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26/07/2021
03/05/2021
11/11/2020

एक दिन दूरदर्शन के एक साइंस प्रोग्राम में मैंने सुना था कि "फ़ादर ऑफ़ फोटोग्राफी" किसी "अलहज़ेन" नाम के मुस्लिम वैज्ञानिक को कहा जाता है जिन्होंने सबसे पहले मोर्डन पिनहोल कैमरे के डिज़ाइन का आइडिया दिया था... पिनहोल कैमरे के आविष्कार का श्रेय "अलहज़ेन" को दिया जाता है.... ... ये अलहज़ेन कौन थे जिन्हें फ़ादर ऑफ फोटोग्राफी का ख़िताब और कैमरे के अविष्कार का श्रेय दिया जाता है ??... आज सोचा, उसी जानकारी को आपके साथ शेयर करूँ... ... जब आप सूरज की तेज़ रौशनी में मौजूद किसी हर तरफ़ से बंद अंधेरे कमरे में बने एक छेद से आती रौशनी को किसी सरफेस पर डालें और फिर गौर करें तो आपको बाहर की चीज़ों और चलते फिरते लोगों की बहुत छोटी छोटी और रंगीन परछाइयाँ नज़र आती हैं, जैसे आप टीवी की स्क्रीन पर रंगीन तस्वीरें देखते हो ठीक उसी तरह, बस ये परछाइयाँ होती उल्टी हैं, इसे "कैमरा ऑब्स्क्युरा इफ़ेक्ट" कहा जाता है और इसे बहुत पहले से लोग जानते थे... इस बात की जानकारी लोगों को पहले से थी इस बात की जानकारी पुराने चीनी साहित्य में मिलती है, पर ये होता क्यों है और इस प्रक्रिया के पीछे कौन सा साइंटिफिक लॉ काम करता है ?? इस बात की जानकारी लोगों को नही थी.... इस प्रक्रिया के पीछे के पूरे वैज्ञानिक आधार को सबसे पहले मिस्र के मुस्लिम वैज्ञानिक "हसन इब्न अलहैथम" उर्फ़ "अलहज़ेन" (965-1040 ईसवी) ने बहुत बेहतर ढंग से अपनी किताबों में डायग्राम बनाकर और प्रयोगों के माध्यम से समझाये ... इब्न हैथम ने ही कैमरा ऑब्स्क्युरा में पिनहोल और फोकल पॉइंट का गणनात्मक सम्बन्ध बकायदा लिखकर समझाया, जिससे लोगों को ये समझ आया कि बड़े कमरे की बजाए बहुत छोटे बक्स के प्रयोग से भी तस्वीर को प्रोजेक्ट किया जा सकता है, और सबसे पहले कैमरा ऑब्स्क्युरा के डार्क रूम में स्क्रीन का प्रयोग कर के ज़्यादा अच्छी इमेज को उतारने में इब्न हैथम ने ही सफलता पाई थी...
इब्न हैथम के बनाए डायग्राम और प्रयोग जब लैटिन भाषा में अनुदित होकर यूरोप के वैज्ञानिकों तक पहुँची तो यूरोपीय वैज्ञानिकों ने उन डायग्रामों और गणनाओं के प्रयोगों से छोटे कैमरे बनाने में सफ़लता प्राप्त की... मुझे ये जानकारी बहुत मज़ेदार लगी कि पुराने समय में यानी सोलहवीं शताब्दी और उसके आसपास "कैमरा ऑब्स्क्युरा" जो एक बक्से के बराबर होता था, उस कैमरे के सहारे तस्वीरें इस तरह बनाई जाती थीं कि बक्से में बने एक छोटे छेद की मदद से मनचाही तस्वीर को कागज़ पर प्रोजेक्ट कर लिया जाता था और फिर क्योंकि तस्वीर तो एक परछाईं होती थी, और उसे कागज़ पर प्रिंट करने की तकनीक तब तक थी नही, तो उस परछाईं पर एक कलाकार सधे हाथों से पेन चलाकर तस्वीर को ट्रेस कर लिया करता था....!!!... ख़ैर बाद में इब्न हैथम की लेखनियों की सहायता लेकर आधुनिक पिनहोल कैमरा भी ईजाद कर लिया गया, व केमिकल्स की मदद से तस्वीरों को प्रिंट करने की तकनीक भी विकसित कर ली गई...अंततः इब्न हैथम "फ़ादर ऑफ फोटोग्राफी" कहलाये गए.. !!!

