09/06/2021
धीरज वर्मा का जाना सिर्फ एक कलाकार का जाना नहीं है. उनका जाना है एक स्वप्न का चला जाना. उनकी जाना एक अतीव साधारण परिवार के उस प्रतिभाशाली कलाकार का चला जाना है जिसने रुकना और थमना नहीं सीखा था. कला से इतर धीरज जी की कहानी उस नौजवान की है जिसने किसी भी महत्त्वाकाँक्षा को अपनी कला पर भारी नहीं पड़ने दिया. एक ऐसा कलाकार जिसने एक छोटे से अल्पजीवी प्रकाशन से अपने करीयर की शुरुआत की मगर राज कॉमिक्स में भेड़िया के साथ अपनी पहचान बनाने में सफल रहे.
भारतीय कॉमिक्स में कंप्यूटर कलरिंग का चलन शुरू करना हो या अपनी वेबसाइट बनाना धीरज जी ने अपनी कला को निखारने और उसे सही स्थान दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी.
कुछ वर्ष पहले यूट्यूब पर अंग्रेज़ीदाँ लोगों के बीच अपनी देसी अंग्रेज़ी के साथ कॉमिक पिच करते उनके विडियो में उनमें किसी नौजवान से ज्यादा जोश दिख जाता है. हाल ही में डीसी फैन डोम में जिम ली को अपना पोर्टफ़ोलियो दिखाते धीरज जी की खुशी में जाने कितने भारतीय कॉमिक्स आर्टिस्ट की खुशी शामिल थी.
हार मानना उनकी प्रकृति में नहीं था. छोटे-बड़े-देशी-विदेशी हर प्रकाशन के लिये धीरज जी के पास समय था. रुकना थकना थमना मानो उन्होंने सीखा नहीं था. बीमारी उनके शरीर को कमज़ोर भले करती गयी मगर उनके जज़्बे को तोड़ पाना नामुमकिन था, अस्पताल में काँपते हाथों से रोज़ एक साँई बाबा की तस्वीर बना कर पोस्ट करते हुये उनका एक संदेश था हाल ही में - जिस दिन कोविड १९ खत्म हो जायेगा देश दुनिया से, मेरा स्केच उस दिन तक बनता रहेगा..
धीरज जी स्केच करते-करते चले गये, मगर ये वायरस उनके अदम्य जज़्बे को तोड़ नहीं पाया. एक रोज़ ये चाईनीज़ वायरस ज़रूर हारेगा सर! आप विजेता रहे और विजेता रहेंगे…
साभार- आलोक शर्मा