे सकेगा. इस तरह जीएसटी से जहां भारत में चीनी माल के लिए प्रतिस्पर्धा कठोर होगा, वहीं निवेश में भी चीन को कड़ी चुनौती मिलेगी.
जीएसटी से देश एक आधुनिक कर प्रणाली की ओर आगे बढ़ रहा है जो पारदर्शिता के साथ काले धन और भ्रष्टाचार को रोकने का अवसर प्रदान करती है. सरकार ने कालाधन, जमाखोरी पर कार्रवाई करने हेतु एक चक्रव्यूह की रचना की है, जिसका असली दरवाजा जीएसटी ही है. विदेश में जमा कालाधन पर प्रहार के बाद नोटबंदी ने कैश गुमनामी को खत्म किया. पैन को आधार से जोड़ने का का भी क्रांतिकारी परिणाम भविष्य में दिखने को मिलेगा. इसके अतिरिक्त सरकार ने बेनामी कानून में संशोधन करके भी भ्रष्टाचार पर कड़ी चोट की.
इस तरह काले धन पर लगातार कठोर रवैया राष्ट्र को सशक्त बनाएगा, तभी हम लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आधारभूत संरचना पर समुचित ध्यान दे सकेंगे. चीन से अगर दीर्घकालिक लड़ाई की जीत हासिल करनी है, तो कालाधन पर प्रबल प्रहार अब अनिवार्यता में बदल चुकी है.

16/06/2017

👌👌👌👌👌👌👌👌👌
*टैक्स* न लगा देना मोदीजी
कभी दोस्ती पर .....

क्योंकि, मेरी ये संपत्ति,
मेरी *आय से अधिक* है..!!

🌹🌹🙏🏻🌹🌹

14/06/2017

😡चोर उच्चके- व्यापारी के पीछे,
😡पुलिस वाले - व्यापारी कै पीछे,
😡इनकम टेक्स वाले- व्यापारी कै पीछे,
😡सेल्स टेक्स वाले - व्यापारी कै पीछे,
😡हॉलमार्क वाले- व्यापारी के पीछे,
😡एक्ससाइज़ वाले- व्यापारी के पीछे,
😡सविॅस टैक्स वाले - व्यापारी के पीछे,
😡प्रोफेशनल टैक्स वाले- व्यापारी के पीछे,
😡वैल्थ टैक्स वाले - व्यापारी के पीछे,
😡कार्पोरेशन गुमास्ता वाले- व्यापारी के पीछे,
😡फुड सेफ्टी ड्रग वाले- व्यापारी के पीछे,
अब सिर्फ 😡आर्मी बाकि रह गयी
वो भी लगा दो..

साला अभी तक ये समझ में नही आया
हम व्यापारी लोग देश की जनता को सामान बेचते हैं या RDX...
😡भड़का हुआ व्यापारी
*सच्चा व्यापारी देखते ही शेयर करे*

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