Zia Imtiyaz

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Ibn_al-Haytham
https://en.m.wikipedia.org/wiki/History_of_the_camera

22/10/2020

👨‍🌾 ہرا دھنیا بہت جلد اور آسانی سے اُگنے والا پودا ہے، جسے گھر کے اندر اور باہر لگایا جاسکتا ہے۔

اس پودے کیلئے بہت زیادہ گرمی ، لو یا مرطوب موسم نقصان دہ ہوتا ہے ، البتہ ٹھنڈے اور دھوپ والے ماحول میں یہ خوب پروان چڑھتا ہے ۔ 🍀

آپ گملے میں 4-6 انچ مٹی ڈال کر اس میں دھنیے کے بیج یعنی گھروں میں استعمال ہونے والا ثابت دھنیا ، ہتھیلی پر مل کر تھوڑے تھوڑے فاصلے پر برتن میں پھیلا دیں ، اس کے اوپر کمپوزڈ کھاد پھیلا دیں اور پھر فوارے کی مدد سے اسے پانی دیں ۔🍀

ان بیجوں کو پھوٹنے کے لیے دھوپ والی اور خشک جگہ کا انتخاب کریں ۔

اس کے بیج 21 روز میں پھوٹ نکلتے ہیں ۔ ان بیجوں کو گملے میں 4 سے 6 انچ کے فاصلے پر ڈالیں ۔ تاکہ دھنیے کے پودے کو بڑھنے کیلئے جگہ ملے اور وہ مرجھانے کی بجائے تندرست ہوسکیں ۔🍀

دھنیے کا پودا 2 فٹ تک بلند ہوتا ہے ، اس پودے کو بہت زیادہ نمی اور دھند میں نہیں اُگانا چاہیے۔ یہی وجہ ہے ماہرین اپریل اور ستمبر کو اس کے بیج بونے کیلئے بہترین قرار دیتے ہیں ، جب اس کے پتے 8 انچ تک بڑے ہو جائیں تو انہیں قینچی سے اوپر سے کاٹ دیں اور نیچے کا دو سے تین انچ کے ڈنٹھل رہنے دیں ، اس پر کچھ روز بعد مزید پتے نکل آئیں گے ۔🍀

یاد رکھیں دھنیے کے ننھے پودے کو خشک نہ ہونے دیں ، البتہ جب اس کے پتے نکل آئیں تو پانی کی مقدار کم کر دیں کیونکہ اس پودے کیلئے بہت زیادہ نمی نقصان دہ ہے ۔🍀

دھنیے کیساتھ ہی بہت سی گھاس پھوس بھی اُگنا شروع کر دیتی ہے ، جو اس کی جڑوں کو نقصان پہنچاتی ہے ، اس لیے ساتھ ساتھ اسے نکالتے جائیں تاکہ پودے کو پھلنے پھولنے کا موقع ملے ۔🍀

بروقت ہارویسٹ👨‍🌾

پودوں پہ پھل پکنے کے بعد انہیں جلد از جلد کاٹنا چاہئیے تاکہ ان پر دوسرے پھل اگ سکیں۔

:پودوں کی صحت کی دیکھ بھال

​پودوں کی دیکھ بھال گھریلو باغبانی کے لئے بہت اہم ہے۔ اور اسکا سب سے بہترین طریقہ یہ ہے کہ روزانہ پانی دیتے وقت پودوں کا بغور معائنہ کرنا چاہئے۔ اسطرح آپ بیماریوں کا بروقت ممکنہ تدارک کرسکتے ہیں۔ اگر بیماری کے کوئی آثار نظر آئیں تو ان کا فوری علاج کیا جانا چاہئیے۔ پودوں کو عموماً سب سے زیادہ خطرہ رینگنے والے کیڑوں اور مختلف قسم کی مکھیوں سے ہوتا ہے لہٰذا انہیں بروقت بھگانا چاہئے یا پکڑ کر تلف کردیں۔

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