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21/02/2023

What is the welding principle of low-melting aluminum welding wire?Low-melting aluminum welding wire is a common argon arc welding electrode.The argon arc welding technology is based on the principle of ordinary arc welding. It uses argon gas to protect the metal welding material. Through high current, the welding material is melted into a liquid on the welded substrate to form a molten pool. It is a welding technology in which the welding material achieves metallurgical bonding. After cooling, a weld is formed.

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21/02/2023

ACCURATE MEASUREMENT
With clear engraving metric scales, square ruler is accurate and easy to read. 3D design, no need to flip the body when measuring, just slide to mark the left and right 45 degree angles.With 45°& 90°limit stop and 0-90° scale, aluminum angle ruler could allow you to mark the angle easily.

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21/02/2023

The PowerSphere™ Grinder Attachment is an amazing tool that can help you create smooth, concave surfaces in no time! It’s perfect for carving wooden spoons and bowls. You can also use it to sculpt small pieces of wood into beautiful shapes. This attachment will make your projects look professional and polished!

Wishing you all a very happy & prosperous Onam.🥳🥳Onam is not just a festival of harvest but an ancient tradition associa...
21/08/2021

Wishing you all a very happy & prosperous Onam.🥳🥳

Onam is not just a festival of harvest but an ancient tradition associated with the fifth avatar of Bhagwan Vishnu Ji.
The story dates back to the Treta Yuga, when demon king Mahabali ruled the three Worlds after defeating Indra, the king of Devas in a battle. It was during his reign that Bhagwan Vishnu appeared as a dwarf, a Brahmin boy named Vamana.

Vamana- a rare Oleograph from Raja Ravi Varma.

तालिबान रिटर्न्स ज़िम्मेदार कौन?हिम्मत और साहस तो भीख में भी नहीं दिए जा सकते, यह तो स्वयं ही निर्मित करने पड़ेंगे। अफ़ग...
17/08/2021

तालिबान रिटर्न्स ज़िम्मेदार कौन?
हिम्मत और साहस तो भीख में भी नहीं दिए जा सकते, यह तो स्वयं ही निर्मित करने पड़ेंगे।
अफ़ग़ानिस्तान का समाज भली भाँति समझ ले!

वैसे मैं स्वयं को अप्रचलित बातों को बोलने वाले विचारक के रूप में ही उभरते देख रहा हूँ। लेकिन अप्रचलित सत्य बोलना मात्र इस आधार पर तो नहीं छोड़ सकता की बाक़ी लोग नहीं बोलते।
सत्य को सदा स्पष्टता से बोलना ही चाहिए ऐसा मेरा मानना है फिर चाहे वो प्रचलित हो या अप्रचलित। कम से कम झूठ बोलने और बेचने वालों में, मैं अपना नाम कभी भी नहीं लिखवाना चाहूँगा।
अफ़ग़ानिस्तान के वर्तमान हालत के लिए कौन ज़िम्मेदार है, इसमें कुछ पक्षों के नाम चर्चा में है जैसे तालिबान, अफ़ग़ानिस्तान सरकार, अमेरिका, रुस, UNO, इस्लामिक देश, इस्लाम को मानने वाले लोग और पूरा मानव समाज। लेकिन इन सबके इतर एक और भी पक्ष है जिसकी चर्चा कोई नहीं कर रहा जिसे सब सहानुभूति ही दे रहे है, हक़ीक़त में उसका सबसे ज़्यादा दोष है। ज़्यादा नहीं तो किसी से कम भी नहीं ही है।
मैं बात कर रहा हूँ अफ़ग़ानिस्तान के उस समाज की जो आज पीड़ित है।
जिसके लिए हम सब सहानुभूति रख रहे है, क्या लगता है, उसका कोई दोष नहीं है, वर्तमान परिस्थिति के निर्माण में? दोष है। क्योंकि यदि यह समाज चाहता, समाज में इच्छा-शक्ति/आत्मसम्मान होता तो यह दिन कभी भी नहीं देखना पड़ता और समस्या बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी होती। लेकिन स्वार्थी समाज को जब तक माथे पर बंदूक़ नहीं लगे तब तक यह सब सोचने के लिए समय कहाँ? चैन कहाँ?
भारत के कथित सेक्यूलरों की तरह ही अफ़ग़ानिस्तान का समाज भी सोता रहा, समाज में फैल रही आराजकता को नज़रंदाज़ करता रहा, और अपने निजी स्वार्थों और हितों वाली संकीर्ण सोच के साथ अमूल्य समय व्यर्थ करता रहा। भीख पर पलने का आदि हो गया तथा स्वयं परिश्रम करना नहीं चाहा। सत्य यही है, वे पीड़ित है मात्र इसलिए वे निर्दोष तो नहीं हो सकते।
अमेरिका, UNO (nato) को कोई कितना भी दोष दे और इस विचार को नज़रंदाज़ करें। बेचारा, असहाय, पीड़ित, प्रताड़ित जैसे विशेषणों से अलंकृत करके चाहे इस समाज को निर्दोष सिद्ध करने की कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन यह प्रश्न हमेशा उठेगा कि प्रताड़ित समाज क्या कर रहा था, जब यह स्थिति बन रही थी?
भला किसी अन्य की रक्षा के लिए आप अपनी जान क्यों गवाएँ? ख़ासकर तब जब प्रताड़ित पक्ष अपनी कामचोरी की वजह से सब झेल रहा हो, स्वयं कुछ करना ही नहीं चाहत।
अमेरिका ने सात समंदर पार से अपने प्रशिक्षित सैन्य जवानों को भेजकर बीस वर्षों तक 2001-2021 तक अरबों डॉलर खर्च कर तालिबान से अफ़ग़ानिस्तान को बचाया। यहाँ तक सरकार का गठन करवाया। भारत जैसे देशों ने आर्थिक सहायता दी, सबने यथा सम्भव सहायोग किया। यहाँ काल बहुत महत्वपूर्ण है २० वर्षों तक सबने सब कुछ किया तो और २०वर्षों में तो पीढ़ी बदल जाती है। तो फिर अफ़ग़ानिस्तान का समाज एक सशक्त पीढ़ी का निर्माण क्यों नहीं कर पाया जो उसकी रक्षा कर सकें? यह प्रश्न उठता है और उठता रहेगा। तालिबान के लड़ाके भी कोई आसमान से सीधे तो टपकते है नहीं, इसी समाज से ही जाते है। उन्हें जाने से यह समाज रोक क्यों नहीं पाया? जब अस्तित्व का ख़तरा है तो हर कोई युद्ध सिखता। भारतीय समाज की तरह आपके पास समय तो नहीं था न, की अभी ख़तरा ढंग से नहीं आया है, जब ढंग से आएगा तब देखेंगे। फिर आपने उचित और सशक्त निर्णय क्यों नहीं किया?
महिलाओं को तो पता था न, की तालिबान के शासन में क्या होना है, तो उन्होंने क्यों अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं दिए? माँ तो पहला गुरु होती है संतति का और हर समाज में होती है तो उन्होंने क्यों स्वयं के उत्तरदायित्व का निर्वाह नहीं किया?
आज आप रो रहे हो की पूरा विश्व आपको नज़रंदाज़ कर रहा है। पूरी दुनिया ने अपने यहाँ कट्टरपंथियों को तैयार करके अफ़ग़ानिस्तान में नहीं भेजा था। इसलिए आपको अपनी सामाजिक शिक्षाओं और व्यवस्थाओं में सुधार लाना पड़ेगा। कोई और आपके लिए क्यों और कब तक लड़ेगा? समस्या आपकी है आप स्वयं उसे सुलझाओं सब संगठित होवो, आप तीन करोड़ हो तालिबानी मात्र दो लाख।
हिम्मत और साहस तो भीख में भी नहीं दिए जा सकते यह तो स्वयं ही निर्मित करने पड़ेंगे।

