11/11/2020
एक दिन दूरदर्शन के एक साइंस प्रोग्राम में मैंने सुना था कि "फ़ादर ऑफ़ फोटोग्राफी" किसी "अलहज़ेन" नाम के मुस्लिम वैज्ञानिक को कहा जाता है जिन्होंने सबसे पहले मोर्डन पिनहोल कैमरे के डिज़ाइन का आइडिया दिया था... पिनहोल कैमरे के आविष्कार का श्रेय "अलहज़ेन" को दिया जाता है.... ... ये अलहज़ेन कौन थे जिन्हें फ़ादर ऑफ फोटोग्राफी का ख़िताब और कैमरे के अविष्कार का श्रेय दिया जाता है ??... आज सोचा, उसी जानकारी को आपके साथ शेयर करूँ... ... जब आप सूरज की तेज़ रौशनी में मौजूद किसी हर तरफ़ से बंद अंधेरे कमरे में बने एक छेद से आती रौशनी को किसी सरफेस पर डालें और फिर गौर करें तो आपको बाहर की चीज़ों और चलते फिरते लोगों की बहुत छोटी छोटी और रंगीन परछाइयाँ नज़र आती हैं, जैसे आप टीवी की स्क्रीन पर रंगीन तस्वीरें देखते हो ठीक उसी तरह, बस ये परछाइयाँ होती उल्टी हैं, इसे "कैमरा ऑब्स्क्युरा इफ़ेक्ट" कहा जाता है और इसे बहुत पहले से लोग जानते थे... इस बात की जानकारी लोगों को पहले से थी इस बात की जानकारी पुराने चीनी साहित्य में मिलती है, पर ये होता क्यों है और इस प्रक्रिया के पीछे कौन सा साइंटिफिक लॉ काम करता है ?? इस बात की जानकारी लोगों को नही थी.... इस प्रक्रिया के पीछे के पूरे वैज्ञानिक आधार को सबसे पहले मिस्र के मुस्लिम वैज्ञानिक "हसन इब्न अलहैथम" उर्फ़ "अलहज़ेन" (965-1040 ईसवी) ने बहुत बेहतर ढंग से अपनी किताबों में डायग्राम बनाकर और प्रयोगों के माध्यम से समझाये ... इब्न हैथम ने ही कैमरा ऑब्स्क्युरा में पिनहोल और फोकल पॉइंट का गणनात्मक सम्बन्ध बकायदा लिखकर समझाया, जिससे लोगों को ये समझ आया कि बड़े कमरे की बजाए बहुत छोटे बक्स के प्रयोग से भी तस्वीर को प्रोजेक्ट किया जा सकता है, और सबसे पहले कैमरा ऑब्स्क्युरा के डार्क रूम में स्क्रीन का प्रयोग कर के ज़्यादा अच्छी इमेज को उतारने में इब्न हैथम ने ही सफलता पाई थी...
इब्न हैथम के बनाए डायग्राम और प्रयोग जब लैटिन भाषा में अनुदित होकर यूरोप के वैज्ञानिकों तक पहुँची तो यूरोपीय वैज्ञानिकों ने उन डायग्रामों और गणनाओं के प्रयोगों से छोटे कैमरे बनाने में सफ़लता प्राप्त की... मुझे ये जानकारी बहुत मज़ेदार लगी कि पुराने समय में यानी सोलहवीं शताब्दी और उसके आसपास "कैमरा ऑब्स्क्युरा" जो एक बक्से के बराबर होता था, उस कैमरे के सहारे तस्वीरें इस तरह बनाई जाती थीं कि बक्से में बने एक छोटे छेद की मदद से मनचाही तस्वीर को कागज़ पर प्रोजेक्ट कर लिया जाता था और फिर क्योंकि तस्वीर तो एक परछाईं होती थी, और उसे कागज़ पर प्रिंट करने की तकनीक तब तक थी नही, तो उस परछाईं पर एक कलाकार सधे हाथों से पेन चलाकर तस्वीर को ट्रेस कर लिया करता था....!!!... ख़ैर बाद में इब्न हैथम की लेखनियों की सहायता लेकर आधुनिक पिनहोल कैमरा भी ईजाद कर लिया गया, व केमिकल्स की मदद से तस्वीरों को प्रिंट करने की तकनीक भी विकसित कर ली गई...अंततः इब्न हैथम "फ़ादर ऑफ फोटोग्राफी" कहलाये गए.. !!!
Zia Imtiyaz
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Ibn_al-Haytham
https://en.m.wikipedia.org/wiki/History_of_the_camera