यदि अफ़ग़ानिस्तान के लोगों में ज़रा आत्मसम्मान होता तो वे संघर्ष करते न की किसी की भीख पर चिरकाल तक स्वयं को आश्रित करते। जब तालिबान के आतंकी ‘लानतों’ वाली गोलियों के साथ इतने शक्तिशाली हो सकते है तो फिर अमेरिका की प्रशिक्षित सेना के होते हुए भी अफ़ग़ानिस्तान ने अपनी सेना क्यों नहीं बनायी? वहाँ का समाज क्यों नहीं प्रशिक्षित क्यों नहीं हुआ? इज़राइल की तर्ज़ पर स्वयं को सशक्त करते।

अधिकारों और हक़ की बात करने वाली पूरी विश्व बिरादरी ने भी आज बहुत ही कायरतापूर्ण बयान दिए है। अरे! अफ़ग़ानिस्तान तालिबानियों की पैतृक सम्पत्ति थोड़े ही है। अफ़ग़ानिस्तान के लोग कहाँ जाएँगे? वे देश के बाहर क्यों जाए? अजीब है कहने और करने वाले दोनो ही!
किसी को भी कही नहीं जाना चाहियें, किसी अन्य देश पर बोझ बनने से लाख बेहतर है अपने देश के हित और निर्माण के लिए लड़ते लड़ते मर जाओ। सब कायरों की तरह क्यों व्यवहार कर रहे हो १.८लाख सेना तो आपके पास भी है। जिसे को मिले उससे लड़ो और इस समस्या का समूल नाश करके एक नए राष्ट्र का निर्माण करो। न की जानवरों की भाँति भगदड़ मचाओं।

ध्यान रहे! दुनिया का पूरा इतिहास पलटकर देश लो इन कट्टरपंथियों से लड़ाई स्वयं ही लड़नी पड़ती है, इज़राइल से बेहतर उदाहरण नहीं होगा जहां एकजुट समाज खड़ा हुआ और लड़ा, जीता और जीत रहा है।
वही भारत का समाज सोता रहा और अपनी संस्कृति का निरंतर विनाश करवाता रहा। सिकुड़ता रहा और जा रहा है।

16/08/2021

अफ़ग़ानिस्तान के बहुसंख्यक वर्ग को देश में आश्रय देना भारत के लिए आत्मघाती कदम होगा।

सराहनीय कदम!
30/06/2021

सराहनीय कदम!

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